Patna News: पटना में बुधवार को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठे हैं। विपक्षी एमएलसी शशि यादव ने शुक्रवार को बिहार विधान परिषद में आरोप लगाया कि उन पर झूठा आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया है और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया है। यह मामला मानसून सत्र के अंतिम दिन उठाया गया, जब पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद पहले से ही चल रहा था।
एमएलसी ने बताई फर्जी मुकदमे की सच्चाई
शशि यादव ने सदन को बताया कि छात्र प्रदर्शन के दौरान चोरी और झपटमारी के आरोप में उनके खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में यह झूठा आरोप लगाया गया है कि उन्होंने एक भाजपा नेता की अंगूठी, चेन और 15,000 रुपये नकदी छीन ली थी।






एमएलसी शशि यादव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वह उस दिन किसी और काम से बाहर थीं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई होनी चाहिए, तो वह सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन में उनकी भागीदारी से संबंधित होनी चाहिए, न कि चोरी या झपटमारी के आरोपों से।
पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप
एमएलसी शशि यादव ने आईजी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब वह प्रदर्शनकारी छात्राओं को सांत्वना देने गई थीं, तब आईजी राणा ने उनका हाथ मरोड़ दिया था। उन्होंने परिषद को बताया कि इस कथित घटना के बाद उनका हाथ सूजा हुआ है।

यादव ने आगे आरोप लगाया कि जब वह हिरासत में लिए गए छात्रों के बारे में पूछताछ करने कोतवाली थाने गईं, तो थाना प्रभारी ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया।
सरकार से कार्रवाई की मांग
शशि यादव के आरोपों का समर्थन करते हुए, राजद एमएलसी सुनील सिंह ने सभापति से इस मामले को गंभीरता से लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ये आरोप एक महिला जन प्रतिनिधि के साथ पुलिस अधिकारियों के बर्ताव से संबंधित हैं, जो बेहद गंभीर है। चर्चा का जवाब देते हुए, बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि सरकार सदन में उठाए गए इन गंभीर आरोपों का संज्ञान लेगी।
इन गंभीर आरोपों के बाद बिहार में पुलिस और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ने की संभावना है। सरकार द्वारा इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा क्योंकि यह पुलिस की जवाबदेही और जन प्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा है।









