Kushweshwarsthan News: बिहार के कुशेश्वरस्थान पूर्वी इलाके में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बन रहे एक पुल को लेकर भारी जनआक्रोश देखने को मिला है। अरराही ढ़ाला के पास एक आरसीसी पुल का निर्माण हो रहा है, जिसकी ऊंचाई इतनी कम रखी जा रही है कि ग्रामीणों ने उसे ‘बौना पुल’ करार दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुल बाढ़ के पहले पानी में ही बह जाएगा, जिससे करोड़ों रुपये की सरकारी राशि बर्बाद होगी।
शनिवार को सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण निर्माण स्थल पर जमा हो गए। उन्होंने संवेदक को खदेड़ दिया और काम पूरी तरह से रुकवा दिया। ग्रामीणों ने विभाग और संवेदक पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी भी की। उनका दावा है कि कम ऊंचाई का पुल बनाना विकास नहीं, बल्कि बाढ़ में डूबने का सरकारी इंतजाम है।
आक्रोशित ग्रामीण रामचंद्र सदा, जवाहर पोद्दार, रामचंद्र मुखिया, दिवाकर मुखिया और पांडव राय ने एक स्वर में कहा, ‘अगर ऊंचाई नहीं बढ़ी तो न पुल बचेगा, न सड़क। पूरा इलाका फिर टापू बन जाएगा और इसकी जिम्मेदारी सीधे अफसरों की होगी।’
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यह मामला कुशेश्वरस्थान-फुलतोड़ा मुख्य मार्ग पर स्थित है, जो कुंज भवन तक जाने वाली ढाई किलोमीटर लंबी सड़क का हिस्सा है। यह सड़क दर्जनों गांवों के लिए जीवनरेखा का काम करती है। बाढ़ के दौरान जब चारों ओर पानी भर जाता है, तब यही एक रास्ता लोगों को आवागमन की सुविधा देता है। इस महत्वपूर्ण सड़क पर कुल चार पुलिया और पांच पुल बनने हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने निर्माण शुरू होने के समय से ही पुल की ऊंचाई बढ़ाने की गुहार लगाई थी। हालांकि, संवेदक और इंजीनियरों ने कथित कमीशन के चक्कर में उनकी बातों को अनसुना कर दिया। जनता को मजबूरन सड़क पर उतरना पड़ा और विरोध प्रदर्शन करना पड़ा।
ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी, ‘जब तक प्राक्कलन (एस्टीमेट) के मुताबिक पुल की ऊंचाई नहीं होगी, यहां एक ईंट भी नहीं लगेगी। हमें इस संबंध में लिखित आश्वासन चाहिए।’
जनता के इस रौद्र रूप के सामने संवेदक को काम बंद करके मौके से भागना पड़ा। मामले के तूल पकड़ने के बाद ग्रामीण कार्य विभाग, बिरौल के सहायक अभियंता बालेश्वर राम हरकत में आए। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि संवेदक को प्राक्कलन के अनुसार ही पुल बनाने का सख्त निर्देश दिया जाएगा। विभाग मौके पर जाकर गुणवत्ता की जांच करेगा, ताकि किसी भी तरह का समझौता न हो। फिलहाल, अरराही ढ़ाला पर निर्माण कार्य पूरी तरह से ठप है और ग्रामीण आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। यह देखना बाकी है कि क्या जनता के दबाव के बाद ही अधिकारियों की नींद खुलेगी या कुशेश्वरस्थान में करोड़ों की यह योजना लापरवाही की भेंट चढ़ जाएगी।















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