Bihar Crematorium: बिहार की राजधानी पटना में अब अंतिम संस्कार के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, लेकिन इसका खर्च आम लोगों की जेब पर भारी पड़ सकता है। बांस घाट श्मशान को 90 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक बनाया गया है, जिसे सरकार ने ईशा फाउंडेशन को मुफ्त में संचालन के लिए सौंप दिया है। इस सुविधा के लिए अब लोगों को 3500 से 5000 रुपए तक चुकाने होंगे। वहीं, दूसरी ओर पटना के दीघा और मुंगेर के तारापुर में बिहार सरकार ईशा फाउंडेशन को मात्र 1 रुपए की लीज पर कुल 17 एकड़ जमीन देने जा रही है।
बांस घाट की भव्यता और खर्च का बोझ
पटना का बांस घाट श्मशान 4.5 एकड़ में फैला है, जिसे पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने 89.40 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया है। पहले यह श्मशान 1.24 एकड़ में था। यहां एक साथ 18 शवों का अंतिम संस्कार किया जा सकता है और अंतिम यात्रा में आए लोगों के बैठने के लिए दो एसी वेटिंग हॉल भी बनाए गए हैं। हालांकि, इस अत्याधुनिक Bihar Crematorium में अंतिम संस्कार मुफ्त नहीं होगा। न्यूनतम फीस 3500 रुपए रखी गई है, जो डोम, पंडित और अन्य खर्चों को मिलाकर 5000 रुपए तक पहुंच सकती है। तुलनात्मक रूप से, दीघा, गुलबी और खाजकला के सरकारी घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए केवल 300 रुपए की रसीद कटती है।






दीघा और मुंगेर में ₹1 की लीज पर जमीन, विवाद गहराया
ईशा फाउंडेशन को बिहार सरकार पटना के दीघा में 2.11 एकड़ जमीन 33 साल के लिए मात्र 1 रुपए की लीज पर देगी। यहां बिहार का पहला एलपीजी गैस आधारित शवदाह गृह बनेगा, जिसमें चार एलपीजी फर्नेस लगाए जाएंगे। पटना की मेयर सीता साहू ने इस परियोजना पर कहा, ‘एलपीजी आधारित शवदाह गृह आज के समय की जरूरत है।’ उन्होंने यह भी बताया, ‘इस परियोजना के अंतर्गत पारंपरिक अंतिम संस्कार की प्रारंभिक विधियों के बाद एलपीजी आधारित दाह प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके साथ ही, पारंपरिक रीति-रिवाजों को ध्यान में रखते हुए सीमित मात्रा में लकड़ी का भी उपयोग किया जाएगा।’
इसके अलावा, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के विधानसभा क्षेत्र मुंगेर के तारापुर में भी ईशा फाउंडेशन को 15.01 एकड़ जमीन मात्र 1 रुपए में 99 साल के लिए लीज पर दी जाएगी। यह जमीन सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यटन स्थल विकसित करने के लिए दी जा रही है।
आधुनिकता के साथ पारंपरिक विधियां भी
बांस घाट श्मशान में शवों के अंतिम संस्कार के लिए तीन तरह की व्यवस्थाएं हैं:
- इलेक्ट्रिक शवदाह गृह: गुजरात से मंगाए गए चार इलेक्ट्रिक ओवन 15 से 20 मिनट में शव को राख कर देते हैं और लकड़ी के मुकाबले 90 फीसदी कम प्रदूषण फैलाते हैं।
- वुड क्रीमेसन ओवन: बिहार की कंपनी द्वारा तैयार किए गए छह वुड क्रीमेसन ओवन में कम लकड़ी लगती है और शव 20-25 मिनट में राख हो जाता है। धुएं को बाहर निकालने के लिए चिमनी लगाई गई है।
- पारंपरिक अंत्येष्टि स्थल: आठ पारंपरिक अंत्येष्टि स्थल भी हैं जहां चिता पर रखकर शव जलाया जाता है।
बच्चों के शवों के लिए 30×30 का एक अलग क्षेत्र भी विकसित किया जा रहा है, ताकि लोग गंगा में शव प्रवाहित न करें।
अंतिम संस्कार से जुड़ी अन्य सुविधाएं
श्मशान घाट परिसर में अंतिम संस्कार की सामग्री के लिए चार दुकानें बनाई गई हैं, जहां कपड़ा, घी, चंदन की लकड़ी, अगरबत्ती, कपूर, हवन सामग्री सहित सभी आवश्यक वस्तुएं मिलेंगी। श्मशान घाट के दो मुख्य द्वार, मोक्ष द्वार और बैकुंठ द्वार, 42 फीट ऊंचे हैं, जिनमें कांसे से बने ‘ओम’ चिन्ह स्थापित हैं। अस्थि विसर्जन और स्नान के लिए दो तालाब बनाए गए हैं, जिनमें दो किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए सीधे गंगा नदी का पानी आता है। इससे गंगा प्रदूषण से बचती है। पूरे परिसर में लगभग 12 हजार पेड़-पौधे लगाए गए हैं। दो तालाबों के बीच 12 फुट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित है, जिसे तमिलनाडु के आदियोगी की तर्ज पर जालंधर के कारीगरों ने फाइबर मटेरियल से बनाया है। प्रतिमा में शिव की जटाओं से गंगा निकलती दिखाई देती है।
दीवारों पर इंसान के जन्म से मृत्यु तक की जीवन यात्रा और राजा हरिश्चंद्र की कहानी की पेंटिंग भी बनाई गई है। ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा के लिए पटना नगर निगम की वेबसाइट और व्हाट्सएप चैटबोट (9264447449) भी उपलब्ध हैं, जिससे मुक्ति रथ की पिकअप सेवा और डेथ सर्टिफिकेट के लिए आवेदन भी किया जा सकता है।
बिहार में 40 नए शवदाह गृहों का निर्माण
बिहार में कुल 40 अत्याधुनिक शवदाह गृह बनाए जा रहे हैं, जिनमें से 20 का निर्माण पूरा हो चुका है। उत्तर बिहार के 12 और दक्षिण बिहार के 8 जिलों में ये आधुनिक शवदाह गृह बनकर तैयार हैं। इन सभी में इलेक्ट्रिकल और पारंपरिक दोनों प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिनके सौंदर्यीकरण का काम अंतिम चरण में है और इन्हें जल्द ही चालू कर दिया जाएगा।








