Patna Police Action: पटना के चर्चित बंटी यादव अपहरण एवं हत्याकांड में पुलिस की कार्यप्रणाली पर लगातार उठ रहे गंभीर सवालों के बीच पटना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। सिटी एसपी (सेंट्रल) ममता कल्याणी ने ड्यूटी में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में कोतवाली थाना के तीन एएसआई और एक गृह रक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद सभी निलंबित कर्मियों से तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में एएसआई प्रवीण कुमार पंकज, अवधेश कुमार, वीर बहादुर सिंह और गृह रक्षक सुदर्शन प्रसाद शामिल हैं। निलंबन की अवधि के दौरान इन चारों का मुख्यालय नवीन आरक्षी पुलिस केंद्र, पटना निर्धारित किया गया है। यह फैसला विभागीय जांच के आधार पर लिया गया है।






अपहरण के वक्त घटनास्थल से 100 मीटर दूर थी पुलिस
पुलिस पर आरोप है कि 6 जुलाई की रात जब 33 वर्षीय बंटी यादव के कथित अपहरण की घटना हुई थी, तब डायल-112 और गश्ती दल में शामिल ये पुलिसकर्मी पटना जंक्शन स्थित टीओपी (TOP) से सिर्फ 100 मीटर की दूरी पर मौजूद थे। इसके बावजूद, उन्हें अपहरण और मारपीट की घटना की कोई जानकारी नहीं मिली। समय रहते कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया, जिसके कारण एक बड़ी चूक हुई। विभाग ने इसे ड्यूटी के दौरान गंभीर लापरवाही माना है।
पाँच दिन बाद मिला था बंटी यादव का शव
6 जुलाई की रात पटना जंक्शन क्षेत्र से बंटी यादव के कथित अपहरण का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था, जिससे परिजनों और स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश था। परिजन लगातार पुलिस से बंटी की सुरक्षित बरामदगी की गुहार लगाते रहे और सड़क जाम कर प्रदर्शन भी किया। हालांकि, करीब पाँच दिन बाद, 11 जुलाई को बंटी यादव का शव पटना जंक्शन से लगभग 60 किलोमीटर दूर अथमलगोला इलाके से बरामद किया गया। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने शव की पहचान छिपाने की भी कोशिश की थी।
“मामले की विभागीय जांच अभी जारी है। जांच के लिए विशेष टीम का गठन किया गया है और वैज्ञानिक अनुसंधान भी जारी है। जल्द ही सारी बातें साफ हो जाएंगी।”
पुलिस की निष्क्रियता पर उठे थे गंभीर सवाल
बंटी यादव हत्याकांड के बाद पटना पुलिस की शुरुआती कार्रवाई, गश्ती व्यवस्था और अपहरण के दौरान पुलिस की कथित निष्क्रियता को लेकर लगातार गंभीर सवाल उठ रहे थे। परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूछा था कि घटनास्थल के इतने करीब पुलिसकर्मी मौजूद होने के बावजूद उन्हें वारदात की सूचना क्यों नहीं मिली और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी। अब इस निलंबन के बाद पुलिस पर उठ रहे सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद जगी है। मामले की जांच अभी भी जारी है, जिससे और भी तथ्य सामने आ सकते हैं।








