Bihar Encounter: भोजपुर जिले में भारत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार को भारी दबाव के बाद झुकना पड़ा है। बुधवार को राज्य कैबिनेट ने इस पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच का आदेश दिया। पटना उच्च न्यायालय के रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में एक आयोग पूरे मामले की पड़ताल करेगा। इसके साथ ही, इस एनकाउंटर ऑपरेशन का नेतृत्व करने वाले जगदीशपुर सब-डिविजनल पुलिस अधिकारी (SDPO) राजेश कुमार शर्मा को पुलिस लाइन भेज दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब भारत भूषण तिवारी के पैतृक गांव बिलौटी में न्याय की मांग को लेकर एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया था।
Bihar Cabinet: 5 नए विश्वविद्यालय, AI मिशन, 1 लाख करोड़ की टाउनशिप, शिक्षकों के ट्रांसफर नियम… बिहार कैबिनेट के 47 बड़े फैसले..अभी पढ़ें
न्यायिक जांच आयोग की जिम्मेदारी
जांच आयोग एनकाउंटर से जुड़ी सभी परिस्थितियों की गहनता से समीक्षा करेगा। इसमें भारत भूषण तिवारी के परिजनों, स्थानीय निवासियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच की जाएगी। पिछले कुछ दिनों से पुलिस कार्रवाई पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। तिवारी के परिवार का कहना है कि पुलिस का आधिकारिक बयान घटना की वास्तविक तस्वीर पेश नहीं करता है। सरकार के इस कदम को बढ़ते जन आक्रोश और राजनीतिक दबाव को कम करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।






महापंचायत में उमड़ा जनसैलाब, ‘शहीद भारत नगर’ की मांग
कैबिनेट का यह निर्णय तब आया, जब बिलौटी गांव में हजारों की संख्या में लोग न्याय की मांग को लेकर एकत्रित हुए। इस महापंचायत में बिहार और कई अन्य राज्यों से आए समर्थकों ने भाग लिया। आयोजकों ने दावा किया कि इस सभा में दसियों हजार लोग शामिल हुए, जिन्होंने भारतीय तिरंगा लहराते हुए तिवारी के लिए न्याय की मांग में नारे लगाए। कार्यक्रम से पहले, गांव और आसपास के इलाकों में तिवारी को ‘शहीद’ बताते हुए पोस्टर लगाए गए थे। एक स्थानीय साइनबोर्ड को ‘शहीद भारत नगर’ के रूप में फिर से रंग दिया गया है, जो उनकी स्मृति में एक क्षेत्र का नामकरण करता है।
प्रशांत किशोर की चेतावनी और पुलिस पर गंभीर आरोप
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी बुधवार को बिलौटी का दौरा किया। उन्होंने तिवारी के परिजनों से मुलाकात की और महापंचायत को संबोधित किया। किशोर ने जोर देकर कहा कि न्याय तभी मिलेगा जब एनकाउंटर में शामिल लोगों के साथ-साथ इसे आदेश देने वालों पर भी कार्रवाई होगी। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि:
अगर सरकार ने 15 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं की, तो इससे भी बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
एनकाउंटर को लेकर विरोधी बयानबाजी तेज हो गई है। ग्रामीणों और परिवार के सदस्यों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों के आश्वासन के बाद तिवारी को आत्मसमर्पण के लिए राजी किया गया था। उनके अनुसार, तिवारी ने अपना हथियार फेंक दिया और हिरासत में लिए जाने से पहले आत्मसमर्पण कर दिया था। कुछ चश्मदीदों का दावा है कि आत्मसमर्पण के बाद, तिवारी को पुलिस अधिकारियों द्वारा आगे ले जाया गया और फिर सुरक्षाकर्मियों से घिरे होने के बावजूद गोली मार दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वाहन में बिठाने के बाद अतिरिक्त गोलियां चलाई गईं। हालांकि, पुलिस इन आरोपों को खारिज करती है और दावा करती है कि उन्होंने आत्मरक्षा में बल प्रयोग किया था।
मामले में बढ़ी कानूनी और राजनीतिक हलचल
न्यायिक जांच ऐसे समय में हो रही है जब मामले की कानूनी जांच भी तेज हो गई है। तिवारी की मां द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद जगदीशपुर SDPO, शाहपुर स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका है। स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय और पटना उच्च न्यायालय में भी अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं। न्यायिक आयोग अब अपना काम शुरू करने के लिए तैयार है, और इस एनकाउंटर मामले पर तिवारी के परिवार, राजनीतिक नेताओं और बिलौटी में जवाब मांगने के लिए जुटे हजारों समर्थकों की कड़ी नजर रहेगी।








