मुख्य बातें: उठी मांग कमला और जीवछ को फिर से पुनर्जीवित किया जाए, 1987 से पहले दरभंगा कमला नदी में डॉल्फिन (सूंस) अठखेलियां करती थीं,‘नदी किनारे नदी पर संवाद’ का हुआ आयोजन, उपवास तथा 40 किमी की सूखी नदियों की पदयात्रा पहले हो चुकी हैं, फिर भी है दरभंगा को जरूरत नदी सत्याग्रह का आखिर क्यों, पढ़िए यह खबर, जो जल ही जीवन को साकार करती, दरभंगा की हलक को सूखने नहीं देने की जिद लिए सामने है…पदयात्रा का संकल्प व्यर्थ नहीं जाने देंगे….
दरभंगा, देशज टाइम्स। वर्ल्ड नेचुरल डेमोक्रेसी (डब्ल्यूएनडी) की अगुवाई में नदी सत्याग्रह के तीसरे चरण ‘नदी किनारे नदी पर संवाद’ का आयोजन हुआ। दुर्गा मंदिर गौंसाघाट में आयोजित इस संवाद में प्रथम चरण में उपवास और द्वितीय चरण में बाग़मती एवं कमला नदी की 40 किमी की लंबी पदयात्रा आयोजित की गयी थी, जो एकमीघाट, धोईघाट, जीवछघाट से होते हुए काकरघाटी तक गयी थी।






नदी सत्याग्रह कार्यक्रम नदी किनारे नदी पर संवाद कार्यक्रम में सूखी नदियों पर चर्चा की गयी। कमला नदी के मुंह के सभी धारों को फिर से खोलने के प्रयास पर विचार किया गया। वहीं ट्यूबवल में मोटर लगाकर जीवछ नदी में श्रद्धालुओं के लिये एक फ़ीट पानी जमा करने के लिये सहनी समुदाय के जगदीश, शंभु और राम नारायण को इस कार्य के लिये मुख्य अतिथि वनस्पति वैज्ञानिक प्रो. विद्यानाथ झा ने शाल और माला से सम्मानित किया।
डब्ल्यूएनडी के अध्यक्ष, लेखक व पृथ्वी अधिकार कार्यकर्ता डॉ.जावैद अब्दुल्लाह ने गंभीर चिन्ता जताते हुये कहा कि ‘नदियों के हाल पर देश के नेता बेख़बर हैं, लोगों को करना होगा जन आंदोलन।
वनस्पति वैज्ञानिक प्रो. विद्यानाथ झा ने स्थानीय लोगों से बात की। स्थानीय निवासी कर्पूरी ठाकुर ने उन्हें जानकारी देते हुये बताया कि दो महीना पहले संजय कुमार झा (बिहार सरकार जल संसाधन मंत्री) ने कहा था कि कमला में कम से कम 4.5 फीट पानी सालों भर बहना चाहिए।
तालाब बचाओ अभियान के नारायण जी चौधरी ने भी नदियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। वहीं, लोगों से नदी संवाद क़ायम किया। लोगों ने उन्हें बताया कि 1987 के पहले दरभंगा की कमला नदी में डॉल्फिन (सूंस) मछली को अठखेलियां करती हुई देखा जा सकती थी।
वहीं 1972 से पूर्व इसमें नाव चला करती थी। इसमें कुर्सेला (पूर्णिया) से व्यापारी लोग मक्का लाते थे। और, यहां नाव से उतारकर मुज़फ्फरपुर भेजा जाता था। यह एक सुगम यातातात था। लेकिन आज नदी पानी की बूंद को तरस रही है।
इस अवसर पर लवली युनिवर्सिटी के बी-टेक द्वीतीय वर्ष के छात्र आयुष रंजन, पियूष रंजन, दीपक कुमार, आकाश, विकास कुमार (गंज),सक़लैन आदि उपस्थित थे।
स्थानीय लोगों में विनोद गिरी, प्रमोद देवी (पुजारिन), मदन पुजारी, जगदीश राम, रघुवंशी यादव (कवरियां) आदि ने भी अपने विचार प्रकट किये।
संवाद के बाद नदी सत्याग्रह की छोटी सी पदयात्रा भी निकाली गयी। इस कार्यक्रम की सहयोगी रहीं, आतिका महजबीं, उज्जवल भविष्य फाउंदडेशन के बिहार ज़ोन के प्रबंध निदेशक (एमडी) रमा शंकर प्रसाद।








