Bihar Drug Menace: अररिया जिले के फारबिसगंज महाविद्यालय में रविवार को ‘नशा मुक्त युवा विकसित भारत अभियान’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का सीधा प्रसारण भी दिखाया गया। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने इस अभियान में भाग लिया। कार्यक्रम के समापन के बाद उन्होंने कहा कि सिंथेटिक ड्रग्स, जिसे ‘सूखा नशा’ भी कहा जाता है, का नेटवर्क देश के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। उन्होंने इस बढ़ते बिहार ड्रग मेनेस को रोकने के लिए समाज और सरकार की संयुक्त भूमिका को आवश्यक बताया।
‘सूखे नशे’ का बढ़ता नेटवर्क और विदेशी साजिश
मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने पत्रकारों से बात करते हुए दावा किया कि विदेशी ताकतें भारत में सूखे नशे यानी सिंथेटिक ड्रग्स का कारोबार बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रही हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका मानना था कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं और सरकार भी नशे के कारोबार पर सख्ती बरत रही है। डॉ. जायसवाल ने स्पष्ट किया कि केवल पुलिस कार्रवाई से इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता, बल्कि समाज को भी जागरूक होना होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी इलाके में नशे के कारोबार की जानकारी मिले तो उसकी सूचना संबंधित एजेंसियों तक जरूर पहुंचाएं। उनके अनुसार, जनसहयोग से ही ऐसे नेटवर्क को कमजोर किया जा सकता है।






परिवारों और समाज पर गहरा असर
डॉ. दिलीप जायसवाल ने यह भी कहा कि नशे की समस्या अब केवल एक व्यक्तिगत आदत तक सीमित नहीं रह गई है। इसका व्यापक असर परिवारों, सामाजिक माहौल और कानून-व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि नशे की लत के कारण कई परिवार आर्थिक और सामाजिक संकट का सामना कर रहे हैं। इसके साथ ही, युवाओं का भविष्य भी इस बुराई से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ऐसे में, जागरूकता अभियान को लगातार मजबूत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
जनसहयोग से ही संभव है नशा मुक्त भारत
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि नशा मुक्त भारत का लक्ष्य तभी हासिल हो पाएगा, जब परिवार, शैक्षणिक संस्थान, सामाजिक संगठन और मीडिया मिलकर काम करेंगे। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी को सबसे अधिक बताया। डॉ. जायसवाल के अनुसार, यदि शुरुआती स्तर पर ही युवाओं को सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो उन्हें नशे की गिरफ्त में जाने से रोका जा सकता है। उन्होंने समाज के हर वर्ग से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की, ताकि एक स्वस्थ और नशा मुक्त समाज का निर्माण हो सके।








