Bihar Government: पटना: बिहार सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय बाजारों को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम निर्णय लिया है। अब राज्य के प्रत्येक पंचायत में हाट विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही जिला मुख्यालयों और प्रखंड स्तर पर भी हाट और मार्ट खोले जाएंगे। इस पहल से लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने विधानसभा में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि इस बड़े कदम का उद्देश्य स्थानीय बाजार को सशक्त करना और राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। यह निर्णय ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को तेज करेगा और लोगों की आय में वृद्धि करेगा।






जीविका दीदियों के उत्पादों को मिलेगा बड़ा प्लेटफॉर्म
सम्राट सरकार की इस योजना का एक मुख्य पहलू जीविका दीदियों को सशक्त करना है। नए हाट और मार्ट में जीविका दीदियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पादों के लिए एक बड़ा और संगठित बाजार मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ेगी।

लोगों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण और हस्तनिर्मित सामान आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। ग्रामीण विकास मंत्री ने बताया कि जीविका योजना के माध्यम से लाखों परिवार पहले से ही आत्मनिर्भर बन रहे हैं। बकरीपालन और पशुपालन से 9.78 लाख से अधिक परिवार जुड़े हैं, जबकि खेती से 46.89 लाख किसान दीदी सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। राज्य में जीविका समूहों ने 61 उत्पादक कंपनियां भी बनाई हैं।
पर्यटन स्थलों पर भी बिकेंगे स्थानीय उत्पाद
सरकार जीविका समूह के उत्पादों को पर्यटन से भी जोड़ने की तैयारी कर रही है। इस योजना के तहत, बोधगया, नालंदा, वैशाली, राजगीर, पावापुरी, रोहतास, बक्सर, सीतामढ़ी और केसरिया जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर जीविका उत्पादों की बिक्री का प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलेगी और महिलाओं की आय में उल्लेखनीय इजाफा होगा।
मनरेगा में तकनीक का इस्तेमाल और किसानों को राहत
ग्रामीण विकास विभाग ने मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तकनीकी व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। अब मनरेगा कार्यों में बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज होगी, जीपीएस ट्रैकिंग का इस्तेमाल किया जाएगा और निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ली जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच पाएगा।
किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक और अहम निर्णय लिया गया है। रोपनी, बुआई और कटनी के समय, यानी खेती के व्यस्त मौसम में, 60 दिनों तक मनरेगा के कुछ कार्य बंद रखे जाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खेती के दौरान किसानों को मजदूरों की कमी का सामना न करना पड़े और कृषि कार्य सुचारु रूप से चलता रहे।
खजाना खाली होने के आरोपों पर सरकार का जवाब
विधानसभा में ग्रामीण विकास विभाग की अनुपूरक अनुदान मांग पर लंबी चर्चा हुई, जिसमें कई विधायकों ने अपने सुझाव और सवाल रखे। विपक्ष की ओर से राज्य का खजाना खाली होने के आरोप भी लगाए गए।
उपमुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘कुछ विभागों में तकनीकी कारणों से भुगतान में देरी हुई है। इसका मतलब यह नहीं कि सरकार के पास धन की कमी है।’ उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि सभी लंबित भुगतान जल्द ही कर दिए जाएंगे।
यह मेगा प्लान बिहार के ग्रामीण विकास और अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है।









