Darbhanga Police: दरभंगा जिले में पुलिस प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद जमीनी विवाद को लेकर हुई खूनी मारपीट में चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। गुरुवार, 20 अगस्त को बेनीपुर प्रखंड के मकरमपुर गांव में यह घटना सामने आई, जहां लाठी-डंडों से हुए हमले में तीन लोग बुरी तरह जख्मी हो गए।
घायलों में एक पक्ष के गोविंद चौधरी, उनकी पत्नी और पुत्र शामिल हैं, जिन्हें नाजुक हालत में दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) में भर्ती कराया गया है। दूसरे पक्ष से कुमार चौधरी भी इस झड़प में घायल हुए हैं।

पुलिस सामने खड़ी थी, फिर भी खूनी संघर्ष! दरभंगा में जमीन विवाद पर बड़ा बवाल
Darbhanga News: बिहार के दरभंगा जिले में पुलिस की मौजूदगी में जमीनी विवाद को लेकर खूनी संघर्ष हो गया। मकरमपुर गांव में गुरुवार, 20 अगस्त को हुई इस घटना में चार लोग घायल हुए, जिनमें से एक पक्ष के तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। आरोप है कि डायल-112 टीम के सामने ही दो पक्षों ने एक-दूसरे पर हमला किया, जिससे पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बेनीपुर नीपुर प्रखंड क्षेत्र के मकरमपुर गांव में लंबे समय से दो पक्षों के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। गुरुवार को विवादित जमीन की सर्वे प्रक्रिया के लिए अमीन पहुंचे थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई और फिर देखते ही देखते मारपीट शुरू हो गई। इस दौरान गोविंद चौधरी, उनकी पत्नी और पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गए। दूसरे पक्ष के कुमार चौधरी को भी चोटें आई हैं।
पुलिस की मौजूदगी में क्यों हुई मारपीट?
गोविंद चौधरी के परिजनों ने बताया कि विवाद की आशंका के मद्देनजर उन्होंने डायल-112 पर सूचना दी थी। डायल-112 की टीम के साथ वे विवादित जमीन पर पहुंचे थे, लेकिन वहां पहुंचते ही दूसरे पक्ष के लोगों ने पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में ही उन पर हमला कर दिया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि मौके पर पुलिसकर्मी मौजूद होने के बावजूद उन्होंने हमले को रोकने के लिए प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया।
गंभीर घायलों का डीएमसीएच में इलाज, परिजनों का आरोप
मारपीट में घायल हुए सभी लोगों को ग्रामीणों की मदद से बेनीपुर अनुमंडल अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गोविंद चौधरी, उनकी पत्नी और पुत्र की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें डीएमसीएच रेफर कर दिया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस की लापरवाही के कारण ही यह घटना इतनी बढ़ गई।
आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर किया हंगामा
पुलिस की मौजूदगी में हुई मारपीट की घटना से गोविंद चौधरी के परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए। उन्होंने सड़क जाम कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जाम की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझा-बुझाकर जाम समाप्त कराया। पुलिस फिलहाल दोनों पक्षों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। घटना के दौरान पुलिस की भूमिका पर उठ रहे सवालों की भी पड़ताल की जा रही है।
पुलिस की मौजूदगी में कैसे हुआ हमला?
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि मकरमपुर गांव में दो परिवारों के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। विवादित भूमि की सर्वे प्रक्रिया के लिए जब अमीन मौके पर पहुंचे, तो दोनों पक्षों में पहले कहासुनी हुई और फिर देखते ही देखते मारपीट शुरू हो गई। इस दौरान पुलिस प्रशासन के कर्मी भी मौके पर मौजूद थे।
गोविंद चौधरी के परिजनों ने गंभीर आरोप लगाया है कि विवाद की आशंका को देखते हुए उन्होंने पहले ही डायल-112 पर सूचना दी थी। उनका कहना है कि डायल-112 की टीम के साथ वे विवादित जमीन पर पहुंचे थे, लेकिन दूसरे पक्ष के लोगों ने पुलिस की मौजूदगी में ही उन पर हमला कर दिया। परिजनों ने सवाल उठाया कि पुलिसकर्मी मौके पर होने के बावजूद हमले को रोकने के लिए कोई प्रभावी हस्तक्षेप क्यों नहीं कर सके।
घायलों का इलाज और ग्रामीणों का आक्रोश
मारपीट में घायल सभी लोगों को स्थानीय ग्रामीणों की मदद से बेनीपुर अनुमंडल अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार मिलने के बाद गोविंद चौधरी और उनके परिवार के तीन गंभीर रूप से घायल सदस्यों को बेहतर इलाज के लिए डीएमसीएच रेफर कर दिया गया। इस घटना से आक्रोशित गोविंद चौधरी के परिजनों ने तत्काल सड़क जाम कर दिया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर सड़क जाम समाप्त कराया और स्थिति को सामान्य किया।
पुलिस अब इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है। दोनों पक्षों की तरफ से लगाए गए आरोपों की सच्चाई खंगाली जा रही है। विशेष रूप से, पुलिस की मौजूदगी में हुई इस खूनी झड़प और उस दौरान पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।








