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तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी पर वकील का सनसनीखेज दावा: क्या पहले अरेस्ट हुए, फिर दर्ज हुई FIR? | ‘क्या जेल में सुरक्षित नहीं हैं तेजप्रताप!’

Tej Pratap Yadav: JJD नेता तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी के बाद अब कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। उनकी वकील निशा सिंह ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि पहले गिरफ्तारी हुई और फिर FIR दर्ज की गई, जो कानून के खिलाफ है।

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देशज टाइम्स | Highlights -

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Tej Pratap Yadav: जन जन अधिकार पार्टी (JJD) के नेता तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी के बाद अब यह मामला कानूनी मोर्चे पर पहुंच गया है। उनकी वकील निशा सिंह ने बताया है कि तेज प्रताप यादव के लिए जमानत की अर्जी दाखिल की जा रही है। वकील ने गिरफ्तारी और एफआईआर (FIR) दर्ज करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिससे पुलिस की कार्रवाई पर संदेह पैदा हो गया है।

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तेज प्रताप यादव को जेल में रखना खतरनाक! वकील का बड़ा दावा- ‘बिना FIR ही गिरफ्तार किया गया’

Bihar Tej Pratap Yadav: जनशक्ति जनता दल के सुप्रीमो बिहार में इन दिनों जेल में बंद हैं। सोमवार को उनकी जमानत याचिका पर एसडीजेएम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान तेज प्रताप यादव की वकील निशा सिंह ने अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखा। वकील ने पुलिस की पूरी कार्रवाई पर ही गंभीर सवाल उठाए। इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट से अपील की कि तेज प्रताप यादव को डॉक्टरों की सख्त निगरानी में रखा जाए।

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तेज प्रताप यादव को जेल में रखना खतरनाक! वकील का बड़ा दावा- ‘बिना FIR ही गिरफ्तार किया गया’

Bihar Tej Pratap Yadav: जनशक्ति जनता दल के सुप्रीमो बिहार में इन दिनों जेल में बंद हैं। सोमवार को उनकी जमानत याचिका पर एसडीजेएम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान तेज प्रताप यादव की वकील निशा सिंह ने अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखा। वकील ने पुलिस की पूरी कार्रवाई पर ही गंभीर सवाल उठाए। इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट से अपील की कि तेज प्रताप यादव को डॉक्टरों की सख्त निगरानी में रखा जाए।

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‘बिना FIR गिरफ्तारी, जेल में रखना सुरक्षित नहीं’

वकील निशा सिंह ने कोर्ट में कहा कि तेज प्रताप यादव की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें जेल में रखना बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। उन्होंने आग्रह किया कि उन्हें तत्काल मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा जाए। वकील ने बताया कि तेज प्रताप यादव पहले से ही शुगर और ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। गांधी मैदान थाना कांड से जुड़े एक मामले में एसडीजेएम कोर्ट में यह जमानत याचिका दायर की गई है।

‘राजनीतिक उद्देश्य से हुई कार्रवाई’, वकील का गंभीर आरोप

निशा सिंह ने पुलिस की कार्रवाई को पूरी तरह से राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने जानबूझकर शनिवार को तेज प्रताप यादव को हिरासत में लिया, ताकि अगले दिन रविवार होने के कारण उन्हें तुरंत कोई कानूनी राहत न मिल सके। वकील का दावा है कि गिरफ्तारी के वक्त तक एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई थी, जो कानून की प्रक्रिया का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने इसे पुलिस की घोर लापरवाही करार देते हुए कहा कि बिना एफआईआर दर्ज किए किसी को गिरफ्तार करना कानून के शासन पर सवाल खड़े करता है।

वकील निशा सिंह ने कहा, ‘तेज प्रताप यादव की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें जेल में रखना सुरक्षित नहीं है। इस संबंध में मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखने का अनुरोध किया गया है। तेज प्रताप यादव पहले से ही शुगर और ब्लड प्रेशर जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।’

‘दंगा भड़काने’ की धारा पर भी वकील को आपत्ति

वकील निशा सिंह ने कोर्ट को बताया कि गिरफ्तारी के बाद तेज प्रताप यादव को पहले दीघा थाना, फिर दानापुर और उसके बाद नौबतपुर थाना ले जाया गया। उन्होंने पुलिस द्वारा तेज प्रताप यादव पर ‘दंगा भड़काने’ जैसी धाराएं लगाए जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। निशा सिंह ने तर्क दिया कि तेज प्रताप यादव ने न तो कोई भड़काऊ बयान दिया और न ही किसी को उकसाया। उनके अनुसार, वह सिर्फ अपनी गाड़ी से उस जगह से गुजर रहे थे। छात्रों के अनुरोध पर वे कुछ देर के लिए गाड़ी से उतरे, राष्ट्रीय ध्वज लहराया और फिर वहां से चले गए।

‘बिना FIR गिरफ्तारी, जेल में रखना सुरक्षित नहीं’

वकील निशा सिंह ने कोर्ट में कहा कि तेज प्रताप यादव की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें जेल में रखना बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। उन्होंने आग्रह किया कि उन्हें तत्काल मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा जाए। वकील ने बताया कि तेज प्रताप यादव पहले से ही शुगर और ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। गांधी मैदान थाना कांड से जुड़े एक मामले में एसडीजेएम कोर्ट में यह जमानत याचिका दायर की गई है।

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‘राजनीतिक उद्देश्य से हुई कार्रवाई’, वकील का गंभीर आरोप

निशा सिंह ने पुलिस की कार्रवाई को पूरी तरह से राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने जानबूझकर शनिवार को तेज प्रताप यादव को हिरासत में लिया, ताकि अगले दिन रविवार होने के कारण उन्हें तुरंत कोई कानूनी राहत न मिल सके। वकील का दावा है कि गिरफ्तारी के वक्त तक एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई थी, जो कानून की प्रक्रिया का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने इसे पुलिस की घोर लापरवाही करार देते हुए कहा कि बिना एफआईआर दर्ज किए किसी को गिरफ्तार करना कानून के शासन पर सवाल खड़े करता है।

वकील निशा सिंह ने कहा, ‘तेज प्रताप यादव की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें जेल में रखना सुरक्षित नहीं है। इस संबंध में मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखने का अनुरोध किया गया है। तेज प्रताप यादव पहले से ही शुगर और ब्लड प्रेशर जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।’

‘दंगा भड़काने’ की धारा पर भी वकील को आपत्ति

वकील निशा सिंह ने कोर्ट को बताया कि गिरफ्तारी के बाद तेज प्रताप यादव को पहले दीघा थाना, फिर दानापुर और उसके बाद नौबतपुर थाना ले जाया गया। उन्होंने पुलिस द्वारा तेज प्रताप यादव पर ‘दंगा भड़काने’ जैसी धाराएं लगाए जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। निशा सिंह ने तर्क दिया कि तेज प्रताप यादव ने न तो कोई भड़काऊ बयान दिया और न ही किसी को उकसाया। उनके अनुसार, वह सिर्फ अपनी गाड़ी से उस जगह से गुजर रहे थे। छात्रों के अनुरोध पर वे कुछ देर के लिए गाड़ी से उतरे, राष्ट्रीय ध्वज लहराया और फिर वहां से चले गए।

पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

वकील निशा सिंह के अनुसार, तेज प्रताप यादव पर कई धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें सबसे गंभीर आरोप धारा 109 का है, जिसे हत्या की कोशिश से जुड़ा बताया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि एफआईआर दर्ज होने के समय चोट की कोई रिपोर्ट मौजूद नहीं थी, और गिरफ्तारी एफआईआर से पहले ही कर ली गई थी। तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी को लेकर सबसे बड़ा विवाद पुलिस कार्रवाई की टाइमलाइन पर है। निशा सिंह ने स्पष्ट रूप से दावा किया कि पहले गिरफ्तारी हुई और उसके बाद एफआईआर दर्ज की गई, जो कानूनी नियमों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि एफआईआर जल्दबाजी में दर्ज की गई थी और गिरफ्तारी की वैधता पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति को एफआईआर दर्ज होने से पहले हिरासत में लेना कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से गंभीर उल्लंघन है।

तेज प्रताप यादव की वकील निशा सिंह ने कहा, “पहले गिरफ्तारी हुई और उसके बाद एफआईआर दर्ज की गई। यह पूरी प्रक्रिया कानूनी नियमों के अनुरूप नहीं है। एफआईआर जल्दबाजी में दर्ज की गई।”

धारा 109 पर भी विवाद

इस मामले में धारा 109 के प्रयोग को लेकर भी विवाद गहरा रहा है। वकील के मुताबिक, तेज प्रताप यादव पर लगाई गई धाराओं में यह सबसे गंभीर है। उन्होंने यह भी बताया कि एफआईआर दर्ज करते समय चोट से जुड़ी कोई मेडिकल रिपोर्ट मौजूद नहीं थी, जिससे इस धारा के तहत लगाए गए आरोपों की प्रमाणिकता पर सवाल उठते हैं। अब तेज प्रताप यादव की जमानत याचिका पर आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। बचाव पक्ष गिरफ्तारी की प्रक्रिया और एफआईआर के समय को अदालत के सामने प्रमुख आधार के तौर पर पेश कर सकता है।

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तेज प्रताप यादव की सेहत पर चिंता

तेज प्रताप यादव की मेडिकल स्थिति को लेकर भी उनकी वकील ने जानकारी दी। निशा सिंह के अनुसार, उनकी तबीयत ठीक नहीं है। उन्होंने बताया कि तेज प्रताप यादव हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। वकील ने कहा कि उनकी सेहत से जुड़ी चिंताओं को लेकर याचिका दायर की गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें उचित इलाज और मेडिकल निगरानी मिले।

पूरे मामले में तीन अहम मुद्दे

इस पूरे मामले में अब तीन मुद्दे सबसे अहम बन गए हैं। पहला, गिरफ्तारी किस समय हुई। दूसरा, एफआईआर कब दर्ज की गई। तीसरा, गंभीर धाराएं लगाने के लिए उपलब्ध मेडिकल और अन्य साक्ष्य क्या थे। पटना में तेज प्रताप यादव की वकील ने इन सभी बिंदुओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी से पहले एफआईआर दर्ज होना जरूरी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। यदि पहले हिरासत में लिया गया और बाद में एफआईआर दर्ज हुई, तो इस प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठना स्वाभाविक है, और अदालत में इस पर गहन सुनवाई हो सकती है।

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