Bihar Guru Purnima: रतनपुर स्थित जाले की श्री चैतन्य कुटी में आयोजित होने वाला गुरु पूर्णिमा महोत्सव, मिथिलांचल की एक गौरवशाली परंपरा है। यह आयोजन हर साल हजारों वैष्णव श्रद्धालुओं को बिहार के साथ-साथ नेपाल, वृंदावन और अयोध्या जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों से अपनी ओर आकर्षित करता है, जो इसकी व्यापक धार्मिक महत्ता को दर्शाता है।







इस तीन दिवसीय महोत्सव की शुरुआत संत गोलोकवासी श्याम सुंदर दास जी महाराज के मार्गदर्शन में वर्ष 1967 में हुई थी। शुरुआती दौर में नेपाल और मिथिला के विभिन्न इलाकों से उनके शिष्य ही इसमें शामिल होते थे, लेकिन समय के साथ इसका विस्तार होता चला गया।
हजारों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र
आज यह महोत्सव मिथिला के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है। यातायात सुविधाओं में सुधार के बाद अब गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह से ही बड़ी संख्या में भक्त निजी और भाड़े के वाहनों से कुटी पहुंचने लगते हैं।

महोत्सव का शुभारंभ अधिवास उत्सव के साथ होता है, जिसमें संत और भजन-कीर्तन मंडल अपनी सहभागिता निभाते हैं। इसके तुरंत बाद 24 घंटे का अखंड हरिनाम संकीर्तन शुरू हो जाता है। दो दिनों तक चलने वाले हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन और रात्रि महाआरती श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने रहते हैं।
गुरुवाणी और सामूहिक भंडारे की दिव्य परंपरा
महोत्सव के अंतिम दिन, श्री चैतन्य कुटी के संरक्षक और संत गोलोकवासी श्याम सुंदर दास जी महाराज के शिष्य जगद्गुरु राधा वल्लभ दास जी महाराज श्रद्धालुओं को संबोधित करते हैं। इस दौरान पूरा परिसर ‘सद्गुरुदेव भगवान की जय’ और ‘जय-जय श्री राधे’ के जयघोष से गूंज उठता है, जिससे वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
इस त्रिदिवसीय महोत्सव का समापन विशाल सामूहिक भंडारे और प्रसाद वितरण के साथ होता है, जहाँ सभी श्रद्धालु एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करता है।
गुरु पूर्णिमा पर जाले के आश्रमों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, पूजा-अर्चना व भंडारे का आयोजन
फल्हारी बाबा, मौनी बाबा, गौतमाश्रम व जोगियारा की कल्याण कुटी में दिनभर चला गुरु पूजन, संतों का सम्मान और महाभंडारा
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार को जाले प्रखंड के विभिन्न आश्रमों, मठों और मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. भ्रमरपुरा स्थित फल्हारी बाबा आश्रम, मुरैठा के मौनी बाबा आश्रम, ब्रह्मपुर के गौतमाश्रम तथा जोगियारा स्थित प्राचीन कल्याण कुटी (राम-जानकी मंदिर) समेत अन्य धार्मिक स्थलों पर सुबह से ही गुरु दर्शन, पूजा-अर्चना और आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
श्रद्धालु पैदल, ट्रेन, बाइक, टेंपो सहित विभिन्न साधनों से आश्रमों में पहुंचे
पिछले दो दिनों से इन धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं का लगातार आगमन हो रहा है. सभी प्रमुख आश्रमों में भंडारे का आयोजन किया गया, जहां श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण हुआ. श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से गुरु पूजन कर गुरु दक्षिणा अर्पित की और आशीर्वाद प्राप्त किया।
कुटी के पुजारी राम इकबाल सिंह का चरण वंदन
जोगियारा स्थित कल्याण कुटी (राम-जानकी मंदिर) में भी गुरु पूर्णिमा श्रद्धा और उल्लास के साथ मनायी गयी. इस अवसर पर कुटी के पुजारी राम इकबाल सिंह का उनके शिष्यों ने चरण वंदन कर सम्मान किया. वहीं कुटी के सेवायत सह न्यास समिति के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष श्याम कुमार सिंह को संत शंभू साह, गंगा सिंह एवं अन्य संतों ने रामनामा गमछा, पाग और चंदन भेंट कर सम्मानित किया।
पूरे दिन भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहा.
इसके बाद साधु-संतों, जरूरतमंदों और कुटी से जुड़े लोगों के लिए महाभंडारे का आयोजन किया गया, जो देर शाम तक चलता रहा. श्रद्धालुओं ने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि बदलते समय और तकनीक के दौर में भी गुरु के प्रति श्रद्धा और समर्पण की परंपरा पूरी आस्था के साथ कायम है. दिनभर सभी आश्रमों में भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक माहौल बना रहा.









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