Bihar Cyber Security: बिहार पुलिस मुख्यालय की ‘साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई’ के निर्देश पर भागलपुर जिले में एक बड़ा साइबर जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। ‘साइबर स्मार्ट ट्यूजडे’ नामक इस पहल के तहत हर मंगलवार को आमजन, विशेषकर छात्र-छात्राओं, युवाओं और अभिभावकों को साइबर ठगी के बढ़ते खतरों के प्रति आगाह किया जा रहा है। इसका मुख्य लक्ष्य लोगों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना है।







इसी अभियान के अंतर्गत, आज साइबर थाना भागलपुर द्वारा नवयुग विद्यालय, आदमपुर में एक जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में जिलाधिकारी अलंकृत पांडे, वरीय पुलिस अधीक्षक और नगर पुलिस अधीक्षक सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। विद्यालय के शिक्षकगण, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ और साइबर थाना के अधिकारी व कर्मी भी इस महत्वपूर्ण आयोजन का हिस्सा बने।
डिजिटल जीवन में सतर्कता ही सुरक्षा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी श्रीमती अलंकृत पांडे ने कहा, ‘वर्तमान समय में जीवन का प्रत्येक क्षेत्र डिजिटल तकनीक से जुड़ चुका है। बैंकिंग, शिक्षा, व्यापार, सरकारी सेवाओं तथा सामाजिक संपर्क के लिए इंटरनेट एवं स्मार्टफोन का उपयोग निरंतर बढ़ रहा है। ऐसे में साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की दैनिक आवश्यकता बन गई है।’ उन्होंने जोर देते हुए कहा कि थोड़ी-सी सतर्कता अपनाकर अधिकांश साइबर अपराधों से आसानी से बचा जा सकता है।
श्रीमती पांडे ने विद्यार्थियों को विशेष सलाह देते हुए कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक, संदिग्ध वेबसाइट, QR कोड, मोबाइल ऐप या सोशल मीडिया संदेश पर बिना सत्यापन के कभी विश्वास न करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में अपना OTP, ATM PIN, बैंक खाता विवरण, CVV, पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। जिलाधिकारी ने चेताया कि साइबर अपराधी विभिन्न प्रकार के प्रलोभन, धमकी या झूठे बहानों से लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं, इसलिए हर वक्त सतर्क और सजग रहना बेहद जरूरी है।

साइबर अपराधों के प्रकार और बचाव के उपाय
जिलाधिकारी ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे स्वयं डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक बनें और अपने माता-पिता, परिवार के सदस्यों, मित्रों एवं आसपास के लोगों को भी साइबर अपराधों से बचाव के उपायों की जानकारी दें। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी समाज में जागरूकता के प्रभावी दूत बनकर सुरक्षित डिजिटल समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान, साइबर थाना के अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों की विस्तृत जानकारी दी।
- डिजिटल अरेस्ट
- फिशिंग और विशिंग (Voice Phishing)
- स्मिशिंग (SMS Fraud)
- फर्जी KYC अपडेट
- UPI एवं QR कोड फ्रॉड
- OTP धोखाधड़ी
- सोशल मीडिया हैकिंग
- फर्जी निवेश योजनाएं
- ऑनलाइन गेमिंग एवं जॉब फ्रॉड
- फेक कस्टमर केयर नंबर
इन अपराधों से बचाव के लिए अपनाए जाने वाले व्यावहारिक उपायों को भी उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया। इसमें सुरक्षित पासवर्ड का उपयोग, दो-स्तरीय सुरक्षा (Two-Factor Authentication), मोबाइल एवं कंप्यूटर में नियमित सुरक्षा अपडेट, विश्वसनीय एप्लीकेशन का उपयोग और सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सावधानी बरतने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
ठगी होने पर तुरंत करें यह काम
कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी की घटना घटित हो जाए, तो समय बर्बाद किए बिना तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। ऐसा करने से समय रहते आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित हो सकेगी और आर्थिक नुकसान को कम किया जा सकेगा।
जिला प्रशासन और भागलपुर पुलिस ने आम नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे साइबर अपराधों से संबंधित किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल संबंधित थाना, साइबर थाना या हेल्पलाइन 1930 पर दें। स्वयं जागरूक रहकर और दूसरों को भी सुरक्षित डिजिटल जीवन के लिए प्रेरित करके ही हम एक सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण का निर्माण कर सकते हैं।










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