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समस्तीपुर मर्डर केस: हाईकोर्ट से मिली राहत सुप्रीम कोर्ट ने पलटी, हत्यारे अब जाएंगे जेल! 5 दोषियों की जमानत रद्द, 2 हफ्ते में करना होगा सरेंडर!

Bihar Supreme Court Order: पटना हाईकोर्ट के आदेश को पलटते हुए शीर्ष अदालत ने पूर्व मुखिया शशिनाथ झा के हत्यारों को दो हफ्ते में सरेंडर करने का निर्देश दिया। माधुरी देवी को मिला न्याय।

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Bihar Supreme Court Order: बिहार के समस्तीपुर जिले में हुए चर्चित पूर्व मुखिया शशिनाथ झा हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने पटना हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें हत्या और आपराधिक षड्यंत्र के दोषी ठहराए गए पांच अभियुक्तों की सजा निलंबित कर उन्हें जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया गया था। इस फैसले के बाद पांचों दोषियों को दो सप्ताह के भीतर निचली अदालत के सामने आत्मसमर्पण करना होगा।

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सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने मृतक की पत्नी माधुरी देवी और बिहार सरकार की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने पटना हाईकोर्ट के 11 दिसंबर 2024 के आदेश को पूरी तरह से निरस्त कर दिया। इस घटनाक्रम से चार साल पुराने इस हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सियासी और आपराधिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

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समस्तीपुर हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 5 दोषियों की जमानत रद्द, 2 हफ्ते में करना होगा सरेंडर!

Samastipur Murder Case: बिहार के समस्तीपुर जिले में चार साल पुराने शशिनाथ झा हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने पटना हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें हत्या और आपराधिक षड्यंत्र के दोषी ठहराए गए पांच अभियुक्तों को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया गया था। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने इन पांचों दोषियों को दो सप्ताह के भीतर निचली अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद, मृतक की पत्नी माधुरी देवी और बिहार सरकार की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

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सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर 2024 को पटना हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को निरस्त कर दिया है। यह चर्चित हत्याकांड एक बार फिर राजनीतिक और आपराधिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

निचली अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद, हाईकोर्ट ने दी थी जमानत

समस्तीपुर की निचली अदालत ने शशिनाथ झा हत्याकांड में अर्जुन दास उर्फ कारिया, निलेंद्र गिरि, हिमांशु राय, सुनील कुमार और सुमित कुमार उर्फ फुचुकिया को हत्या और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी करार दिया था। 13 अगस्त 2024 को आए इस फैसले में अदालत ने इन सभी को आजीवन कारावास के साथ 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी सुनाया था। सुनील कुमार को शस्त्र अधिनियम की धारा 27(3) के तहत भी अलग से आजीवन कारावास की सजा मिली थी।

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निचली अदालत के इस विस्तृत फैसले में कुल आठ आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जिनमें राजेश पाल, धीरेन्द्र राय उर्फ बड़का बउआ और चंदन कुमार भी शामिल थे। दोषियों ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने अपील लंबित रहने के दौरान 11 दिसंबर 2024 को पांच दोषियों की सजा स्थगित करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है।

48 घंटे की देरी और राजनीतिक रंजिश का तर्क खारिज

पटना हाईकोर्ट ने दोषियों को जमानत देते समय प्राथमिकी दर्ज कराने में हुई लगभग 48 घंटे की देरी और कुछ अन्य परिस्थितियों को महत्वपूर्ण माना था। हाईकोर्ट में यह तर्क भी दिया गया था कि शिकायतकर्ता और मृतक की पत्नी माधुरी देवी उस समय बखरी बुजुर्ग पंचायत की मुखिया थीं, जिससे मामले में राजनीतिक रंजिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

शीर्ष अदालत ने कहा कि ‘केवल एफआईआर दर्ज कराने में देरी या शिकायतकर्ता के निर्वाचित मुखिया होने जैसे तथ्यों के आधार पर निचली अदालत के विस्तृत और तर्कसंगत निष्कर्षों पर संदेह नहीं किया जा सकता।’

सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों के बयानों, आरोपियों के आपसी संबंधों और अपराध में इस्तेमाल सामग्री की बरामदगी से जुड़े निचली अदालत के विश्लेषण में कोई गंभीर खामी नहीं पाई। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे आधार दोषसिद्धि के बाद सजा को निलंबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।

न्याय की लड़ाई में माधुरी देवी को मिली राहत

पूर्व मुखिया शशिनाथ झा की हत्या के बाद उनकी पत्नी माधुरी देवी ने मुसरीघरारी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उस समय वह बखरी बुजुर्ग पंचायत की मुखिया थीं। एफआईआर में चार लोगों को नामजद करते हुए अन्य अज्ञात आरोपियों पर पति की निर्मम हत्या का आरोप लगाया गया था।

मामले की सुनवाई के दौरान निचली अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपियों को दोषी करार दिया था। माधुरी देवी और बिहार सरकार ने पटना हाईकोर्ट के जमानत आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। माधुरी देवी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि निचली अदालत ने गवाहों के बयान, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और बरामदगी समेत मामले के सभी पहलुओं की विस्तार से जांच करने के बाद ही दोषसिद्धि की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को महत्वपूर्ण मानते हुए निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया।

पंचायत से लौटते समय बरसाई गई थीं गोलियां

6 अगस्त 2021 की सुबह मुसरीघरारी थाना क्षेत्र के बखरी बुजुर्ग गांव में पूर्व मुखिया शशिनाथ झा की कई गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। बताया गया कि वह गांव में जमीन विवाद को लेकर एक पंचायत में गए थे। पंचायत खत्म होने के बाद लौटते समय हथियारबंद अपराधियों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। गंभीर रूप से घायल शशिनाथ झा को इलाज के लिए ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। वह बखरी बुजुर्ग पंचायत के दो बार मुखिया रह चुके थे और हत्या के समय उनकी पत्नी माधुरी देवी पंचायत की मुखिया थीं। घटना के बाद आक्रोशित समर्थकों और ग्रामीणों ने सड़क जाम कर उग्र प्रदर्शन किया था। पुलिस जांच में आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनाव से जुड़ी राजनीतिक रंजिश का एंगल भी सामने आया था।

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सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब पांचों दोषियों को दो सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करना होगा और उन्हें न्यायिक हिरासत में लिया जाएगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों को अपनी लंबित अपील की जल्द सुनवाई के लिए हाईकोर्ट का रुख करने की स्वतंत्रता दी है।

निचली अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा

इस मामले में समस्तीपुर की निचली अदालत ने अर्जुन दास उर्फ कारिया, निलेंद्र गिरि, हिमांशु राय, सुनील कुमार और सुमित कुमार उर्फ फुचुकिया को शशिनाथ झा की हत्या और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी ठहराया था। अदालत ने सभी पांचों को आजीवन कारावास के साथ ही 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा भी सुनाई। इसके अतिरिक्त, सुनील कुमार को शस्त्र अधिनियम की धारा 27(3) के तहत अलग से आजीवन कारावास की सजा मिली थी।

निचली अदालत का यह फैसला 13 अगस्त 2024 को आया था, जिसके बाद दोषियों ने पटना हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने 11 दिसंबर 2024 को अपील लंबित रहने के दौरान इनकी सजा स्थगित करते हुए जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। गौरतलब है कि अगस्त 2024 में सामने आए निचली अदालत के विस्तृत फैसले में इस हत्याकांड में कुल आठ आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जिनमें राजेश पाल, धीरेन्द्र राय उर्फ बड़का बउआ, हिमांशु राय, अर्जुन दास उर्फ करिया, सुमित कुमार उर्फ फुचिया, चंदन कुमार, निलेंदु गिरि और सुनील राय शामिल थे।

हाईकोर्ट ने 48 घंटे की देरी को माना था अहम

पटना हाईकोर्ट ने दोषियों को जमानत देते समय प्राथमिकी दर्ज कराने में हुई करीब 48 घंटे की देरी समेत कुछ अन्य परिस्थितियों को महत्वपूर्ण माना था। हाईकोर्ट में यह दलील भी दी गई थी कि शिकायतकर्ता और मृतक की पत्नी माधुरी देवी उस समय पंचायत की मुखिया थीं और मामले में राजनीतिक रंजिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन आधारों को दोषियों को जमानत देने के लिए पर्याप्त नहीं माना। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा कि:

‘केवल एफआईआर दर्ज कराने में देरी या शिकायतकर्ता के निर्वाचित मुखिया होने जैसे तथ्यों के आधार पर निचली अदालत के विस्तृत और तर्कसंगत निष्कर्षों पर संदेह नहीं किया जा सकता।’

सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों के बयान, आरोपियों के आपसी संबंध और अपराध में इस्तेमाल सामग्री की बरामदगी से जुड़े निचली अदालत के विश्लेषण में ऐसी कोई गंभीर खामी नहीं पाई, जिसके आधार पर दोषसिद्धि के बाद सजा को निलंबित किया जाता।

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पूर्व मुखिया शशिनाथ झा की हत्या के बाद उनकी पत्नी माधुरी देवी ने मुसरीघरारी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उस समय वह बखरी बुजुर्ग पंचायत की मुखिया थीं। एफआईआर में चार लोगों को नामजद करते हुए अन्य अज्ञात आरोपियों पर पति की हत्या का आरोप लगाया गया था। माधुरी देवी और बिहार सरकार ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। माधुरी देवी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि शशिनाथ झा की हत्या बेहद निर्मम तरीके से की गई थी और निचली अदालत ने सभी पहलुओं की विस्तार से जांच के बाद दोषसिद्धि की थी।

पंचायत से लौटते समय बरसाई गई थीं गोलियां

6 अगस्त 2021 की सुबह मुसरीघरारी थाना क्षेत्र के बखरी बुजुर्ग गांव में पूर्व मुखिया शशिनाथ झा की कई गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। बताया गया कि वह गांव में जमीन विवाद को लेकर पंचायत करने गए थे। पंचायत खत्म होने के बाद लौटते समय हथियारबंद अपराधियों ने उन पर गोलियां चला दीं। गंभीर रूप से घायल शशिनाथ झा को इलाज के लिए ले जाया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई। वह बखरी बुजुर्ग पंचायत के दो बार मुखिया रह चुके थे और हत्या के समय उनकी पत्नी माधुरी देवी पंचायत की मुखिया थीं। घटना के बाद आक्रोशित समर्थकों और ग्रामीणों ने सड़क जाम कर उग्र प्रदर्शन किया था।

पुलिस जांच के दौरान हत्या के पीछे आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनाव से जुड़ी राजनीतिक रंजिश का एंगल भी सामने आया था। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ हत्या में इस्तेमाल पिस्टल और दो बाइक बरामद की थीं। पुलिस के अनुसार, हत्या की योजना पहले से बनाई गई थी और कई लोगों ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पांचों दोषियों को अब दो सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करना होगा, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में लिया जाएगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों को अपनी लंबित अपील की जल्द सुनवाई और निस्तारण के लिए हाईकोर्ट का रुख करने की स्वतंत्रता दी है। शीर्ष अदालत ने यह भी साफ किया कि:

‘सजा निलंबन और जमानत से जुड़े उसके आदेश में की गई टिप्पणियों को मूल आपराधिक अपील के अंतिम निस्तारण के दौरान मामले के गुण-दोष पर अंतिम राय नहीं माना जाएगा।’

यानी, शशिनाथ झा की हत्या के बाद उनकी पत्नी माधुरी देवी ने जिस मामले में न्याय की लड़ाई शुरू की थी, उसमें पटना हाईकोर्ट से मिली पांच दोषियों की राहत अब सुप्रीम कोर्ट ने पलट दी है। चार साल पुराने इस हत्याकांड में पांच दोषियों को अब दो सप्ताह के भीतर फिर से जेल लौटना होगा, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद मिली है।

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