Bihar Encounter Case: बिहार के चर्चित बिहार एनकाउंटर केस में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्वर्गीय भरत तिवारी के परिवार से मुलाकात की है। सीएम ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस मुलाकात और आश्वासन की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘स्वर्गीय भरत तिवारी जी के परिवार को न्याय मिलेगा।’ इस बीच, पटना हाई कोर्ट ने इस मामले में बिहार सरकार से तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
भरत तिवारी एनकाउंटर: पुलिस के दावे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंतर
यह मामला 17 जून का है, जब भरत तिवारी फेसबुक लाइव पर आया था। लाइव के दौरान उसने खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने की बात कही थी और इसके बाद उसने पुलिस के समक्ष सरेंडर भी कर दिया। पुलिस का दावा है कि सरेंडर करने के बाद भरत तिवारी ने दोबारा हथियार उठाकर फायरिंग करने की कोशिश की, जिसके जवाब में पुलिस ने कार्रवाई की और गोली लगने से उसकी मौत हो गई। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए तथ्य कई सवाल खड़े करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भरत तिवारी के शरीर पर पांच गोलियों के निशान मिले हैं, और सभी गोलियां शरीर के निचले हिस्से में लगी थीं:






- पहली गोली बाईं जांघ के ऊपरी हिस्से में सामने से लगी थी।
- दूसरी गोली बाईं जांघ के बीच वाले हिस्से के अंदर की ओर लगी।
- तीसरी गोली दाईं जांघ के बीच वाले हिस्से के अंदर की तरफ लगी।
- चौथी गोली दाईं जांघ के बाहरी हिस्से में मिली।
- वहीं पांचवीं गोली बाएं पैर के बीच वाले हिस्से में पीछे से लगी थी।
हाई कोर्ट ने मांगे डिजिटल सबूत, सरकार को 3 हफ्ते का अल्टीमेटम
भरत तिवारी की मां आशा देवी ने पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर कर एनकाउंटर को फर्जी बताया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरेंडर के बावजूद भरत भूषण को गोली मारी गई और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस हालांकि अभी भी आत्मरक्षा में गोली चलाने का दावा कर रही है। हाई कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार को निर्देश दिया है कि घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा समेत सभी डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखा जाए। कोर्ट ने सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त 2026 को होगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का परिवार से मिलना और हाई कोर्ट का कड़ा रुख, इस संवेदनशील मामले में पारदर्शिता और न्याय की उम्मीद जगाता है।










