Bihar Waqf Property: केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि बिहार में कुल 574 वक्फ संपत्तियां अवैध कब्जे का शिकार हैं। यह जानकारी केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में दी। उन्होंने बताया कि इन धार्मिक बंदोबस्ती संपत्तियों की सुरक्षा और वापसी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अतिक्रमण की समस्या अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
वक्फ संपत्तियों पर कब्जे का पूरा आंकड़ा
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 21 जुलाई 2026 तक बिहार राज्य शिया वक्फ बोर्ड की 63 संपत्तियां और बिहार राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड की 511 संपत्तियां अतिक्रमण की चपेट में हैं। यह जानकारी राज्यसभा सांसद डॉ. भीम सिंह द्वारा उठाए गए प्रश्न के जवाब में दी गई। सरकार ने बताया कि संबंधित वक्फ बोर्ड इन अवैध कब्जों को हटाने के लिए वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 54 के तहत कार्रवाई कर रहे हैं, जो अतिक्रमण हटाने का प्रावधान करती है।






वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण और प्रबंधन
रिजिजू ने सदन को यह भी बताया कि वक्फ संपत्तियों के बेहतर रिकॉर्ड प्रबंधन और डिजिटलीकरण के लिए उन्हें ‘उम्मीद’ पोर्टल पर पंजीकृत किया जा रहा है। यह प्रक्रिया बिहार सहित अन्य राज्यों में भी चल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन राज्यों के वक्फ बोर्डों ने वैध कारणों से अतिरिक्त समय मांगा था, उन्हें कानूनी प्रावधानों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के लिए समय-सीमा में विस्तार दिया गया है। यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
वक्फ बोर्डों पर है बड़ी जिम्मेदारी
डॉ. भीम सिंह ने अपने प्रश्न के माध्यम से सरकार से वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन, पारदर्शी डिजिटलीकरण और अवैध कब्जे से सुरक्षा को मजबूत करने का आग्रह किया था। मंत्री ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की जिम्मेदारी संबंधित वक्फ बोर्डों की है। ये बोर्ड प्रभावित संपत्तियों को वापस हासिल करने के लिए वक्फ अधिनियम के प्रावधानों के तहत आगे बढ़ रहे हैं।
यह आंकड़ा बिहार में वक्फ संपत्तियों के संरक्षण और उनके उचित उपयोग को सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार और वक्फ बोर्डों के सामने खड़ी चुनौतियों को दर्शाता है। उम्मीद है कि डिजिटलीकरण और कानूनी कार्रवाई के माध्यम से इन संपत्तियों को अतिक्रमण मुक्त कर उनके मूल उद्देश्य के लिए उपयोग किया जा सकेगा, जिससे धार्मिक और सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति हो सके।








