एनआईए के राज्य सचिव रियाज मारूफ उर्फ बबलू की मोतिहारी में गिरफ्तारी के बाद मुजफ्फरपुर और मोतिहारी पुलिस की हलचल काफी तेज हो गई है। जांच एजेंसी संगठन के जुड़े सभी संभावित ठिकानों की तलाश में जुटी है। एनआईए, एटीएस व जिला पुलिस संयुक्त तौर पर मोतिहारी व मुजफ्फरपुर जिले के कई इलाकों में छापेमारी कर रही है।
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हालांकि, अभी तक टीम को इस मामले में कुछ हाथ नहीं लगा है। इस बीच एनआईए अब उसे रिमांड पर लेने की तैयारी में है। वहीं, बबलू ने पूछताछ में राष्ट्रीय जांच एजेंसी को कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी है।






बीते शनिवार को मोतिहारी पुलिस ने चकिया के सुभाष चौक के पास घेराबंदी कर रियाज को गिरफ्तार किया था। वो बाजार में मछली खरीदने के लिए पहुंचा था। गिरफ्तारी के बाद मोतिहारी के एसपी कांतेश मिश्रा ने भी उससे करीब ढाई घंटे तक पूछताछ की थी।
उसने पूछताछ में बताया कि वह साऊदी अरब में छह साल तक रहा। आज भी उसका भाई वहीं रहता है। संगठन को मजबूत करने के लिए चार साल पहले केरल गया था।
बताया गया है कि पीएफआई पर प्रतिबंध लगने के बावजूद रियाज संगठन के विस्तार में लगा रहा। फुलवारी शरीफ और बरुराज में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी उसने दरभंगा,
मुजफ्फरपुर, मधुबनी, पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण में बैठक कर संगठन से सैकड़ों युवकों को जोड़ा। उसने जांच एजेंसी को बताया है कि मुजफ्फरपुर के बरुराज और दरभंगा में संगठन से जुड़े युवकों के लिए ट्रेनिंग कैंप भी आयोजित किया। साथ ही नेपाल की सीमाई क्षेत्रों में भी कई कैंप आयोजित किए।
जानकारी के अनुसार, 19 जुलाई को रियाज उर्फ बबलू का राइट हैंड याकूब भी गिरफ्तार हो चुका है। वो चकिया में ट्रेनिंग कैंप चलाता था। याकूब की निशानदेही पर 5 अगस्त को पीएफआई के दो सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया था। उनकी पहचान शाहिद रजा और फैसल अली उर्फ मो. कैफ के रूप में हुई थी।
एनआईए की पूछताछ में रियाज ने बताया कि मेहसी निवासी याकूब खान उर्फ सुल्तान उर्फ उस्मान के माध्यम से 2020 में वह पीएफआई से जुड़ा था, जिसने उसे बिहारशरीफ निवासी शमीम अख्तर से मिलवाया। बाद में उसे संगठन में वाइस प्रेसिडेंट की जिम्मेवारी दी गई।
पीएफआई प्रतिबंधित होने के बाद रियाज ने दरभंगा, मधुबनी के मो. तौसीफ, बरुराज के बेलाल अहमद व कादिर अंसारी के साथ मिलकर संगठन विस्तार के लिए स्लीपर सेल की भांति दो दर्जन के करीब बैठकें किया।
उसने बताया है कि नए युवकों को पीएफआई से जोड़ने के लिए पहले धार्मिक आयोजन किया जाता है, जिसमें क्रूर और अत्याचार का वीडियो क्लिप दिखाकर युवाओं की भावनाओं को भड़काया जाता है। फिर उनका वाट्सएप ग्रुप बनाकर लगातार उन्हें ऐसा वीडियो और वाॅयस मैसैज भेजा जाता है।
जांच एजेंसी के एक अधिकारी ने बताया कि रियाज के अनुसार बिहार के नेपाल सीमा से सटे करीब पांच जिलों में पीएफआई के लोग क्रियाशील हैं, जो स्लीपर सेल के रूप में काम कर रहे हैं। उन्हें चिह्नित कर पकड़ने के लिए स्थानीय पुलिस और एनआईए लगातार छापेमारी कर रही है।
प्रभारी एसएसपी अरविंद प्रताप सिंह ने बताया कि 2022 के सितंबर के समय पीएफआई को प्रतिबंधित ऑर्गेनाइजेशन घोषित कर दिया या था। उसके बाद प्रारंभिक रूप से जो लोग पकड़े गए। उनके बयान के आधार पर कुछ ऑपरेशन चलाए गए थे।
इसमे कुछ कांड दर्ज भी किया गया था। इनमे से एक कांड जिले के बरूराज थाना में दर्ज हुआ था। शुक्रवार को मोतिहारी पुलिस ने चकिया से पीएफआई से जुड़े हुए एक शख्स की गिरफ्तारी की गई थी। वो हमारे कांड में भी वांछित था।








