Patna News: राजधानी पटना के चौक थाना परिसर में स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की गहरी आस्था का प्रतीक है। इस मंदिर का इतिहास 1902 से जुड़ा है, जब चौक थाना की स्थापना हुई थी। सावन के पवित्र महीने में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है, जो गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक करने आते हैं।
1902 से स्थापित, 2018 में हुआ भव्य जीर्णोद्धार
चौक थाना परिसर में मौजूद यह शिव मंदिर 1902 से ही पूजा-अर्चना का केंद्र रहा है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पहले यहां एक छोटी सी शिव प्रतिमा थी। वर्ष 2016 में वर्तमान मंदिर की नींव रखी गई, जिसमें वैदिक विधि-विधान से पांच रत्न स्थापित किए गए थे।






22 जून 2018 को तत्कालीन थाना प्रभारी की देखरेख और शांति समिति के सदस्यों के सहयोग से इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया। इसे 51 फीट ऊंचे भव्य मंदिर के रूप में पुनर्निर्मित किया गया, जिसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ देवी-देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा की गई।
अद्वितीय वास्तुकला और मूर्तियों का संगम
यह मंदिर तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब और कंगन घाट को जोड़ने वाले मार्ग पर, राज्य के दूसरे पर्यटन थाना चौक के पास स्थित है। इसकी चतुर्भुजीय वास्तुकला दूर-दूर से आने वाले तीर्थयात्रियों और आगंतुकों को आकर्षित करती है।
मंदिर में नर्मदेश्वर शिवलिंग के साथ-साथ नंदी, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और बजरंगबली की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। ये सभी प्रतिमाएं 2018 में वाराणसी से लाई गई थीं और शहर में भव्य शोभायात्रा के बाद स्थापित की गईं।
सावन में उमड़ता है भक्तों का सैलाब
सावन के हर सोमवार को इस मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए एकत्रित होते हैं। अपनी मनोकामनाएं पूरी होने के बाद कई भक्त यहां रुद्राभिषेक भी करवाते हैं, जो इस मंदिर से जुड़ी एक पुरानी परंपरा है।
मंदिर के पुजारी के अनुसार, सावन भर यहां न केवल रोजाना पूजा-अर्चना होती है, बल्कि अखंड रामायण का पाठ भी चलता रहता है। मंदिर की दिन में दो बार सफाई की जाती है, और भक्त नियमित रूप से शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।








