Darbhanga News: बिहार के दरभंगा जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 75 लाख रुपये की लागत से बना बघौल उप स्वास्थ्य केंद्र उद्घाटन से पहले ही जर्जर हो गया है। जाले प्रखंड के देउरा-बंधौली पंचायत स्थित इस केंद्र की दीवारों में गहरी दरारें पड़ गई हैं और प्लास्टर भी झड़ने लगा है। वर्ष 2022 में निर्माण पूरा होने के बावजूद चार साल से यह भवन बंद पड़ा है, जिससे ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।
Darbhanga में भ्रष्टाचार की नई मिसाल! 75 लाख का अस्पताल उद्घाटन से पहले ही हुआ जर्जर, ग्रामीण परेशान
Darbhanga Health Center: बिहार के दरभंगा जिले में सरकारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां जाले प्रखंड के देउरा-बंधौली पंचायत स्थित बघौल गांव में लगभग 75 लाख रुपये की लागत से बना उप स्वास्थ्य केंद्र का नया भवन उद्घाटन से पहले ही दरकने लगा है। इसकी दीवारों में जगह-जगह लंबी और पतली दरारें उभर आई हैं, वहीं प्लास्टर भी तेजी से झड़ रहा है। इस स्थिति ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी असंतोष है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह भवन वर्ष 2022 में बनकर तैयार हो गया था, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी इसे अब तक चालू नहीं किया जा सका है। स्वास्थ्य सुविधाओं की आस लगाए बैठे लोगों के लिए यह जर्जर भवन किसी मज़ाक से कम नहीं है।






निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
बघौल उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण स्वास्थ्य विभाग के तहत बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड (BMSICL) द्वारा कराया गया था। शिलापट्ट के अनुसार, इस हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के निर्माण पर करीब 75 लाख रुपये खर्च हुए थे। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद भवन की यह दुर्दशा निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस भवन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करनी थी, वह खुद ही बीमार पड़ गया है।
जिम्मेदार कौन? अधिकारी और संवेदक पर कार्रवाई की मांग
स्थानीय समाजसेवी जुल करनैन, अब्दुल माबूद, सनाउल्लाह असरफ उर्फ निराले और खादिम हुसैन ने इस मामले को जाले प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के संज्ञान में लाया है। हालांकि, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी का कहना है कि संवेदक ने अब तक भवन विभाग को हस्तांतरित नहीं किया है, इसलिए विभाग कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं है। यह बयान सरकारी तंत्र की निष्क्रियता और जवाबदेही से बचने की कोशिश को दर्शाता है।
संवेदक की ओर से अब तक भवन विभाग को हस्तांतरित नहीं किया गया है, इसलिए विभाग कार्रवाई की स्थिति में नहीं है।
ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने, दोषी संवेदक और संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने, गुणवत्तापूर्ण मरम्मत करवाने और जल्द से जल्द इस स्वास्थ्य केंद्र को चालू करने की मांग की है।
स्वास्थ्य सुविधाओं का इंतजार और ग्रामीणों का आक्रोश
जिला परिषद सदस्य फरहत हैदर ने भी इस मुद्दे को जिला परिषद की बैठक में उठाया था। उन्होंने बताया कि भवन वर्षों से तैयार है, लेकिन उद्घाटन न होने के कारण सरकारी राशि का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है, और ग्रामीणों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। बघौल और आसपास के गांवों के लोगों को आज भी छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दूर जाना पड़ता है, जबकि उनके गांव में लाखों की लागत से बना अस्पताल धूल फांक रहा है और जर्जर हो रहा है। यह स्थिति बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत और सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में व्याप्त खामियों को उजागर करती है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब और क्या कार्रवाई करता है ताकि ग्रामीणों को उनके हक की स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।
करोड़ों की लागत, फिर भी बदहाल इमारत
बघौल गांव में लगभग 75 लाख रुपये की लागत से हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भवन का निर्माण बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड (BMSICL) ने स्वास्थ्य विभाग के तहत कराया था। शिलापट्ट पर भी इसकी जानकारी अंकित है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह भवन 2022 में बनकर तैयार हो गया था, लेकिन आज तक इसका उद्घाटन नहीं हो सका है। उपयोग में आने से पहले ही इसकी हालत खराब होने लगी है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि जिस केंद्र का उद्देश्य उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करना था, वह खुद बीमार हो चुका है।
ग्रामीणों की मांग: दोषियों पर हो कार्रवाई
ग्रामीणों ने मामले की तकनीकी जांच कराने, दोषी संवेदक व संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई करने तथा गुणवत्तापूर्ण मरम्मत के बाद जल्द स्वास्थ्य केंद्र चालू करने की मांग की है।
स्थानीय समाजसेवी जुल करनैन, अब्दुल माबूद, सनाउल्लाह असरफ उर्फ निराले और खादिम हुसैन ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को जाले के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के सामने उठाया है। उनका कहना है कि सरकारी राशि का दुरुपयोग हो रहा है और ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा नहीं मिल पा रही है।
स्वास्थ्य विभाग और संवेदक की खींचतान
इस मामले पर जाले के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी का कहना है कि संवेदक ने अभी तक भवन को विभाग को हस्तांतरित नहीं किया है। इस कारण स्वास्थ्य विभाग इस पर कोई सीधी कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। वहीं, जिला परिषद सदस्य फरहत हैदर ने भी इस मुद्दे को जिला परिषद की बैठक में उठाया था। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों से तैयार भवन का उद्घाटन न होने से सरकारी धन का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है, जिससे आम जनता में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द इस केंद्र को चालू किया जाए ताकि उन्हें इसका लाभ मिल सके।








