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Mahashivratri : महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ की असीम कृपा का सर्वश्रेष्ठ अवसर.. जानिए भगवान शिव-माता पार्वती के अलौकिक विवाह की कथा

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Mahashivratri: भगवान शिव को समर्पित महाशिवरात्रि का पावन पर्व शीघ्र ही आने वाला है, जो आध्यात्मिक शुद्धि और भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा प्राप्त करने का सर्वश्रेष्ठ अवसर माना जाता है। इस दिन भक्तजन उपवास रखकर श्रद्धापूर्वक शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि महाशिवरात्रि पर्व मनाने के पीछे क्या पौराणिक कथा है और इसका महत्व क्या है? आइए, इस लेख में हम महाशिवरात्रि के गूढ़ रहस्यों और उसकी महिमा पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं।

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महाशिवरात्रि: जानिए भगवान शिव और माता पार्वती के अलौकिक विवाह की कथा

महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। यह वह विशेष रात्रि है जब भगवान शिव तांडव करते हैं और सृष्टि के संहार एवं सृजन का कार्य करते हैं। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का शुभ शिव विवाह संपन्न हुआ था, जिसके कारण इस रात्रि को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। शिव पुराण के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी और अंततः इस शुभ दिन उनका विवाह हुआ। इस दिन अविवाहित कन्याएं उत्तम वर की प्राप्ति के लिए और विवाहित स्त्रियां अपने पति के दीर्घायु व सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह पर्व न केवल भारत में बल्कि विश्वभर में फैले शिव भक्तों द्वारा अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है।

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महाशिवरात्रि: पर्व का आध्यात्मिक महत्व और पूजा विधि

महाशिवरात्रि का पर्व न केवल भगवान शिव और माता पार्वती के शिव विवाह का स्मरण कराता है, बल्कि यह आत्म-नियंत्रण, तपस्या और भक्ति का भी प्रतीक है। यह वह रात है जब भगवान शिव अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं और उनकी सभी इच्छाएं पूर्ण करते हैं। यह माना जाता है कि महाशिवरात्रि पर भगवान शिव पृथ्वी पर मौजूद सभी शिवलिंगों में प्रवेश करते हैं, जिससे इन सभी शिवलिंगों में शिवत्व की शक्ति समाहित हो जाती है। इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

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महाशिवरात्रि 2026: शुभ मुहूर्त

तिथिसमय
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी प्रारंभ16 फरवरी 2026, सायं 05:46 बजे
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी समाप्त17 फरवरी 2026, सायं 04:09 बजे
निशिता काल पूजा का समय16 फरवरी 2026, रात्रि 12:09 बजे से 17 फरवरी 2026, रात्रि 01:00 बजे तक
प्रथम प्रहर पूजा का समय16 फरवरी 2026, सायं 06:40 बजे से रात्रि 09:47 बजे तक

महाशिवरात्रि पूजा विधि

  • महाशिवरात्रि के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • व्रत का संकल्प लें और भगवान शिव का ध्यान करें।
  • पूजा स्थान को शुद्ध कर शिवलिंग स्थापित करें या मंदिर में जाकर पूजा करें।
  • शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल, चंदन, अक्षत और रोली अर्पित करें।
  • भगवान शिव को भोग में मौसमी फल और मिठाई चढ़ाएं।
  • दीपक प्रज्वलित करें और धूप-अगरबत्ती जलाएं।
  • महामृत्युंजय मंत्र या शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करें।
  • शिव चालीसा और शिव स्तोत्र का पाठ करें।
  • रात्रि में जागरण कर चार प्रहर की पूजा करें और अगले दिन व्रत का पारण करें।

भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार सृष्टि के निर्माण को लेकर ब्रह्मा और विष्णु जी के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। इस विवाद को सुलझाने के लिए भगवान शिव एक विशालकाय ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए, जिसका आदि और अंत कोई नहीं जान पाया। तभी से शिवलिंग पूजा की परंपरा आरंभ हुई। एक अन्य कथा के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव ने हलाहल विष का पान कर सृष्टि को बचाया था। लेकिन सर्वाधिक प्रचलित कथा भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह से संबंधित है। यह वह पावन दिन था जब शिव और शक्ति का मिलन हुआ। देवी सती के आत्मदाह के बाद, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनके तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को उनसे विवाह किया। यह दिन प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक बन गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

महाशिवरात्रि व्रत का महत्व और नियम

महाशिवरात्रि का व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस व्रत को करने से व्यक्ति को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। अविवाहितों को सुयोग्य वर या वधू मिलते हैं और विवाहितों का दांपत्य जीवन सुखमय होता है। इस दिन अन्न का त्याग किया जाता है और केवल फलाहार ही ग्रहण किया जाता है। व्रत के दौरान तामसिक भोजन, झूठ बोलना और किसी का अनादर करने से बचना चाहिए।

महाशिवरात्रि पर क्या करें और क्या न करें

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का अभिषेक करना, मंत्रों का जाप करना, दान करना और रात्रि जागरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। वहीं, इस दिन मांस-मदिरा का सेवन, क्रोध करना, अपशब्द बोलना और किसी का अनादर करना वर्जित माना जाता है। पवित्रता और सात्विकता का पालन करना चाहिए।

ॐ नमः शिवाय।

महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

निष्कर्ष और उपाय

महाशिवरात्रि का पर्व न केवल एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह आत्म-मंथन, ध्यान और आंतरिक शुद्धि का भी अवसर है। इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा और व्रत सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करता है। भगवान शिव की कृपा से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। इस दिन शिव मंत्रों का जाप, रुद्राभिषेक और शिव चालीसा का पाठ विशेष फलदायी होता है। जो लोग व्रत नहीं रख सकते, वे भी श्रद्धापूर्वक शिव मंदिर जाकर दर्शन और अभिषेक कर सकते हैं। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए गरीबों और जरूरतमंदों को दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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