Bihar Governor Secretariat: बिहार में राज्यपाल सचिवालय ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए अपने चार स्टेनोग्राफर की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है। इस कार्रवाई से सचिवालय में हड़कंप मच गया है। जिन कर्मियों की सेवा समाप्त की गई है, उनमें राजेश कुमार, अखिलेश कुमार मिश्र, सुशील कुमार और संगीता कुमारी के नाम शामिल हैं। यह निर्णय लोकभवन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, आवश्यक दक्षता की कमी, निर्धारित दक्षता परीक्षा में लगातार अनुपस्थित रहने और नियुक्ति प्राधिकारी के निर्देशों की अनदेखी के आधार पर लिया गया है।
क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?
लोकभवन के मुताबिक, इन चारों कर्मचारियों की नियुक्ति 23 जनवरी 2025 को स्टेनोग्राफर के पद पर हुई थी और वे सभी परिवीक्षा (प्रोबेशन) अवधि में थे। इसी दौरान उनकी कार्यक्षमता को लेकर संबंधित अधिकारियों से प्रतिकूल रिपोर्ट प्राप्त हुई। इसके बाद उनकी वास्तविक दक्षता की जांच के लिए राज्यपाल के आदेश पर एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। स्टेनोग्राफर के पद के लिए शॉर्टहैंड में डिक्टेशन लेना और उसका सही टाइप किया हुआ प्रतिलेख तैयार करना मूलभूत दक्षता मानी जाती है।
दक्षता परीक्षा में लगातार गैरहाजिरी
लोकभवन ने बताया कि इन कर्मचारियों की नियुक्ति से पहले अनिवार्य लिखित परीक्षा और शॉर्टहैंड-टाइपिंग दक्षता परीक्षा नहीं ली गई थी। इसके बाद विभाग ने उनकी क्षमताओं का आकलन करने की प्रक्रिया शुरू की। चारों कर्मचारियों को 22 जुलाई 2026 को दक्षता परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया गया, लेकिन वे इसमें उपस्थित नहीं हुए। उन्हें एक और मौका देते हुए 6 अगस्त 2026 को अंतिम दक्षता परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें भी वे शामिल नहीं हुए।
लोकभवन ने कहा, “कर्मचारियों की ओर से अपने पद के लिए जरूरी मूलभूत दक्षताओं से छूट देने की मांग भी की गई थी। उपलब्ध रिकॉर्ड, अधिकारियों की रिपोर्ट और परीक्षा में लगातार अनुपस्थिति को कार्रवाई के दौरान ध्यान में रखा गया। चारों कर्मियों को अपनी दक्षता साबित करने के लिए पर्याप्त अवसर दिए गए थे।”
प्रोबेशन अवधि में सेवा समाप्ति के नियम
सेवा समाप्ति के इस निर्णय में प्रोबेशन अवधि की भूमिका महत्वपूर्ण रही। संबंधित सेवा नियमों के तहत, यदि परिवीक्षा अवधि में किसी कर्मचारी की सेवा संतोषजनक नहीं पाई जाती है, तो तय शर्तों के अनुसार उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है। प्रशासन के अनुसार, इन अवसरों के बावजूद परीक्षा में शामिल न होना और नियुक्ति प्राधिकारी के निर्देशों का पालन न करना एक गंभीर विषय था। इसी आधार पर चारों स्टेनोग्राफर की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। यह कार्रवाई सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और दक्षता बनाए रखने के लिए एक स्पष्ट संदेश देती है।







