Cough Syrup Sale Rules: भारत सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने दवाओं की बिक्री से जुड़े नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है, जिसका असर बिहार समेत देश के ग्रामीण क्षेत्रों में कफ सिरप की उपलब्धता पर पड़ेगा। मंगलवार को मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन करते हुए छोटे गांवों में कफ सिरप की बिक्री पर दी गई छूट को समाप्त कर दिया है। अब इन इलाकों में भी बिना लाइसेंस के कफ सिरप बेचना कानूनी तौर पर मान्य नहीं होगा।
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छोटे गांवों में बदली दवा बिक्री की तस्वीर
इस संशोधन से पहले, 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में कफ सिरप बेचने के लिए लाइसेंस संबंधी कुछ प्रावधानों से छूट प्राप्त थी। यह सुविधा ग्रामीण आबादी तक दवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से दी गई थी।
लेकिन अब नियमों में ‘सिरप’ शब्द को हटा दिया गया है, जिसका अर्थ है कि छोटे से छोटे गांव में भी कफ सिरप की बिक्री केवल विधिवत लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर या फार्मेसी के माध्यम से ही की जा सकेगी। बिना लाइसेंस के कफ सिरप बेचना अब नियमों के तहत स्वीकार्य नहीं होगा।
जन स्वास्थ्य सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा
स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह कदम सिरप आधारित दवाओं की बिक्री और वितरण पर नियामकीय निगरानी को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। इसका मुख्य लक्ष्य सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाना है।
इस बदलाव से दवाओं के दुरुपयोग को रोकने और गुणवत्तापूर्ण दवाएं सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां निगरानी अपेक्षाकृत कम होती है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में दवा आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता लाने में भी सहायक होगा।
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मंत्रालय ने कफ सिरप के निर्माण, वितरण और बिक्री से जुड़े सभी निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को सलाह दी है। उन्हें ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और ड्रग्स रूल्स, 1945 के प्रावधानों का सख्ती से पालन करना होगा। यह नया नियम ग्रामीण क्षेत्रों में दवा आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।





