Bihar Education: बिहार के सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 38 लाख विद्यार्थियों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। इन छात्रों का आधार कार्ड शिक्षा विभाग के डेटाबेस में अब तक उपलब्ध नहीं है, जिससे उनके शैक्षणिक भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस गंभीर समस्या के कारण छात्रों के रिकॉर्ड का सत्यापन, दोहरे नामांकन की पहचान और अपार (APAAR) कार्ड बनाने की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
बिहार शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 1.84 करोड़ छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। इनमें 1,47,53,759 विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, जबकि 32,93,421 छात्र निजी स्कूलों में नामांकित हैं। हालांकि, विभाग के पास केवल 1.45 करोड़ छात्रों का ही सत्यापित आधार रिकॉर्ड मौजूद है। यह स्थिति लाखों बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं से वंचित कर सकती है।






बिहार के 38 लाख छात्र परेशान! आधार कार्ड नहीं तो नहीं मिलेगा ये बड़ा फायदा, विभाग ने दी चेतावनी
Bihar Aadhaar Card: बिहार के लाखों छात्र-छात्राओं के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। राज्य में करीब 38 लाख ऐसे विद्यार्थी हैं, जिनका बिहार शिक्षा विभाग के डेटाबेस में आधार कार्ड दर्ज नहीं है। इस गंभीर कमी के कारण न केवल उनके रिकॉर्ड का सत्यापन बाधित हो रहा है, बल्कि दोहरे नामांकन की पहचान और ‘अपार’ कार्ड (APAAR Card) बनाने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से जल्द से जल्द आधार पंजीकरण कराने की अपील की है, ताकि बच्चों को शैक्षणिक सुविधाओं और डिजिटल सेवाओं का लाभ मिल सके।
शिक्षा विभाग के अनुसार, पूरे राज्य में कुल 1.84 करोड़ छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। इनमें 1,47,53,759 विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, जबकि 32,93,421 छात्र निजी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। हालांकि, विभाग के पास केवल 1.45 करोड़ छात्रों का ही सत्यापित आधार रिकॉर्ड उपलब्ध है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का आधार विवरण गायब है।
आधार के बिना ‘अपार’ कार्ड अधूरा, क्यों जरूरी है यह पहचान?
बिहार शिक्षा परियोजना का मानना है कि जिन छात्रों का आधार विवरण उपलब्ध नहीं है, उनमें से अधिकांश बच्चों का आधार कार्ड अभी तक बना ही नहीं है। यही कारण है कि उनका ‘अपार’ कार्ड भी तैयार नहीं हो पा रहा है। ‘अपार’ कार्ड छात्रों के लिए एक स्थायी शैक्षणिक खाता रजिस्ट्री है, जो उनके पूरे शैक्षणिक जीवन के रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सहेजता है। इसके बिना, छात्रों को भविष्य में मिलने वाली कई सरकारी शैक्षणिक योजनाओं और डिजिटल सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा।
सरकारी और निजी स्कूलों की क्या है स्थिति?
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, सरकारी स्कूलों में लगभग 94.36% छात्रों के सत्यापित आधार कार्ड हैं, और उनके ‘अपार’ कार्ड भी तैयार हो चुके हैं। वहीं, निजी स्कूलों में यह आंकड़ा 80.04% है। राज्य में कुल नामांकित विद्यार्थियों में से अब तक केवल 72.94% छात्रों का ही ‘अपार’ कार्ड बन सका है। यह दर्शाता है कि निजी स्कूलों के छात्र भी इस समस्या से काफी हद तक प्रभावित हैं।
शिक्षा विभाग ने स्कूलों और अभिभावकों से अपील की है कि जिन बच्चों का आधार कार्ड अभी तक नहीं बना है या उसकी जानकारी स्कूल में जमा नहीं की गई है, वे जल्द यह प्रक्रिया पूरी कराएं, ताकि विद्यार्थियों को भविष्य में मिलने वाली शैक्षणिक सुविधाओं और डिजिटल सेवाओं का लाभ मिल सके।
यह अपील लाखों छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अभिभावकों और स्कूलों को इस दिशा में तत्परता दिखानी होगी, ताकि कोई भी छात्र सरकारी सुविधाओं से वंचित न रहे और डिजिटल शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बन सके। आधार पंजीकरण की यह प्रक्रिया जितनी जल्दी पूरी होगी, उतनी ही तेजी से छात्रों को मिलने वाले लाभ उन तक पहुंच सकेंगे।
आधार डेटा की कमी: एक गंभीर चुनौती
बिहार शिक्षा परियोजना का मानना है कि जिन छात्रों का आधार विवरण उपलब्ध नहीं है, उनमें से अधिकांश का आधार कार्ड अभी तक बना ही नहीं है। इसी कारण उनका अपार कार्ड भी नहीं बन पा रहा है। अपार कार्ड एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो छात्रों की डिजिटल पहचान और शैक्षणिक रिकॉर्ड को एकीकृत करता है। इसकी अनुपस्थिति भविष्य में कई शैक्षणिक और डिजिटल सेवाओं का लाभ लेने में बाधा बन सकती है।
सरकारी और निजी स्कूलों का हाल
विभागीय आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि सरकारी स्कूलों में सत्यापित आधार वाले 94.36% छात्रों का अपार कार्ड तैयार हो चुका है, जो एक संतोषजनक आंकड़ा है। वहीं, निजी स्कूलों में यह आंकड़ा 80.04% है, जो सरकारी स्कूलों की तुलना में थोड़ा कम है। राज्य में कुल नामांकित विद्यार्थियों में से अब तक केवल 72.94% छात्रों का ही अपार कार्ड बन सका है, जो एक चिंताजनक स्थिति है।
क्यों जरूरी है आधार और अपार कार्ड?
आधार कार्ड छात्रों की विशिष्ट पहचान सुनिश्चित करता है, जिससे दोहरे नामांकन जैसी समस्याओं को रोका जा सकता है। अपार कार्ड छात्रों के पूरे शैक्षणिक सफर का एक डिजिटल रिकॉर्ड होता है, जिसमें उनकी उपलब्धियां, प्रमाण पत्र और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी शामिल होती है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्तियों और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल पाता है। आधार और अपार कार्ड के बिना, छात्रों को भविष्य में इन सुविधाओं से वंचित होना पड़ सकता है।
शिक्षा विभाग ने स्कूलों और अभिभावकों से अपील की है कि जिन बच्चों का आधार कार्ड अभी तक नहीं बना है या उसकी जानकारी स्कूल में जमा नहीं की गई है, वे जल्द यह प्रक्रिया पूरी कराएं। यह कदम विद्यार्थियों को भविष्य में मिलने वाली शैक्षणिक सुविधाओं और डिजिटल सेवाओं का लाभ सुनिश्चित करेगा।
इस अपील का उद्देश्य यह है कि सभी पात्र छात्र समय रहते अपनी पहचान संबंधी औपचारिकताओं को पूरा कर लें, ताकि उन्हें किसी भी सुविधा से वंचित न होना पड़े और Bihar Education सिस्टम का डेटाबेस भी पूर्ण हो सके।








