Bihar Rain Alert: मॉनसून की बेरुखी से बिहार में लोग उमस भरी गर्मी और कहीं-कहीं भारी बारिश के बीच जूझ रहे हैं। इसी बीच, मौसम विभाग ने राज्य के 12 जिलों के लिए आज ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में आंधी-तूफान के साथ तेज बारिश और बिजली गिरने की प्रबल संभावना जताई गई है। चेतावनी के बाद लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।
इन 12 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी, किसान रहें सावधान!
मौसम विभाग ने जिन 12 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, उनमें सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, खगड़िया, भागलपुर, मुंगेर, जमुई और बांका शामिल हैं। इन जिलों में रहने वाले लोगों को खराब मौसम के दौरान घरों के अंदर रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। खासकर किसानों से अपील की गई है कि वे इस अवधि में खुले में काम करने से बचें, क्योंकि बिजली गिरने का खतरा अधिक है। शेष जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।






मौसम विभाग के अनुसार, आज सीमांचल के दो जिलों, किशनगंज और पूर्णिया में भारी बारिश हो सकती है। पटना और आसपास के इलाकों में देर रात हल्की बारिश हुई, हालांकि इससे उमस से खास राहत नहीं मिली।
28 जून से बिहार में मॉनसून के सक्रिय होने की उम्मीद
लंबे इंतजार के बाद अब बिहार में मॉनसून के सक्रिय होने की परिस्थितियाँ अनुकूल बन रही हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 28 जून से पूरे राज्य में मॉनसून सक्रिय हो सकता है। 28 और 29 जून के लिए मौसम विभाग ने ‘डबल अलर्ट’ जारी किया है, जो अच्छी बारिश का संकेत है। अगले दो-तीन दिनों में दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम बिहार के जिलों में भी अच्छी वर्षा होने की संभावना है, जिससे धान की खेती के लिए आवश्यक पानी मिल पाएगा।
कमजोर मॉनसून की वजह और अब तक की स्थिति
इस साल मॉनसून की शुरुआत धीमी रही है। एक ओर जहाँ उत्तर बिहार, तराई और सीमांचल के जिलों में लगातार बारिश से नदियाँ उफान पर हैं, वहीं दक्षिण और मध्य बिहार के कई जिले अब भी पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के आँकड़ों के अनुसार, 26 जून तक बिहार के 36 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इनमें से 18 जिलों में तो बारिश में 50 प्रतिशत से अधिक की कमी है। केवल किशनगंज और सुपौल ही ऐसे जिले हैं जहाँ सामान्य से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। मॉनसून की इस कमजोर गति का मुख्य कारण अल नीनो का शुरुआती प्रभाव माना जा रहा है। आगामी दिनों में मॉनसून के सक्रिय होने से इस कमी को पूरा करने में मदद मिलेगी और किसानों को राहत मिलेगी।








