Bihar Sugar Mill: बिहार के गन्ना उद्योग में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। राज्य सरकार ने बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने और नई इकाइयां स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसी कड़ी में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 20 नवंबर को मधुबनी जिले की सकरी और दरभंगा जिले की रैयाम चीनी मिलों की आधारशिला रखेंगे। गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने यह जानकारी देते हुए बताया कि अगले पांच वर्षों के भीतर राज्य में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है, जिससे गन्ना किसानों और युवाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर खुलेंगे।
PM मोदी का बिहार को सबसे बड़ा तोहफा! 20 नवंबर को 2 मिलों की आधारशिला, 5 साल में 25 नई Sugar Mills
Bihar Sugar Mills: बिहार के गन्ना उद्योग को नया जीवन देने और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 नवंबर को मधुबनी के सकरी और दरभंगा की रैयाम चीनी मिलों की आधारशिला रखेंगे। राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। यह पहल बिहार के औद्योगिक विकास को गति देगी और गन्ना किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी।






20 नवंबर को दो मिलों की आधारशिला
गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने बुधवार को सूचना भवन के सभाकक्ष में आयोजित एक प्रेसवार्ता में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मधुबनी जिले की सकरी और दरभंगा जिले की रैयाम चीनी मिल की आधारशिला 20 नवंबर को रखेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन दोनों चीनी मिलों का संचालन सहकारिता विभाग के माध्यम से किया जाएगा, जिसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही हैं। यह कदम बंद पड़ी बिहार की चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
‘सशक्त उद्योग, सशक्त बिहार’: 25 नई चीनी मिलों का लक्ष्य
मंत्री संजय कुमार ने कहा कि बिहार सरकार की ‘सात निश्चय-3’ योजना के तहत ‘सशक्त उद्योग, सशक्त बिहार’ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत राज्य में बंद पड़ी सभी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने के साथ ही, अगले पांच वर्षों में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहल से राज्य के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
राज्य सरकार ने ‘बिहार गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति-2026’ को भी मंजूरी दी है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य गन्ना आधारित उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देना और गन्ना क्षेत्र का विस्तार करना है। मंत्री ने बताया कि नई नीति लागू होने के बाद गन्ना उद्योग में निवेशकों की रुचि बढ़ी है और कई नए निवेश प्रस्ताव सामने आ रहे हैं।
गन्ना किसानों को प्रोत्साहन और बकाया भुगतान
गन्ना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। गन्ना उद्योग मंत्री ने बताया कि किसानों को 45 प्रकार के आधुनिक कृषि यंत्र अनुदानित दर पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे गन्ने की खेती अधिक आसान और लाभकारी बन सके। सरकार का लक्ष्य गन्ना उत्पादन बढ़ाकर चीनी मिलों को पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध कराना है।
गन्ना उद्योग विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने किसानों के हित में शुरू की गई कई योजनाओं की जानकारी दी:
- मुख्यमंत्री गन्ना बीज विकास योजना
- गन्ना यंत्रीकरण योजना
- गन्ना नर्सरी योजना
- नई चीनी मिल क्षेत्रों में गन्ना विस्तार अभियान
विभाग ने राष्ट्रीय स्तर के तीन संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी किया है, जो गन्ना उद्योग के आधुनिकीकरण में सहायक होगा।
धर्मेंद्र सिंह ने बताया, “गोपालगंज जिले की सासामुसा चीनी मिल को दोबारा चालू करने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। पूर्ववर्ती पेराई सत्रों के बकाया भुगतान के लिए 43 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। मिल शुरू होने और एक पेराई सत्र पूरा होने के बाद किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाएगा।”
सचिव ने यह भी बताया कि सारण जिले की मढ़ौरा चीनी मिल से जुड़ा विवाद सुलझाने का प्रयास चल रहा है, जबकि सारण के अन्य क्षेत्रों में नई चीनी मिलों के लिए सरकारी जमीन का चयन किया जा रहा है। मोतीपुर की बंद चीनी मिल की 266 एकड़ जमीन वापस लेने की स्वीकृति भी सरकार दे चुकी है।
चीनी मिलें बनेंगी शुगर कॉम्प्लेक्स
धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि राज्य में चीनी उद्योग को आधुनिक स्वरूप देने के लिए चीनी मिलों को ‘शुगर कॉम्प्लेक्स’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन कॉम्प्लेक्स में चीनी के साथ-साथ इथेनॉल, बिजली और बायोगैस का भी उत्पादन किया जाएगा। इससे उद्योग की आय में वृद्धि होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। पेराई सत्र 2025-26 में राज्य की चीनी मिलों ने गन्ना किसानों को 2,137.83 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है। राज्य के गन्ना किसानों का सर्वे भी लगातार कराया जा रहा है। इस वर्ष गन्ने की रिकवरी दर 10.3 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। विभाग की योजनाओं से आने वाले समय में गन्ना उत्पादन, उत्पादकता और खेती के रकबे में और वृद्धि होने की संभावना है। प्रेसवार्ता में ईख आयुक्त अनिल कुमार झा और संयुक्त ईख आयुक्त वेदव्रत सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
प्रधानमंत्री करेंगे दो बड़ी चीनी मिलों का शिलान्यास
गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने सूचना भवन के सभाकक्ष में आयोजित एक प्रेसवार्ता में बताया कि मधुबनी की सकरी और दरभंगा की रैयाम चीनी मिल का शिलान्यास 20 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन दोनों चीनी मिलों का संचालन सहकारिता विभाग के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही हैं। यह पहल राज्य में गन्ना उत्पादन को बढ़ावा देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
‘सशक्त उद्योग, सशक्त बिहार’: 25 नई चीनी मिलों का लक्ष्य
मंत्री संजय कुमार ने ‘सशक्त उद्योग, सशक्त बिहार’ अभियान का जिक्र किया, जो बिहार सरकार की सात निश्चय-3 योजना का हिस्सा है। इस अभियान के तहत राज्य की सभी बंद चीनी मिलों को पुनः चालू करने के साथ-साथ, अगले पांच वर्षों में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पहल से राज्य के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और पलायन रुकेगा। राज्य सरकार ने बिहार गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 को भी मंजूरी दी है, जिससे गन्ना आधारित उद्योगों की स्थापना और गन्ना क्षेत्र का विस्तार हो सके। इस नई नीति के बाद निवेशकों की रुचि बढ़ी है और उद्योग में निवेश के नए प्रस्ताव लगातार मिल रहे हैं।
किसानों को प्रोत्साहन, बकाया भुगतान और शुगर कॉम्प्लेक्स का विकास
राज्य सरकार गन्ना किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठा रही है। मंत्री संजय कुमार ने बताया कि किसानों को 45 प्रकार के आधुनिक कृषि यंत्र अनुदानित दर पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे गन्ने की खेती आसान और अधिक लाभकारी बन सके। सरकार का मुख्य उद्देश्य गन्ना उत्पादन बढ़ाकर चीनी मिलों को पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल सुनिश्चित करना है।
गन्ना उद्योग विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने किसानों के हित में शुरू की गई विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। इनमें मुख्यमंत्री गन्ना बीज विकास योजना, गन्ना यंत्रीकरण योजना, गन्ना नर्सरी योजना और नई चीनी मिल क्षेत्रों में गन्ना विस्तार अभियान शामिल हैं। विभाग ने राष्ट्रीय स्तर के तीन संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी किया है, ताकि तकनीकी सहयोग मिल सके।
सचिव ने बताया कि राज्य में चीनी उद्योग को आधुनिक स्वरूप देने के लिए मिलों को ‘शुगर कॉम्प्लेक्स’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन कॉम्प्लेक्स में चीनी के साथ-साथ इथेनॉल, बिजली और बायोगैस का भी उत्पादन होगा, जिससे उद्योग की आय में वृद्धि होगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
बंद मिलों के लिए भी सरकार गंभीर
गोपालगंज जिले की सासामुसा चीनी मिल को दोबारा चालू करने की दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने इस क्षेत्र के गन्ना किसानों के पूर्ववर्ती पेराई सत्रों के बकाया भुगतान के लिए 43 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। मिल शुरू होने और एक पेराई सत्र पूरा होने के बाद किसानों को उनके बकाये का भुगतान कर दिया जाएगा।
इसके अलावा, सारण जिले की मढ़ौरा चीनी मिल से जुड़े विवाद को जल्द सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि इसका संचालन फिर से शुरू हो सके। सारण के अन्य क्षेत्रों में नई चीनी मिल स्थापित करने के लिए सरकारी जमीन की पहचान की जा रही है। मोतीपुर की बंद चीनी मिल की 266 एकड़ जमीन वापस लेने की स्वीकृति भी सरकार दे चुकी है।
धर्मेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि पेराई सत्र 2025-26 में राज्य की चीनी मिलों ने गन्ना किसानों को 2,137.83 करोड़ रुपये का शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है। राज्य के गन्ना किसानों का सर्वे भी कराया जा रहा है। इस वर्ष गन्ने की रिकवरी दर 10.3 प्रतिशत रही है, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर और राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है। विभाग की इन योजनाओं से आने वाले समय में गन्ना उत्पादन, उत्पादकता और खेती के रकबे में और बढ़ोतरी होगी। प्रेसवार्ता के दौरान ईख आयुक्त अनिल कुमार झा और संयुक्त ईख आयुक्त वेदव्रत सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।








