Bihar Plastic Waste Management: अब बिहार में प्लास्टिक कचरा सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरा नहीं, बल्कि आय और रोजगार का जरिया भी बनेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सराहे गए सीतामढ़ी और सीवान के सफल बिहार प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल को अब पूरे राज्य में लागू करने की तैयारी है। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा होगा और स्थानीय स्तर पर हजारों लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।
ग्रामीण विकास विभाग के स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) / लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान (एलएसबीए) ने साईं कॉर्पोरेट पार्क, पटना स्थित राज्य कार्यालय में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन पर एक राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को अधिक प्रभावी, टिकाऊ और रोजगारपरक बनाना था। इसमें उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, रिसाइकलर, स्क्रैप डीलर, जिला स्तरीय पदाधिकारी, विकास सहयोगी संस्थाएं और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए। सभी ने सफल नवाचारों को पूरे राज्य में विस्तार देने की रणनीति पर गहन चर्चा की।






सीतामढ़ी मॉडल की PM मोदी ने की थी तारीफ, अब पूरे बिहार को मिलेगा फायदा
कार्यशाला में सीतामढ़ी, सीवान, सुपौल, औरंगाबाद और बक्सर सहित बिहार के विभिन्न जिलों में संचालित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के नवाचारों पर विशेष रूप से चर्चा हुई। इन जिलों में विकसित मॉडलों ने यह सिद्ध किया है कि प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक संग्रहण, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण न केवल पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय सृजन का भी एक प्रभावी माध्यम बन सकता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में सीतामढ़ी मॉडल की विशेष सराहना की थी। इस मॉडल के तहत सिंगल यूज प्लास्टिक से टेबल, बेंच जैसे विभिन्न उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। राय इंडस्ट्रीज के प्रमुख श्री संजीत राय ने कार्यशाला में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वैज्ञानिक प्रसंस्करण के माध्यम से प्लास्टिक कचरे को कैसे मूल्यवान उत्पादों में परिवर्तित किया जा सकता है।
सीवान का ‘कबाड़ मंडी’ मॉडल भी दिखाएगा राह
इसी तरह, सीवान का ‘कबाड़ मंडी’ मॉडल भी कार्यशाला का एक प्रमुख आकर्षण रहा। यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों से डिजिटल माध्यम से डोर-स्टेप स्क्रैप संग्रहण, उसके वैज्ञानिक प्रसंस्करण और विपणन की प्रभावी व्यवस्था के लिए देशभर में अपनी पहचान बना चुका है। कबाड़ मंडी के संचालक श्रीमति सरिता सिंह और श्री अमित सिंह ने कार्यशाला में इस मॉडल की कार्यप्रणाली, वित्तीय प्रबंधन, स्थानीय सहभागिता और सफल संचालन के अनुभव प्रतिभागियों के साथ साझा किए।
नवाचार कोष से मिलेगी वित्तीय सहायता, बढ़ेगी क्षमता
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) / लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान, ग्रामीण विकास विभाग के मिशन निदेशक श्री हिमांशु शर्मा ने इस क्षेत्र में कार्यरत एजेंसियों और उद्यमियों को राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रही नवाचारी एजेंसियों को नवाचार कोष के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। इससे अत्याधुनिक मशीनों की स्थापना, प्रसंस्करण क्षमता में वृद्धि और पुनर्चक्रित प्लास्टिक से मूल्यवर्धित उत्पादों का निर्माण संभव हो पाएगा।
इस अवसर पर प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े प्रमुख हितधारकों जैसे उद्यमियों, स्थानीय स्क्रैप डीलरों, जिला स्तरीय पदाधिकारियों, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सीआईपीईटी, यूनीसेफ, Water Aid, वॉटर फॉर पीपल, WADS फाउंडेशन और आईटीसी सहित विभिन्न विकास सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने अपने अनुभव और विचार साझा किए। कार्यशाला में राज्य भर में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले नवाचारों पर आधारित एक ई-बुक और पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। साथ ही इस विषय पर आधारित वृत्तचित्रों का प्रदर्शन भी किया गया।
दिनभर चली इस परामर्श कार्यशाला में प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से संबंधित केंद्र एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रावधानों, मशीनों की क्षमता वृद्धि, माइक्रोप्लास्टिक के पर्यावरण एवं स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव, पुनर्चक्रित प्लास्टिक के बाज़ार, अंतरराज्यीय रॉ मैटेरियल आपूर्ति और आय सृजन की संभावनाओं पर भी विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ राज्य समन्वयक लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान, श्री राजेश कुमार ने किया, जिन्होंने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों और नवाचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यशाला में श्री तपन मोहंता (प्रबंध निदेशक, पशुपति ग्रुप), श्री संजीत राय (प्रबंध निदेशक, राय इंडस्ट्रीज़), श्री वीरेन्द्र कुमार (इंडिया ट्रेडर्स) जैसे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व और विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।








