Samastipur Mukhiya: बिहार सरकार ने स्थानीय निकायों में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। इसी कड़ी में समस्तीपुर जिले के खानपुर प्रखंड की श्रीपुर गाहर पश्चिमी पंचायत के मुखिया रमेश मांझी को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है। पंचायती राज विभाग ने उन्हें वित्तीय अनियमितता, सरकारी राशि के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों में दोषी पाया है। इस कार्रवाई के बाद रमेश मांझी अगले पांच वर्षों तक किसी भी पंचायत निकाय का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, जिससे स्थानीय राजनीति में हड़कंप मच गया है।
बिहार में भ्रष्टाचार पर बड़ा एक्शन! समस्तीपुर के मुखिया रमेश मांझी बर्खास्त, 5 साल तक नहीं लड़ पाएंगे चुनाव
Samastipur Mukhiya: बिहार के समस्तीपुर जिले में पंचायती राज विभाग ने भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई की है। खानपुर प्रखंड की श्रीपुर गाहर पश्चिमी पंचायत के मुखिया रमेश मांझी को तत्काल प्रभाव से पद से बर्खास्त कर दिया गया है। उन पर वित्तीय अनियमितता, सरकारी राशि के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप सही पाए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद वे अगले पांच वर्षों तक किसी भी पंचायत निकाय का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, जो स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश है।






जांच में कैसे सामने आई मुखिया की करतूत?
पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह बड़ी कार्रवाई बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 18(5) के तहत की गई है। दरभंगा प्रमंडल के लोक प्राधिकारी-सह-आयुक्त और समस्तीपुर जिला पंचायत राज पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट में समस्तीपुर मुखिया रमेश मांझी पर लगे आरोप पुख्ता तौर पर साबित हुए। इसमें पद के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितता और सरकारी योजनाओं में नियमों की अनदेखी के कई मामले शामिल हैं।
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि खानपुर प्रखंड की श्रीपुर गाहर पश्चिमी पंचायत में उमेश मांझी के घर से जामुन मांझी के घर तक बनने वाली सड़क निर्माण योजना को नियमों के विरुद्ध दो हिस्सों में बांट दिया गया। इतना ही नहीं, दोनों योजनाओं में मास्टर रोल पर आवश्यक हस्ताक्षर लिए बिना ही तीन-तीन लाख रुपये का अग्रिम भुगतान दिखा दिया गया, जो वित्तीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
इसके अलावा, वर्ष 2019-20 के दौरान वार्ड संख्या-3 में नलकूप योजना पर करीब छह लाख रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन यह योजना कभी चालू ही नहीं हो सकी। ग्रामीण आज भी पेयजल सुविधा से वंचित हैं, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया। अपशिष्ट कचरा प्रबंधन योजना में भी बड़ी धांधली हुई। ठेला, रिक्शा और डस्टबिन खरीदने के नाम पर करीब 11 लाख रुपये निकाले गए, लेकिन यह राशि संबंधित एजेंसी या विक्रेता के खाते में भेजने के बजाय सीधे मुखिया के निजी बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई। विभाग ने इसे एक गंभीर वित्तीय अनियमितता माना है।
आपराधिक मुकदमा और आगे की राह
रमेश मांझी के खिलाफ खानपुर थाना में पहले से ही गबन, धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज है। उस समय भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409, 419 और 420 के तहत मामला दर्ज किया गया था। विभागीय कार्रवाई के बाद अब इस आपराधिक मामले में कानूनी प्रक्रिया और तेज होने की संभावना है।
पद से बर्खास्त किए जाने के साथ ही रमेश मांझी को अगले पांच वर्षों तक किसी भी पंचायत निकाय के चुनाव में उम्मीदवार बनने से अयोग्य घोषित कर दिया गया है। पंचायती राज विभाग का यह कदम पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं में वित्तीय अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई मानी जा रही है। यह निर्णय सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक मजबूत संदेश देता है, ताकि भविष्य में ऐसी धांधलियां रोकी जा सकें।
मुखिया पर क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई?
पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह कार्रवाई बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 18(5) के तहत की गई है। दरभंगा प्रमंडल के लोक प्राधिकारी-सह-आयुक्त और समस्तीपुर जिला पंचायत राज पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट में मुखिया रमेश मांझी पर लगे आरोप पूरी तरह सही पाए गए। जांच में पद का दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितता और सरकारी योजनाओं में नियमों की अनदेखी जैसे गंभीर मामले सामने आए।
इन योजनाओं में सामने आई वित्तीय अनियमितता
जांच के दौरान कई योजनाओं में बड़े पैमाने पर धांधली उजागर हुई:
- सड़क निर्माण योजना: खानपुर प्रखंड में उमेश मांझी के घर से जामुन मांझी के घर तक बनने वाली सड़क निर्माण योजना को दो हिस्सों में बांटा गया। दोनों योजनाओं में मास्टर रोल पर बिना आवश्यक हस्ताक्षर लिए ही 3-3 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान दिखा दिया गया, जिसे वित्तीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना गया।
- नलकूप योजना: वार्ड संख्या-3 में वर्ष 2019-20 के दौरान नलकूप योजना पर करीब छह लाख रुपये खर्च किए गए, लेकिन यह योजना कभी चालू नहीं हो सकी। ग्रामीणों को पेयजल सुविधा का लाभ नहीं मिला, और जांच टीम ने इसे सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना है।
- कचरा प्रबंधन योजना: अपशिष्ट कचरा प्रबंधन योजना के तहत ठेला, रिक्शा और डस्टबिन खरीदने के नाम पर करीब 11 लाख रुपये निकाले गए। आरोप है कि यह राशि संबंधित एजेंसी या विक्रेता के खाते में भेजने के बजाय सीधे मुखिया रमेश मांझी के निजी बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई, जिसे विभाग ने गंभीर वित्तीय अनियमितता माना है।
पहले से दर्ज है आपराधिक मामला, कानूनी शिकंजा कसा
इन वित्तीय अनियमितताओं और पद के दुरुपयोग के आरोपों को लेकर खानपुर थाना में रमेश मांझी के खिलाफ पहले ही गबन, धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409, 419 और 420 के तहत मामला दर्ज हुआ था। विभागीय कार्रवाई के बाद अब इस मामले में कानूनी कार्रवाई और तेज होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे मुखिया की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
पंचायती राज विभाग का मानना है कि पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं में वित्तीय अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में यह हाल के वर्षों की बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई है। इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का संदेश भी गया है।
रमेश मांझी को पद से बर्खास्त किए जाने के साथ ही, उन्हें अगले पांच वर्षों तक किसी भी पंचायत निकाय के चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है। यह फैसला बिहार में सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।








