Patna Vigilance News: बिहार की राजधानी पटना के फुलवारीशरीफ प्रखंड के मैनपुरंदा पंचायत भवन में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग की टीम ने गुरुवार, 4 जून 2026 को एक गुप्त सूचना के आधार पर जाल बिछाकर मैनपुरंदा पंचायत के राजस्व कर्मचारी राणा रणविजय गोपाल को 35 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में रिश्वत लेने वाले कर्मचारी के साथ-साथ बिचौलिए गुड्डू कुमार को भी 10 हजार रुपये के साथ मौके से दबोचा गया। यह कार्रवाई मुख्य सड़क से अतिक्रमण हटाने संबंधी एक सरकारी रिपोर्ट तैयार करने के लिए मांगी गई रिश्वत के एवज में की गई थी, जिसने सरकारी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
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Patna Crime News: पटना में बड़ा एक्शन! राजस्व कर्मचारी ₹45,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, हड़कंप- Advertisement -
पटना क्राइम न्यूज़: बिहार में भ्रष्ट अधिकारियों और उनके मददगारों पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के तहत राजधानी पटना से सटे फुलवारीशरीफ में ब्यूरो की मुख्यालय टीम ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। मैनपुरन्दा पंचायत के राजस्व कर्मचारी राणा रणविजय गोपाल और उनके दलाल गुड्डू कुमार को ₹35,000 और ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी फुलवारीशरीफ थाना क्षेत्र स्थित मैनपुरन्दा पंचायत भवन से हुई है, जिसने पूरे अंचल कार्यालय और आस-पास के क्षेत्रों में हड़कंप मचा दिया है। यह कार्रवाई बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही जंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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आखिर क्यों मांगी गई थी रिश्वत? समझें पूरा मामला
यह पूरा मामला विक्रम थाना क्षेत्र के गोरखरी गांव निवासी प्रवीण कुमार सुमन की शिकायत से शुरू हुआ। प्रवीण कुमार सुमन ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पटना कार्यालय में एक विस्तृत लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में उन्होंने बताया था कि उनके प्लॉट से मात्र 100 मीटर की दूरी पर मुख्य सड़क पर कुछ लोगों द्वारा चार घरों का अवैध निर्माण कर अतिक्रमण कर लिया गया है। यह अवैध कब्जा काफी समय से चला आ रहा था, जिससे न केवल उन्हें बल्कि अन्य स्थानीय निवासियों को भी आवागमन और अन्य बुनियादी सुविधाओं में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
परिवादी प्रवीण कुमार सुमन ने अपने आरोप में स्पष्ट किया था कि इस अवैध अतिक्रमण को हटाने से संबंधित सरकारी रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेजने के एवज में मैनपुरन्दा पंचायत के राजस्व कर्मचारी राणा रणविजय गोपाल और उनके दलाल गुड्डू कुमार लगातार उनसे मोटी रकम की मांग कर रहे थे। उन्होंने यह भी बताया कि रिश्वत की रकम दिए बिना यह कार्य संभव नहीं हो पा रहा था और दोनों ही उन पर पैसों के लिए दबाव बना रहे थे। निगरानी ब्यूरो ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्राथमिक जांच का आदेश दिया।
निगरानी ब्यूरो का ‘ऑपरेशन रिश्वत’: ऐसे दबोचे गए आरोपी
शिकायत मिलने के बाद, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मामले की सत्यता का पता लगाने के लिए गुप्त रूप से भौतिक सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान, परिवादी के आरोप पूरी तरह से सही पाए गए, जिससे यह सुनिश्चित हो गया कि राजस्व कर्मचारी और उसका दलाल वास्तव में रिश्वत की मांग कर रहे थे। इस पुख्ता सबूत के आधार पर, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत तुरंत मामला दर्ज किया गया और आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ने के लिए एक विशेष रणनीति तैयार की गई। यह कार्रवाई बिहार भ्रष्टाचार समाचारों में एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गई है, जो सरकारी कामकाज में पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाती है।
इस ‘ऑपरेशन रिश्वत’ को सफल बनाने के लिए पुलिस उपाधीक्षक श्रीमती रिशिता स्नेह के नेतृत्व में एक विशेष धावादल का गठन किया गया। इस टीम ने पूरी गोपनीयता और सटीकता के साथ अपनी योजना को अंजाम दिया। गुरुवार को जैसे ही परिवादी प्रवीण कुमार सुमन ने मैनपुरन्दा पंचायत भवन में राजस्व कर्मचारी राणा रणविजय गोपाल को ₹35,000 और उनके दलाल गुड्डू कुमार को ₹10,000 के केमिकल लगे नोट सौंपे, पहले से घात लगाकर बैठी डीएसपी रिशिता स्नेह की टीम ने उन्हें तुरंत चारों तरफ से घेर लिया और दोनों को रंगे हाथों दबोच लिया। यह गिरफ्तारी इतनी अचानक हुई कि आरोपियों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। निगरानी टीम ने मौके से रिश्वत के कुल ₹45,000 रुपये भी बरामद कर लिए हैं, जो उनके खिलाफ एक अकाट्य सबूत के तौर पर काम करेंगे।
गिरफ्तारी के बाद कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक महकमे में हलचल
राजस्व कर्मचारी राणा रणविजय गोपाल और उनके दलाल गुड्डू कुमार की गिरफ्तारी के बाद, उन्हें तत्काल पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो मुख्यालय लाया गया है। यहां भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। ब्यूरो के अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि पूछताछ पूरी होने के बाद, दोनों अभियुक्तों को माननीय विशेष न्यायालय, पटना के समक्ष पेश किया जाएगा, जहां उनके खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया और मुकदमा चलाया जाएगा।
निगरानी ब्यूरो की इस औचक और बड़ी कार्रवाई से केवल फुलवारीशरीफ अंचल कार्यालय ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य राजस्व कार्यालयों और प्रशासनिक महकमे में भी गहरा हड़कंप मच गया है। इस घटना ने अन्य भ्रष्ट कर्मचारियों और उनके दलालों के बीच भय का माहौल पैदा कर दिया है, क्योंकि ऐसी आशंका जताई जा रही है कि निगरानी अन्वेषण ब्यूरो अपनी जांच का दायरा और भी बढ़ा सकता है और अन्य मामलों में भी कार्रवाई कर सकता है। यह कार्रवाई बिहार सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का एक स्पष्ट प्रमाण है।
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यह मामला सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ों को उजागर करता है और यह उन सभी अधिकारियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो अपने पद का दुरुपयोग कर जनता के हितों के खिलाफ काम करते हैं। निगरानी ब्यूरो ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार के किसी भी मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने वाले हर व्यक्ति के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि राज्य में सुशासन की स्थापना हो सके।
अतिक्रमण रिपोर्ट: रिश्वत की मांग और शिकायत का पूरा घटनाक्रम
मैनपुरंदा पंचायत क्षेत्र में एक मुख्य सड़क से अवैध अतिक्रमण को हटाने की कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। यह मुद्दा लंबे समय से स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ था। इस पूरे मामले से संबंधित आधिकारिक प्रशासनिक रिपोर्ट तैयार करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी राजस्व कर्मचारी राणा रणविजय गोपाल के कंधों पर थी।
पीड़ित व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि इस रिपोर्ट को ‘सही’ तरीके से प्रस्तुत करने और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बदले में सरकारी कर्मचारी और उसके बिचौलिए लगातार पैसों की मांग कर रहे थे। उनसे 35 हजार रुपये की मोटी रकम की मांग की जा रही थी, जिसे देने से इनकार करने पर काम में अड़चनें पैदा की जा रही थीं।
भ्रष्टाचार के इस खुले खेल से तंग आकर, पीड़ित ने हार नहीं मानी और उसने पटना स्थित निगरानी विभाग के मुख्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया। विभाग ने इस शिकायत को अत्यंत गंभीरता से लिया और तत्काल इसकी आंतरिक जांच शुरू कर दी। गोपनीय सत्यापन के बाद यह सुनिश्चित हो गया कि रिश्वत की मांग वास्तव में की जा रही थी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की रणनीति तैयार की गई।
विजिलेंस का गुप्त ऑपरेशन: कैसे पकड़े गए आरोपी?
शिकायत की पुष्टि होने के उपरांत निगरानी ब्यूरो के अधिकारियों ने एक सुनियोजित और गुप्त कार्रवाई की योजना बनाई। एक डीएसपी स्तर के अधिकारी के कुशल नेतृत्व में एक विशेष धावा दल का गठन किया गया, जिसे इस ऑपरेशन को पूरी गोपनीयता और सटीकता के साथ अंजाम देने का जिम्मा सौंपा गया था। टीम के सदस्य अत्यंत सादे लिबास में मैनपुरंदा पंचायत भवन और उसके आस-पास के क्षेत्रों में रणनीतिक रूप से तैनात हो गए, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत नज़र रखी जा सके और किसी को भी उनके इरादों का भान न हो।
निर्धारित समय पर, जैसे ही पीड़ित व्यक्ति ने पूर्व-नियोजित योजना के अनुसार रिश्वत की राशि देकर अधिकारियों को इशारा किया, सतर्क विजिलेंस टीम ने बिना देरी किए कमरे में धावा बोल दिया। यह कार्रवाई इतनी तेज और अचानक थी कि आरोपियों को संभलने का मौका ही नहीं मिला।
मौके पर ही, पकड़े गए आरोपियों राणा रणविजय गोपाल और गुड्डू कुमार के हाथों पर रासायनिक जांच की गई। इस रासायनिक जांच से यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हो गया कि उन्होंने रिश्वत के पैसों को छुआ था। इसके बाद, रिश्वत के रूप में दी गई 35 हजार रुपये की पूरी राशि को, जो उन्होंने अभी-अभी ली थी, मौके से तत्काल बरामद कर लिया गया। इस पूरे ऑपरेशन ने सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर एक बार फिर से करारा प्रहार किया है।
बिहार भ्रष्टाचार न्यूज़: यह घटना बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे राज्यव्यापी अभियान की एक और महत्वपूर्ण कड़ी है। निगरानी विभाग लगातार ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है, जो अपने पद का दुरुपयोग कर आम जनता को परेशान करते हैं और उनसे नाजायज पैसों की मांग करते हैं।
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2026 में भ्रष्टाचार पर विजिलेंस का कड़ा प्रहार
निगरानी विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ की जा रही कार्रवाइयों में अभूतपूर्व तेजी देखी गई है। यह साल विभाग के लिए बेहद सक्रिय रहा है, जहाँ उसने भ्रष्टाचार उन्मूलन के अपने संकल्प को और मजबूत किया है। चालू वर्ष में अब तक निगरानी विभाग कुल 69 मामले दर्ज कर चुका है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक हैं और यह दर्शाता है कि विभाग भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी भी ढिलाई के मूड में नहीं है।
इस व्यापक अभियान के तहत, बिहार के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत कुल 64 भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी गलत हरकतों के लिए सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। इन ट्रैप ऑपरेशंस के माध्यम से अब तक 25.42 लाख रुपये से अधिक की अवैध घूस राशि भी मौके से जब्त की गई है, जिसे सरकारी खजाने में वापस लाया जाएगा।
पकड़े गए दोनों आरोपियों, राजस्व कर्मचारी राणा रणविजय गोपाल और बिचौलिए गुड्डू कुमार से गहन पूछताछ जारी है। इस पूछताछ के माध्यम से विभाग अन्य संभावित भ्रष्टाचार के मामलों और उनमें शामिल अन्य व्यक्तियों तक पहुंचने का प्रयास करेगा। सभी आवश्यक कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद, इन दोनों आरोपियों को विशेष निगरानी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जहाँ उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया पूरी गंभीरता और निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ेगी और उन्हें उनके अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।
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