Parliament Monsoon Session: लगातार एक सप्ताह से हंगामे और ठप पड़े कामकाज के बाद आखिरकार संसद का मानसून सत्र फिर से सामान्य होने की राह पर आ गया है। नीट पेपर लीक मामले और दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज को लेकर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच चल रहा गतिरोध अब टूट गया है। सभी प्रमुख राजनीतिक दल ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026’ पर चर्चा के लिए सहमत हो गए हैं, जिससे विधायी कामकाज दोबारा गति पकड़ेगा।
संसद में गतिरोध की पृष्ठभूमि और विरोध का कारण
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ था, लेकिन नीट-यूजी पेपर लीक और उसके बाद दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई (लाठीचार्ज) को लेकर सदन में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दल लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की मांग पर अड़े हुए थे। इसके परिणामस्वरूप, लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही कई दिनों तक बार-बार स्थगित होती रही और कोई भी महत्वपूर्ण विधायी कार्य नहीं हो पाया था।






लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल से निकला समाधान
इस बीच, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लगातार सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि यह मुद्दा देश के करोड़ों छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने जोर दिया कि इस गंभीर विषय पर राजनीति के बजाय गंभीर और सार्थक चर्चा होनी चाहिए। अध्यक्ष की इस सक्रिय पहल और प्रमुख राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं के साथ हुई बातचीत का सकारात्मक परिणाम सामने आया। सोमवार को सरकार ने हंगामे के बीच ही यह विधेयक लोकसभा में पेश कर दिया था, जिसके बाद शाम तक सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इस पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार हो गए।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सभी दल मंगलवार (28 जुलाई) से इस महत्वपूर्ण विधेयक पर विस्तृत चर्चा शुरू करने पर सहमत हो गए हैं। इस सहमति के बाद संसद का रुका हुआ विधायी कामकाज एक बार फिर से गति पकड़ने की संभावना बढ़ गई है, जिससे देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस और कानून बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।








