Darbhanga Kargil Vijay Diwas: दरभंगा जिले के जाले प्रखंड अंतर्गत रतनपुर गांव में रविवार को कारगिल विजय दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद ने इस अवसर पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया, जिसमें कारगिल युद्ध के वीर शहीदों के शौर्य और बलिदान को याद किया गया। भारत माता के जयकारों से पूरा सभा स्थल गूंज उठा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं अवकाश प्राप्त कैप्टन नवल किशोर ठाकुर ने की। मीडिया प्रभारी पूर्व सैनिक दिनेश ठाकुर ने इस गरिमामय आयोजन का संचालन किया। दरभंगा जिला सैनिक कल्याण पदाधिकारी कमांडर रामजी राय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।






कारगिल वीरों को नमन, शौर्यगाथा का बखान
सभा की शुरुआत कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इस अवसर पर कैप्टन नवल किशोर ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि कारगिल की वीरगाथा भारतीय इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है। उन्होंने बताया कि यह दिवस देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के शौर्य, साहस और समर्पण की याद दिलाता है। कैप्टन ठाकुर ने जोर देकर कहा कि यह आयोजन देश के दुश्मनों को भी एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर है।
‘कारगिल की वीरगाथा भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। यह दिवस देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के शौर्य और समर्पण की याद दिलाता है तथा देश के दुश्मनों को भी स्पष्ट संदेश देता है।’
बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक रहे उपस्थित
श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इनमें कैप्टन चंद्रशेखर सिंह, सूबेदार मेजर शंभू शरण चौबे, कैप्टन परमानंद चौधरी, महेंद्र साह, सार्जेंट सतीश कुमार, सैनिक बोर्ड के सूबेदार मेजर प्रवीण कुमार यादव, सूबेदार वीरेंद्र ठाकुर, नायक राम ठाकुर, नायक उपेंद्र ठाकुर, सूबेदार कैलाश महतो, रामस्नेही ठाकुर, रामबाबू ठाकुर, नायक आश नारायण ठाकुर, अर्जुन ठाकुर, राकेश ठाकुर, सूबेदार मेजर मनोज ठाकुर, संजीव कुमार ठाकुर, अवध किशोर ठाकुर, श्याम किशोर ठाकुर, नायब सूबेदार रामदयाल ठाकुर और नायक लक्ष्मी ठाकुर प्रमुख रूप से शामिल थे। सभी ने मिलकर कारगिल विजय और शहीदों के सम्मान में जयघोष किया।
इस आयोजन ने क्षेत्र में देशभक्ति का संचार किया और नई पीढ़ी को देश के लिए बलिदान की प्रेरणा दी। पूर्व सैनिकों ने एक बार फिर साबित किया कि वे हमेशा राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित हैं, चाहे वे सक्रिय सेवा में हों या अवकाश प्राप्त कर चुके हों।








