Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद की बिहार में आठ सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर की कड़वाहट खुलकर सामने आ गई है। मतों के बिखराव को रोकने के मकसद से बुलाई गई एनडीए नेताओं की बैठक के बाद, नेताओं के बयानों ने गठबंधन की अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया है। बीजेपी उम्मीदवार नवल किशोर यादव और जेडीयू विधायक अनंत सिंह के तीखे बयानों ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।
अनंत सिंह की भूमिका पर भड़के बीजेपी प्रत्याशी
एनडीए की बैठक खत्म होते ही पत्रकारों ने बीजेपी विधान परिषद प्रत्याशी नवल किशोर यादव से अनंत सिंह की भूमिका को लेकर सवाल किया। इस पर नवल किशोर यादव बेहद नाराज हो गए। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ लोग बिना किसी मुद्दे के सिर्फ ‘लटर-पटर’ बातें करते हैं।
‘जे न पूछे से खेसारी के दाल। अनंत सिंह आ फलना सिंह के बात करते हैं। कोई मुद्दा नहीं है तो ऐसे ही लटर-पटर बात करते हैं।’
अनंत सिंह का बड़ा ऐलान, जन सुराज प्रत्याशी को समर्थन
बैठक के तुरंत बाद जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने मीडिया से बातचीत में अपना रुख स्पष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि वे जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह को ही चुनाव जिताएंगे। अनंत सिंह ने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ हुई इस बैठक में चुनाव को लेकर कोई चर्चा ही नहीं हुई। अपने इस फैसले के पीछे का कारण बताते हुए अनंत सिंह ने नीरज कुमार के अतीत के राजनीतिक विरोध को आधार बनाया। उन्होंने कहा कि यह कोई दलीय चुनाव नहीं है, इसलिए वे जेडीयू नेता नीरज कुमार का खुलकर विरोध करेंगे, क्योंकि नीरज कुमार ने अतीत में उनका राजनीतिक विरोध किया था।
मंत्री जमा खान ने संभाली स्थिति, टाल गए सवालों को
गठबंधन में मचे इस घमासान के बीच, बिहार सरकार के मंत्री जमा खान ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की। उन्होंने मीडिया से कहा कि अनंत सिंह को मनाने का कोई सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि वे उनके भाई हैं। जमा खान ने यह भी दावा किया कि पूरा एनडीए एकजुट होकर चुनाव लड़ेगा। हालांकि, जब उनसे अनंत सिंह द्वारा विरोधी प्रत्याशी को खुले तौर पर समर्थन दिए जाने के ऐलान पर सवाल पूछा गया, तो मंत्री जमा खान इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।
रामकृपाल यादव के विरोधाभासी बयान
इस पूरे घटनाक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव के बयान विरोधाभासी दिखे। बैठक से पहले उन्होंने यह कहकर सबको चौंका दिया था कि उन्हें बैठक का मुख्य एजेंडा ही नहीं मालूम। लेकिन बैठक समाप्त होने के बाद उनके सुर बदल गए। रामकृपाल यादव ने अनंत सिंह का बचाव करते हुए उन्हें पार्टी का ‘आदरणीय नेता और वफादार सिपाही’ बताया। उन्होंने कहा कि अनंत सिंह पार्टी को जिताने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
बिहार विधान परिषद के इन चुनावों में एनडीए के भीतर की यह खींचतान गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह आंतरिक कलह चुनाव परिणामों को किस तरह प्रभावित करती है और क्या एनडीए नेतृत्व इस स्थिति को संभालने में सफल हो पाता है।







