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लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी राहत! अब नहीं जाएंगे जेल, ‘7 साल से जमानत पर हैं लालू यादव’, SC ने क्या कहा?

Bihar Lalu Prasad Yadav: चारा घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को उच्चतम न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। ईडी की याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने उनकी जमानत बरकरार रखी है, जिससे राजद सुप्रीमो की मुश्किलें टल गई हैं।

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Bihar Lalu Prasad Yadav: देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाला मामले में बड़ी राहत दी है। उच्चतम न्यायालय ने उनकी जमानत रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद लालू प्रसाद यादव फिलहाल जमानत पर ही रहेंगे, जिससे उनकी जेल वापसी की आशंका समाप्त हो गई है।

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर लालू प्रसाद यादव की जमानत रद्द करने की मांग की थी। ईडी ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत लालू यादव को चारा घोटाला मामलों में जमानत मिली थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की दलीलों को खारिज करते हुए झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप से मना कर दिया।

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लालू यादव की जमानत रद्द करने से SC का इनकार, ED को तगड़ा झटका!

Lalu Prasad Yadav: राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। चारा घोटाला से जुड़े एक मामले में उनकी जमानत रद्द करने से शीर्ष अदालत ने इनकार कर दिया है। इस फैसले से प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बड़ा झटका लगा है, जिसने झारखंड हाईकोर्ट द्वारा दी गई रांची की जमानत को रद्द करने की मांग की थी।

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सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश में किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने से साफ मना कर दिया है। ईडी ने एक याचिका दायर कर लालू प्रसाद यादव की जमानत रद्द करने की मांग की थी, लेकिन सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने इस याचिका पर कोई आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।

‘7 साल से जमानत पर हैं लालू यादव’, SC ने क्या कहा?

अदालत ने झारखंड उच्च न्यायालय के फैसले में दखल देने से मना करते हुए उच्च न्यायालय को जल्द से जल्द इस केस से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया। याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने टिप्पणी की कि लालू प्रसाद यादव को जमानत मिले हुए सात साल बीत चुके हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी कि चारा घोटाले के दोषी लालू प्रसाद यादव की सजा निलंबित करने का हाईकोर्ट का आदेश तथ्यात्मक रूप से गलत है। उन्होंने कहा,

“अदालत ने यह कहते हुए राहत दी थी कि दोषी ने अपनी सजा का 50 फीसदी हिस्सा पूरा कर लिया है जो कि तथ्यों के आधार पर सही नहीं है।”

हालांकि, तमाम दलीलों को सुनने के बाद भी उच्चतम न्यायालय ने लालू प्रसाद यादव को हाईकोर्ट से मिली जमानत को रद्द करने से इनकार कर दिया। इसका सीधा मतलब है कि लालू प्रसाद यादव की जमानत पर रोक नहीं लगी है और वह फिलहाल जमानत पर ही रहेंगे।

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सिंगापुर जाने की भी मिली थी इजाजत, ये है पूरा मामला

इससे पहले, चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को सिंगापुर जाने की भी अनुमति मिल चुकी है। रांची की अपर न्यायायुक्त अखिलेश कुमार तिवारी की अदालत ने उनका पासपोर्ट रिलीज करने का आदेश दिया था। इस अदालती फैसले के बाद लालू यादव नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के लिए सिंगापुर गए थे।

लालू प्रसाद यादव को किडनी ट्रांसप्लांट के बाद नियमित चेकअप के लिए सिंगापुर के चिकित्सकों ने बुलाया था। डॉक्टरों ने उन्हें 1 जून के बाद रूटीन चेकअप के लिए आने की सलाह दी थी। इसी के आधार पर उन्होंने अदालत में पासपोर्ट रिलीज करने की याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था।

लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले से जुड़े कई मामलों में सीबीआई की विशेष अदालत ने दोषी ठहराया है। इनमें डोरंडा, चाईबासा, देवघर और दुमका कोषागार से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले शामिल हैं। हालांकि, स्वास्थ्य कारणों और अन्य कानूनी आधारों पर उन्हें फिलहाल जमानत मिली हुई है, और सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उनकी मौजूदा राहत बरकरार रहेगी।

ईडी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला: क्या थी दलील?

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि लालू प्रसाद यादव को जमानत मिले सात साल हो चुके हैं। ईडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी थी कि झारखंड हाईकोर्ट ने लालू प्रसाद यादव की सजा निलंबित करने का जो आदेश दिया था, वह तथ्यात्मक रूप से गलत था। राजू ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने यह मानते हुए राहत दी थी कि दोषी ने अपनी सजा का 50 फीसदी हिस्सा पूरा कर लिया है, जबकि यह तथ्य सही नहीं था। हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने इन सभी दलीलों को सुनने के बाद भी लालू प्रसाद यादव की जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने झारखंड उच्च न्यायालय को इस केस से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘लालू प्रसाद यादव को जमानत मिले 7 साल हो चुके हैं। हम झारखंड हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप नहीं करेंगे और हाईकोर्ट जल्द से जल्द इस केस से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई पूरी करे।’

सिंगापुर यात्रा की भी मिली थी अनुमति

इससे पहले, झारखंड के रांची सिविल कोर्ट ने चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव को सिंगापुर जाने की भी अनुमति दी थी। रांची की अपर न्यायायुक्त अखिलेश कुमार तिवारी की अदालत ने उनके पासपोर्ट को रिलीज करने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद लालू यादव किडनी ट्रांसप्लांट के बाद नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के लिए सिंगापुर गए थे। सिंगापुर के चिकित्सकों ने उन्हें 1 जून के बाद रूटीन चेकअप के लिए आने की सलाह दी थी, जिसके लिए उन्होंने अदालत में पासपोर्ट रिलीज करने की याचिका दाखिल की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया था।

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कई मामलों में दोषी ठहराए गए हैं लालू

चारा घोटाला से जुड़े कई मामलों में लालू प्रसाद यादव को सीबीआई की विशेष अदालत ने दोषी ठहराया है। इनमें डोरंडा, चाईबासा, देवघर और दुमका कोषागार से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले शामिल हैं। हालांकि, स्वास्थ्य कारणों और अन्य कानूनी आधारों पर उन्हें फिलहाल जमानत मिली हुई है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उनकी जमानत बरकरार रहेगी और उन्हें तत्काल जेल नहीं जाना होगा, जो उनके और उनकी पार्टी के लिए एक बड़ी राहत है।

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