Darbhanga News: बिहार के दरभंगा में 17 साल पुराने चेक बाउंस मामले में आखिरकार न्याय मिल गया है। सिविलकोर्ट दरभंगा के प्रथम श्रेणी न्यायिक दण्डाधिकारी शलभ शर्मा की अदालत ने इस बहुचर्चित मामले में अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी हरि नारायण साह को एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही बाउंस हुए चेक की दोगुनी रकम 6 लाख 50 हजार रुपये एक माह के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया है।
यह निर्णय उस समय आया है जब पीड़ित भोला प्रसाद महतो 2009 से न्याय की उम्मीद लगाए हुए थे। इस फैसले से न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ है।






क्या था 17 साल पुराना चेक बाउंस का मामला?
यह मामला 17 साल पहले 2009 में दर्ज किया गया था। केवटी थानाक्षेत्र के छतवन गांव निवासी भोला प्रसाद महतो ने नगर थानाक्षेत्र के शिवाजी नगर सौदागर मुहल्ला निवासी हरि नारायण साह के खिलाफ यह नालिशी दायर की थी। भोला प्रसाद महतो ने अपने अधिवक्ता अमरनाथ झा के माध्यम से सीजेएम कोर्ट में 3 लाख 25 हजार रुपये के चेक के बाउंस होने का आरोप लगाया था। इस मामले में लगातार सुनवाई चल रही थी।
अदालत का ऐतिहासिक फैसला और पीड़ित की प्रतिक्रिया
लंबे इंतजार के बाद, प्रथम श्रेणी न्यायिक दण्डाधिकारी शलभ शर्मा की अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया। अदालत ने हरि नारायण साह को दोषी मानते हुए उन्हें एक साल की जेल और चेक की दोगुनी राशि यानी 6 लाख 50 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। यह राशि एक महीने के भीतर जमा करनी होगी।
परिवादी भोला प्रसाद महतो के अधिवक्ता अमरनाथ झा ने इस फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, ‘आज उन्हें अदालत से न्याय मिला।’ यह बयान 17 साल की कानूनी लड़ाई के बाद मिली राहत को दर्शाता है। यह फैसला उन लोगों के लिए एक मिसाल है जो न्यायिक प्रक्रिया में देरी के बावजूद न्याय की उम्मीद नहीं छोड़ते।
इस फैसले से न केवल पीड़ित भोला प्रसाद महतो को न्याय मिला है, बल्कि यह भी संदेश गया है कि देर से ही सही, न्याय अवश्य मिलता है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि चेक बाउंस जैसे वित्तीय अपराधों में दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।








