Bihar Police Action: बिहार में छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई और AK-47 से गोलीबारी का मामला अब बिहार से निकलकर देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच गया है। राज्यसभा सांसद मनोज झा ने इस पूरे प्रकरण में पुलिस की ज्यादती की जांच की मांग करते हुए सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की भी जोरदार मांग की है।
मनोज झा ने सुप्रीम कोर्ट से की ये अहम मांगें
मनोज झा की ओर से वकील फौजिया शकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया। दायर की गई याचिका में 20 जुलाई से देश भर में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा की गई ज्यादती की विस्तृत जानकारी दी गई है। विशेष रूप से, सीवान जिले में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए एके-47 से की गई फायरिंग का भी जिक्र किया गया, जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे।






याचिका में दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज करने, हर राज्य में मामले की एसआईटी जांच कराने, दोषी पुलिसकर्मियों पर आपराधिक और विभागीय कार्रवाई करने, घायल प्रदर्शनकारियों को उचित मुआवजा देने के साथ-साथ उनके उपचार का खर्च उठाने और देशभर में पुलिस कार्रवाई के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने की मांग की गई है।
बिहार में 400 से अधिक प्रदर्शनकारी जेल भेजे गए
राज्यसभा सांसद मनोज झा की इस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना है। बिहार में 22 और 25 जुलाई को हुए प्रदर्शनों के बाद से अब तक 400 से भी ज्यादा प्रदर्शनकारियों को जेल भेजा जा चुका है। राजधानी पटना में रविवार को आधी रात की गई कार्रवाई में 87 प्रदर्शनकारियों को बेऊर जेल भेज दिया गया था। इस घटनाक्रम ने विपक्ष को सरकार पर हमलावर होने का एक और मौका दे दिया है।
इस बीच, सीवान जिले में जिस जवान ने एके-47 से फायरिंग की थी, उसे निलंबित किए जाने की खबर भी सामने आई है। पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है और सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के इस मामले में हस्तक्षेप से प्रदर्शनकारियों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।








