Bihar Electricity: मंगलवार को बिहार विधान परिषद के मानसून सत्र के दौरान राज्य की बिजली व्यवस्था पर तीखी बहस छिड़ गई। विधान पार्षद सौरभ कुमार ने सरकार के उन दावों पर सवाल उठाए, जिनमें प्रदेश में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण की बात कही जाती है। उन्होंने उजागर किया कि आजादी के 79 साल बाद भी पश्चिमी चंपारण जिले के कई गांव बिजली से वंचित हैं, जिससे सैकड़ों परिवारों का जीवन लालटेन और मोमबत्ती के सहारे कट रहा है।
79 साल बाद भी अंधेरे में डूबे गांव
विधान पार्षद सौरभ कुमार ने सदन में बोलते हुए ऊर्जा विभाग और सरकार का ध्यान पश्चिमी चंपारण जिले के रामनगर प्रखंड की दो पंचायतों, नौरंगिया और बनकटवा, की ओर आकर्षित किया। उन्होंने दावा किया कि इन पंचायतों में आज तक बिजली की कोई सुविधा नहीं पहुंची है। उनके अनुसार, सैकड़ों परिवार अभी भी लालटेन, मोमबत्ती और सोलर लाइट के सहारे जीवन यापन करने को मजबूर हैं।






सौरभ कुमार ने यह भी जोड़ा कि इन गांवों में न तो बिजली के खंभे लगे हैं और न ही कोई विद्युत लाइन पहुंची है। उन्होंने बताया कि इन इलाकों के ग्रामीण रोजमर्रा की जिंदगी में भारी परेशानी झेल रहे हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य सेवाएं और आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।

सरकार के विकास के दावों पर सवाल
एमएलसी सौरभ कुमार ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि एक ओर सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है और बिहार को ऊर्जा प्रदेश बनाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर राज्य के कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां बिजली जैसी मूलभूत सुविधा का इंतजार खत्म नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा, “जब पूरा देश डिजिटल इंडिया और स्मार्ट विलेज की बात कर रहा है, तब बिहार के इन गांवों में बिजली जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं होना चिंताजनक है। यह शर्मनाक है।”
उन्होंने ऊर्जा मंत्री से मांग की कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए, तुरंत जांच कराई जाए और इन पंचायतों में बिजली पहुंचाने के लिए एक ठोस समयसीमा तय की जाए। इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद सदन में विपक्षी सदस्यों ने भी सरकार से जवाब मांगा।
ऊर्जा मंत्री का आश्वासन और आगे की राह
सदन में इस गंभीर मुद्दे पर ऊर्जा विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे, जिनसे स्पष्टीकरण की मांग की गई। सूत्रों के अनुसार, ऊर्जा मंत्री ने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि संबंधित क्षेत्र का सर्वेक्षण कर तुरंत रिपोर्ट मांगी जाएगी और यथाशीघ्र बिजली पहुंचाने की कार्यवाही शुरू की जाएगी।
बिहार में बिजली व्यवस्था को लेकर पिछले कई वर्षों से लगातार शिकायतें आ रही हैं, खासकर ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों से। पश्चिमी चंपारण का रामनगर प्रखंड नेपाल सीमा से सटा हुआ एक इलाका है, जहां भौगोलिक चुनौतियों के कारण बिजली लाइन पहुंचाना अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है। सरकार दावा करती रही है कि राज्य में बिजली पहुंच की दर काफी बढ़ गई है, लेकिन अभी भी कुछ छूटे हुए गांव बचे हुए हैं।
यह मामला बिहार में बिजली आपूर्ति की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऊर्जा मंत्री के आश्वासन के बाद अब देखना होगा कि पश्चिमी चंपारण के इन गांवों तक बिजली कब तक पहुंच पाती है और सरकार अपने दावों को जमीनी हकीकत में बदलने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।









