Bihar Sugar Mill: मुजफ्फरपुर की मोतीपुर चीनी मिल को दोबारा चालू करने की दिशा में बिहार सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। 29 साल से बंद पड़ी इस मिल की 266 एकड़ लीज की जमीन वापस लेने का आदेश जारी कर दिया गया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब यहां नई चीनी मिल, गन्ना अनुसंधान संस्थान और दूसरी औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने का रास्ता साफ हो गया है। इससे स्थानीय गन्ना किसानों और युवाओं को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
बिहार सरकार ने मिल की 266 एकड़ लीज की जमीन वापस लेने का आदेश जारी किया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब यहां नई चीनी मिल, गन्ना अनुसंधान संस्थान और दूसरी औद्योगिक इकाइयां लगाने का रास्ता साफ हो गया है।
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63 करोड़ रुपये देकर सरकार ने वापस ली जमीन
राज्य सरकार ने जानकारी दी कि पहले के निवेशक आईपीएल के साथ हुआ समझौता खत्म हो चुका है। अदालत के आदेश के बाद बिहार सरकार ने 63.39 करोड़ रुपये का भुगतान कर 266 एकड़ जमीन अपने अधिकार में ले ली है। इस महत्वपूर्ण कदम के बाद अब इस जमीन पर नए निवेश की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी, जिससे क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
1997 में बंद हुई थी मोतीपुर चीनी मिल
मोतीपुर चीनी मिल कभी उत्तर बिहार की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों में गिनी जाती थी। वर्ष 1997 में इस मिल के बंद होने से हजारों लोगों का रोजगार छिन गया था। गन्ना किसानों को अपनी फसल बेचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय बाजार, छोटे कारोबारी और परिवहन से जुड़े लोगों पर भी इसका गंभीर नकारात्मक असर पड़ा था। अब इसके दोबारा चालू होने से उन पुराने दिनों की रौनक लौटने की उम्मीद है।
किसानों और युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर
नई Bihar Sugar Mill के शुरू होने से मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों के गन्ना किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए एक स्थानीय बाजार मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। इसके साथ ही, नई औद्योगिक इकाइयों के स्थापित होने से स्थानीय युवाओं के लिए बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। यह क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
आधुनिक गन्ना अनुसंधान संस्थान भी होगा स्थापित
सरकार ने इसी 266 एकड़ जमीन पर एक आधुनिक गन्ना अनुसंधान संस्थान खोलने का भी महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इस संस्थान में गन्ने की नई किस्मों, उत्पादन बढ़ाने की तकनीक और खेती से जुड़े नए शोध किए जाएंगे। इससे किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों की जानकारी मिलेगी और गन्ना उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी, जो अंततः उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा।














