India Rice Export: वैश्विक बाजार में भारत के चावल निर्यात ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित की है। प्रतिबंध हटने के बाद वर्ष 2025 में भारत का चावल निर्यात रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया है, जिससे थाईलैंड और वियतनाम जैसे पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियों के शिपमेंट पर सीधा असर पड़ा है। यह न केवल भारतीय किसानों के लिए अच्छी खबर है, बल्कि उन वैश्विक उपभोक्ताओं के लिए भी राहत लेकर आया है, जहां चावल एक मुख्य खाद्य पदार्थ है।
इंडिया राइस एक्सपोर्ट: विश्व व्यापार में भारत का ऐतिहासिक उछाल
इंडिया राइस एक्सपोर्ट में जबरदस्त वृद्धि के कारण
केंद्र सरकार ने पहले देश में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और घरेलू चावल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था। हालांकि, बंपर मानसूनी बारिश के कारण रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन और आपूर्ति में सुधार के बाद, भारत ने 2022 और 2023 में लगाए गए सभी निर्यात प्रतिबंध हटा दिए। इस कदम ने वैश्विक बाजारों के लिए भारतीय चावल के दरवाजे फिर से खोल दिए, जिसके परिणामस्वरूप निर्यात में तेज वृद्धि दर्ज की गई। भारत के इस फैसले का असर वैश्विक चावल बाजार पर तुरंत देखा गया।


भारत से निर्यात बढ़ने के बाद एशिया में चावल की कीमतें एक दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। यह अफ्रीका जैसे कम आय वाले क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के लिए विशेष रूप से फायदेमंद रहा है, जहां चावल एक आवश्यक खाद्य वस्तु है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
2025 में भारत का कुल चावल निर्यात 19.4 प्रतिशत बढ़कर 21.55 मिलियन मीट्रिक टन हो गया, जो 2024 में 18.05 मिलियन मीट्रिक टन था। यह 2022 के 22.3 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर के बेहद करीब है। नॉन-बासमती चावल का शिपमेंट 25 प्रतिशत बढ़कर 15.15 मिलियन टन हो गया, जबकि प्रीमियम बासमती चावल का निर्यात 8 प्रतिशत उछलकर रिकॉर्ड 6.4 मिलियन टन पर पहुंच गया।
वैश्विक बाजारों में भारत की बढ़ती पहुंच
नॉन-बासमती चावल के प्रमुख खरीदारों में बांग्लादेश, बेनिन, कैमरून, आइवरी कोस्ट और जिबूती शामिल हैं, जिन्होंने भारत से अपनी खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि की है। वहीं, रॉयटर्स के अनुसार, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन जैसे देशों ने इस वर्ष प्रीमियम बासमती चावल की खरीद बढ़ाई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। भारत दुनिया के तीन सबसे बड़े निर्यातक देशों – थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान – के कुल निर्यात से भी अधिक चावल का निर्यात करता है, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
यह वृद्धि न केवल भारत के कृषि क्षेत्र की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में उसकी केंद्रीय भूमिका को भी रेखांकित करती है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







