Bihar Encounter Case: भोजपुर जिले में हुए भरत तिवारी उर्फ भरत भूषण तिवारी के चर्चित एनकाउंटर मामले में पटना हाईकोर्ट ने सम्राट सरकार से जवाब-तलब किया है। हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दायर करने का कड़ा निर्देश दिया है। इस मामले में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जिसके बाद न्यायालय ने यह अहम कदम उठाया है।
भोजपुर एनकाउंटर पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: सरकार से मांगा जवाब, पुलिस की मुश्किल बढ़ी!
Bihar High Court: भोजपुर जिले में हुए भरत तिवारी उर्फ भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने बिहार की सम्राट सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पटना हाईकोर्ट ने इस चर्चित मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने सरकार को सख्त निर्देश देते हुए 3 सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, मामले से जुड़े सभी महत्वपूर्ण सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए भी कहा गया है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों की गंभीरता और बढ़ गई है।






पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल
भरत तिवारी की 17 जून को पुलिस एनकाउंटर में गोली लगने से मौत हो गई थी। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया है, जिसकी जांच अभी जारी है। पटना हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार झा की एकलपीठ ने भरत तिवारी की मां आशा देवी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। आशा देवी की ओर से वकील अमित कुमार ने कोर्ट से एनकाउंटर में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और एक तय समय सीमा के भीतर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

आशा देवी ने अदालत से घटना के दिन के सीसीटीवी फुटेज, वीडियोग्राफी, वायरलेस लॉगबुक, स्टेशन डायरी इंट्री, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बॉडी कैमरा फुटेज, सीजर रिकॉर्ड और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सहित सभी अहम सबूतों को सुरक्षित रखने की गुहार लगाई। उन्होंने यह भी मांग की है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, इंक्वेस्ट रिपोर्ट और फॉरेंसिक रिपोर्ट की प्रति परिवार को उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा, भरत तिवारी का मोबाइल फोन और उसके पास से जब्त सभी सामान भी परिवार को वापस किए जाएं।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर न्यायिक आयोग की जांच
भरत की मां आशा देवी ने हाईकोर्ट को बताया कि 16 और 17 जून की रात को महिला पुलिसकर्मी बिना किसी पूर्व सूचना के उनके घर में घुस गई थीं। उन्होंने 17 जून को भरत के पिता काशीनाथ तिवारी को शाहपुर थाने में रखने के मामले की भी जांच की गुहार लगाई है। अदालत ने इन दलीलों को सुनने के बाद बिहार सरकार से स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त को निर्धारित की गई है।
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित बिलौटी गांव में 17 जून को हुए पुलिस एनकाउंटर में भरत तिवारी की मौत हो गई थी। वह सोशल मीडिया पर पुलिस को लगातार चुनौती दे रहा था, हालांकि पुलिस ने उसे मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति बताया था। एनकाउंटर से एक दिन पहले उसने एक थानेदार पर पिस्टल तान दी थी। परिजनों का आरोप है कि सरेंडर करने के बावजूद पुलिस ने उसे गोली मारकर हत्या कर दी। आखिरी फेसबुक लाइव वीडियो में भरत तिवारी पुलिस के सामने अपनी अवैध पिस्टल फेंककर सरेंडर करते हुए भी दिखाई दिया था। इस घटना के बाद पुलिस की कार्यशैली पर देशभर में सवाल उठे थे, जिसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर एक न्यायिक आयोग का गठन कर जांच शुरू की गई। शाहपुर थाने में तत्कालीन एसडीपीओ, थानेदार और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का केस भी दर्ज है। हाईकोर्ट के इस ताजा आदेश से मामले की निष्पक्ष जांच की उम्मीद बढ़ी है।
भरत तिवारी एनकाउंटर: हाईकोर्ट ने सरकार से क्या पूछा?
जस्टिस अरुण कुमार झा की एकलपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण सबूतों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। इनमें सीसीटीवी फुटेज, वीडियोग्राफी, वायरलेस लॉगबुक और भरत तिवारी के मोबाइल फोन का डेटा शामिल है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ये सभी साक्ष्य अगली सुनवाई तक सुरक्षित रखे जाएं। भरत तिवारी की 17 जून को पुलिस एनकाउंटर में गोली लगने से मौत हो गई थी, जिसके बाद परिजनों की शिकायत पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
भरत तिवारी के परिवार के गंभीर आरोप
भरत तिवारी की मां आशा देवी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एनकाउंटर में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की है। आशा देवी के वकील अमित कुमार ने अदालत को बताया कि घटना के दिन के सभी अहम सबूत जैसे स्टेशन डायरी इंट्री, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बॉडी कैमरा फुटेज, सीजर रिकॉर्ड और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सुरक्षित रखे जाएं। उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, इंक्वेस्ट रिपोर्ट और फॉरेंसिक रिपोर्ट की प्रतियां परिवार को सौंपने और भरत तिवारी का मोबाइल फोन व अन्य जब्त सामान वापस करने की भी गुहार लगाई है।
आशा देवी ने हाईकोर्ट को बताया, ’16 और 17 जून की रात को महिला पुलिसकर्मी बिना किसी सूचना के हमारे घर में घुस गई थीं। इसके अलावा, 17 जून को भरत के पिता काशीनाथ तिवारी को शाहपुर थाने में हिरासत में रखा गया था, जिसकी भी जांच होनी चाहिए।’
एनकाउंटर पर उठे थे सवाल, न्यायिक आयोग कर रहा जांच
17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस एनकाउंटर में भरत तिवारी की मौत हुई थी। पुलिस का कहना था कि वह लंबे समय से सोशल मीडिया पर उन्हें चुनौती दे रहा था और मानसिक रूप से परेशान था। एनकाउंटर से एक दिन पहले उसने थानेदार पर पिस्टल भी तान दी थी। हालांकि, भरत तिवारी के परिजनों ने आरोप लगाया कि उसने सरेंडर कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने उसे गोली मार दी। एनकाउंटर के दौरान भरत तिवारी फेसबुक पर लाइव था और आखिरी वीडियो में उसे अपनी अवैध पिस्टल फेंककर सरेंडर करते हुए देखा गया था।
यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बनने के बाद पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे थे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर एक न्यायिक आयोग का गठन किया गया है, जिसकी जांच जारी है। इसके अतिरिक्त, शाहपुर थाने में तत्कालीन एसडीपीओ और थानेदार समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला भी दर्ज किया गया है। इस मामले पर अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।









