Bhagalpur Vigilance Action: भागलपुर में हड़कंप! बिजली विभाग के JE और सहायक रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए, JE का पुराना रिकॉर्ड भी विवादित।निगरानी विभाग की टीम ने मंगलवार सुबह नौलखा कोठी परिसर में कार्रवाई करते हुए जेई अमित कुमार और उनके सहयोगी सौरभ कुमार को पकड़ा।
बिहार में भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए निगरानी विभाग लगातार सक्रिय है। इसी क्रम में भागलपुर में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मंगलवार की सुबह एक बड़ी कार्रवाई की है। बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) अमित कुमार और उनके निजी सहायक सौरभ कुमार को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है। यह गिरफ्तारी शहर के प्रसिद्ध तिलकामांझी इलाके में स्थित नौलखा कोठी परिसर में छापेमारी के दौरान हुई, जिसने सरकारी महकमों में हड़कंप मचा दिया है।






रिश्वतखोरी का पुराना इतिहास, पहले भी जा चुके हैं जेल
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की विशेष टीम ने अहले सुबह इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। जेई अमित कुमार का नाम पहले भी विवादों से जुड़ा रहा है। यह पहली बार नहीं है जब उन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है; वह पूर्व में भी जेल जा चुके हैं।बरारी निवासी सौरभ कुमार जेई के लिए बिचौलिए का काम करता था।आरोप है कि मायागंज निवासी एक उपभोक्ता से किसी काम के बदले आठ हजार रुपये की रिश्वत तय की गई थी और रकम ले ली गई थी। लेकिन तय समय पर काम पूरा नहीं हुआ। इसके बाद उपभोक्ता ने पैसे वापस करने का दबाव बनाया. मामला बढ़ने के बाद उसने पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई। इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर बिजली विभाग में व्याप्त अनियमितताओं और कुछ अधिकारियों के भ्रष्ट आचरण को उजागर किया है। निगरानी विभाग के इस कदम से जिले में ईमानदारी से काम करने वाले कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा है, वहीं भ्रष्टाचारियों के बीच खौफ का माहौल है।

निगरानी विभाग की लगातार कार्रवाई
भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ निगरानी विभाग का विशेष अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में मंगलवार को हुई यह गिरफ्तारी एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है। निगरानी टीम ने दोनों आरोपियों को रिश्वत लेते हुए पकड़ा, जिससे उनके खिलाफ पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं। इस कार्रवाई के बाद संबंधित मामले में आगे की विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इस गिरफ्तारी से यह साफ हो गया है कि सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। ऐसे मामलों में शामिल किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।









