
बिहार में शराबबंदी कानून को और सख्त करने की कवायद के बीच सरकार का हर दिन नया फरमान जारी हो रहा है। छपरा में जहरीली शराब से मौत के बाद सरकार एक्शन में है। पहले होम्योपैथिक डॉक्टरों पर लगाम लगाने की तैयारी के बीच अब बिहार सरकार ने यह फैसला किया है कि बिहार में नए साल से उत्पाद विभाग से स्प्रिट ढोने वाले वाहनों का निबंधन करवाना अनिवार्य होगा।
जानकारी के अनुसार, बिहार में नशे के कारोबार पर पहले से अधिक सख्ती होगी। अब राज्य सरकार ने यह निर्णय किया है कि, परिवहन कंपनियाें काे भी मद्य निषेद्य,उत्पाद एवं निबंधन विभाग से कफ सिरफ, स्प्रिट आदि ढाेने वाले वाहनाें के ट्रांसपाेर्टराें काे निबंधित कराना आवश्यक हाेगा। इसके तहत राज्य में होम्योपैथिक डाॅक्टराें पर निगरानी रखी जायेगी।
उत्पाद आयुक्त के सचिव रेणु कुमारी सिन्हा ने इसकाे लेकर गाइडलाइन जारी किया है। इसमें कहा गया है कि स्प्रीट, साइलेंट स्प्रिट, कफ सिरफ का परिवहन करने वाले वाहनाें काे 15 जनवरी तक निबंधन कराना अनिवार्य है। इसके लिए मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग काे सूचित करना जरूरी है।
साथ ही यह बताना हाेगा कि इस क्षेत्र के लिए व्यापार करते है ताे ऐसे परिवहन कंपनियां व ट्रांसपाेर्टराें काे निबंधित किया जायेगा। शराबबंदी काे देखते हुए ऐसे समाग्रियाें के परिवहन में क्या-क्या सावधानियां बरतनी हैं, इसके बारे में उन्हे बताया जायेगा। यदि काेई ट्रांसपाेर्टर या कपनियां ऐसा नहीं करता है, तो वह कानूनी रूप से अवैध माना जायेगा और उसके खिलाफ मद्य निषेध अधिनियम के तहत कार्रवाई की जायेगी।
नये नियम के तहत स्प्रिट, साइलेंट स्प्रिट, कफ सिरफ या किसी भी ऐसे सामान का परिवहन करने वाले वाहनाें काे मद्य निषेध विभाग में निबंधन कराना अनिवार्य कर दिया गया है।







