Bihar BPSC Result: दरभंगा के अलीनगर प्रखंड के श्यामपुर गांव में इन दिनों खुशी का माहौल है। एक सामान्य किसान मजदूर के बेटे बेचन कुमार मुखिया ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। उन्होंने प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी का प्रतिष्ठित पद प्राप्त कर न सिर्फ अपने माता-पिता, बल्कि पूरे गांव और प्रखंड का मान बढ़ाया है।
गरीबी तोड़ बनी तकदीर: सेल्फ-स्टडी से BPSC में सफलता
बेचन कुमार मुखिया की यह उपलब्धि कई मायनों में खास है। उनके पिता रामदेव मुखिया पंजाब में मजदूरी का काम करते हैं, जबकि माता बुच्ची दाई देवी एक गृहिणी हैं। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, बेचन ने अपनी मेहनत और लगन से 1693वां स्थान प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने पहली ही बार में इस कठिन प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता पाई है।






बेचन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा 2017 में भगवान दत्त यादव हाई स्कूल पोहद्दी बेला से मैट्रिक की परीक्षा पास कर पूरी की। इसके बाद 2019 में उन्होंने जनता इंटर महाविद्यालय कोथुॅ से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की और सीएम आर्ट कॉलेज दरभंगा से स्नातक की डिग्री हासिल की। अपनी पढ़ाई के दौरान, उन्होंने मुख्य रूप से सेल्फ-स्टडी और थोड़ी बहुत ऑनलाइन पढ़ाई की मदद ली, जिसने उन्हें पहली बार में ही यह बड़ी सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
गांव में जश्न का माहौल, प्रेरणा बने बेचन
बेचन कुमार मुखिया अपने तीन भाइयों में सबसे बड़े हैं। उनके मझले भाई गंगा नंद मुखिया स्नातक के तीसरे सेमेस्टर में हैं, जबकि छोटा भाई कमल मुखिया और एकमात्र छोटी बहन द्रौपदी कुमारी दोनों ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ रहे हैं। बेचन की सफलता ने उनके पूरे परिवार में खुशी की लहर ला दी है।
रविवार की सुबह जैसे ही बेचन अपने गांव श्यामपुर पहुंचे, बधाई देने वालों का तांता लग गया। लोगों की भीड़ उनके घर के बाहर जमा हो गई। इस अवसर पर जन कल्याणकारी सह शिक्षा विकास मंच श्यामपुर की ओर से बेचन और उनकी माता बुच्ची दाई देवी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। मंच के अध्यक्ष निर्भय यादव, सचिव एम ए सारिम, श्याम कुमार राम, इन्द्र कुमार मुखिया, जवाहर यादव, मनीष कुमार देव, संजीत कुमार यादव, आतिफ हुसैन, पंकज कुमार साहु और सरोज कुमार देव ने पाग, माला और गमछा भेंट कर उन्हें सम्मानित किया।
इस मौके पर मंच के सदस्यों ने कहा, ‘गांव के लिए यह उपलब्धि है तथा नई पीढ़ी के लिए यह बच्चे प्रेरणा स्रोत बन गए हैं।’
बेचन कुमार मुखिया की यह कहानी बिहार के उन लाखों युवाओं के लिए एक नई उम्मीद और प्रेरणा का स्रोत है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उनकी सफलता दर्शाती है कि कड़ी मेहनत, लगन और सही दिशा में किए गए प्रयास से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।








