Bihar Smart Meter: नई दिल्ली। देश के बिजली सुधारों में बिहार ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। राज्य में अब तक 92 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जो पूरे भारत में स्थापित कुल प्रीपेड स्मार्ट मीटरों का लगभग 70 प्रतिशत है। इस उपलब्धि के साथ बिहार बिजली वितरण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। यह महत्वपूर्ण जानकारी बिहार के ऊर्जा सचिव और बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (BSPHCL) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव (भा. प्र. से.) ने 7 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 7वें CII इंटरनेशनल एनर्जी कॉन्फ्रेंस एंड एग्जिबिशन (IECE 2026) के दौरान दी।







तकनीकी सत्र ‘डिमांड रिस्पॉन्स 2.0: स्मार्ट मीटर, डीटी मीटर और IoT आधारित फ्लेक्सिबल पावर सिस्टम’ में श्री यादव ने बताया कि देश में लगाए गए कुल स्मार्ट मीटर (प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों) में भी बिहार की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है। उन्होंने जोर दिया कि बिहार की बिजली वितरण व्यवस्था में डिजिटल तकनीकों के उपयोग से दक्षता और उपभोक्ता सेवाओं में बड़ा सुधार आया है।
स्मार्ट मीटरिंग से बदल गई बिहार की बिजली व्यवस्था
श्री अजय यादव ने अपने संबोधन में बताया कि बिहार ने Bihar Smart Meter कार्यक्रम के जरिए बिजली वितरण प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। स्मार्ट मीटर लगाने से बिजली चोरी में उल्लेखनीय कमी आई है, बकाया राशि लगभग समाप्त हो गई है और बिलिंग व्यवस्था पहले से कहीं अधिक पारदर्शी बन गई है। उन्होंने वित्तीय आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2020 से 2025 के बीच बिहार के बिजली क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है।
श्री अजय यादव ने कहा, ‘बिहार ने स्मार्ट मीटरिंग के जरिए बिजली वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। स्मार्ट मीटरों से बिजली चोरी में कमी आई है, बकाया राशि लगभग समाप्त हुई है और बिलिंग व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनी है।’
वित्तीय वर्ष 2019-20 में बिलिंग दक्षता 75.14 प्रतिशत थी, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 88.46 प्रतिशत हो गई है। इसी तरह, संग्रहण दक्षता 86 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इस अवधि में एटी एंड सी (AT&C) हानियां 35.12 प्रतिशत से घटकर मात्र 11.54 प्रतिशत रह गई हैं। ऊर्जा सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि एसीएस-एआरआर (ACS-ARR) अंतर भी अब सकारात्मक हो गया है, जो राज्य के लिए एक बड़ी वित्तीय सफलता है।
औद्योगिक विकास और बेहतर आपूर्ति का लक्ष्य
बिहार सरकार राज्य में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम कर रही है, और इसमें निर्बाध बिजली आपूर्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है। श्री अजय यादव ने बताया कि राज्य में 13 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना है, जिसके लिए विश्वसनीय बिजली नेटवर्क आवश्यक है। इस वर्ष बिहार ने 9,475 मेगावाट की रिकॉर्ड पीक डिमांड पूरी की है, जो राज्य की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को दर्शाता है।
वर्तमान में, शहरी क्षेत्रों में 23-24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 22-23 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ऊर्जा सचिव ने गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति के महत्व पर जोर देते हुए कहा,
श्री अजय यादव ने कहा, ‘हमारा ध्यान केवल पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। हम तकनीकी का उपयोग कर उद्योगों और उपभोक्ताओं को समान रूप से निर्बाध और उच्च गुणवत्ता वाली बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।’
राज्य ने स्मार्ट मीटरिंग के माध्यम से लगभग 10 अरब डेटा पॉइंट्स तैयार किए हैं, जिनका उपयोग बिजली खपत के पैटर्न को समझने, मांग का अनुमान लगाने और बेहतर निर्णय लेने में किया जा रहा है। टाइम-ऑफ-डे (ToD) टैरिफ व्यवस्था भी लागू की गई है, जिससे बिजली उपयोग को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, लगभग 2 लाख डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर (DT) मीटर लगाए गए हैं, जो ट्रांसफॉर्मरों की रियल-टाइम निगरानी, रखरखाव और वितरण नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ाने में सहायक हैं।
तकनीकी नवाचारों से मजबूत हो रहा ग्रिड
बिहार अपने बिजली वितरण नेटवर्क में उन्नत डिजिटल तकनीकों को तेजी से अपना रहा है। इसमें IoT आधारित निगरानी, GIS आधारित परिसंपत्ति मैपिंग, डिजिटल एसेट रजिस्टर और एकीकृत ग्राहक संबंध प्रबंधन (CRM) प्लेटफॉर्म शामिल हैं, जो रियल-टाइम मॉनिटरिंग और त्वरित निर्णय लेने में मदद कर रहे हैं। ‘सुविधा बिहार पोर्टल’ के माध्यम से उपभोक्ताओं को 21 ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे बिजली सेवाएं अधिक पारदर्शी, सुगम और उपभोक्ता केंद्रित बन रही हैं।
राज्य रूफटॉप सोलर, कृषि फीडरों के सोलराइजेशन और पीएम-कुसुम योजना के विस्तार पर भी सक्रिय रूप से काम कर रहा है। स्मार्ट ग्रिड तकनीक और उन्नत डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से वितरण नेटवर्क को अधिक नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण के लिए तैयार किया जा रहा है। सत्र में असम सरकार के अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) डॉ. कृष्ण कुमार द्विवेदी, IIT कानपुर के प्रोफेसर डॉ. अनूप सिंह, किम्बल के वरिष्ठ निदेशक श्री गोपाल पारिख और बीआरपीएल के सीईओ श्री अभिषेक रंजन ने भी भाग लिया। सत्र का संचालन ग्रिडक्रेस्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक मदन मोहन चक्रवर्ती ने किया।

विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का ऊर्जा परिवर्तन अब तेजी से ऐसे अत्याधुनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे पर निर्भर करेगा, जो बढ़ती बिजली मांग और नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते एकीकरण के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने में सक्षम हो। उन्होंने स्मार्ट मीटरिंग, एआई आधारित एनालिटिक्स, IoT आधारित निगरानी और डिमांड रिस्पॉन्स तंत्र को ग्रिड की क्षमता बढ़ाने, बिजली व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने और उपभोक्ताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताया। श्री यादव ने सरकारों, बिजली वितरण कंपनियों, तकनीकी प्रदाताओं, शोध संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा,
श्री अजय यादव ने कहा, ‘साझेदारी और तकनीकी नवाचार बिजली क्षेत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।’
यह सामूहिक प्रयास ही बिहार को भविष्य के ऊर्जा चुनौतियों से निपटने और सतत विकास की ओर बढ़ने में मदद करेगा। पढ़िए विस्तार से
भारत के प्रीपेड स्मार्ट मीटरों में बिहार की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत, 92 लाख प्रीपेड मीटर स्थापित; बिजली वितरण सुधारों में बना राष्ट्रीय अग्रणी: ऊर्जा सचिव
बिहार के ऊर्जा सचिव ने CII इंटरनेशनल एनर्जी कॉन्फ्रेंस एंड एग्जिबिशन में बताया-स्मार्ट तकनीक और डेटा एनालिटिक्स से मजबूत हो रहा बिहार का बिजली वितरण नेटवर्क
पटना/नई दिल्ली। बिहार बिजली सुधारों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। राज्य में अब तक 92 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जो देश में स्थापित कुल प्रीपेड स्मार्ट मीटरों का करीब 70 प्रतिशत है। वहीं देश में लगाए गए कुल स्मार्ट मीटर (प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों) में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है। बिहार की बिजली वितरण व्यवस्था में डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल से दक्षता और उपभोक्ता सेवाओं में बड़ा सुधार आया है। यह जानकारी बिहार के ऊर्जा सचिव एवं बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (BSPHCL) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री अजय यादव (भा. प्र. से.) ने नई दिल्ली में आयोजित 7वें CII इंटरनेशनल एनर्जी कॉन्फ्रेंस एंड एग्जिबिशन (IECE 2026) के दौरान दी।
तकनीकी सत्र “डिमांड रिस्पॉन्स 2.0: स्मार्ट मीटर, डीटी मीटर और IoT आधारित फ्लेक्सिबल पावर सिस्टम’ में ऊर्जा सचिव ने कहा कि बिहार ने स्मार्ट मीटरिंग के जरिए बिजली वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। स्मार्ट मीटरों से बिजली चोरी में कमी आई है, बकाया राशि लगभग समाप्त हुई है और बिलिंग व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 से 2025 के बीच बिहार के बिजली क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में बिलिंग दक्षता 75.14 प्रतिशत थी, जो बढ़कर 2025-26 में 88.46 प्रतिशत हो गई है। वहीं, संग्रहण दक्षता 86 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इस अवधि में एटी एंड सी (AT&C) हानियां 35.12 प्रतिशत से घटकर 11.54 प्रतिशत रह गई हैं। उन्होंने बताया कि एसीएस-एआरआर (ACS-ARR) अंतर भी अब सकारात्मक हो गया है।
ऊर्जा सचिव ने कहा कि बिहार ने स्मार्ट मीटरिंग के माध्यम से करीब 10 अरब डेटा पॉइंट्स तैयार किए हैं, जिनका उपयोग बिजली खपत के पैटर्न को समझने, मांग का अनुमान लगाने और बेहतर निर्णय लेने में किया जा रहा है। राज्य में टाइम-ऑफ-डे (ToD) टैरिफ व्यवस्था भी लागू की गई है, जिससे बिजली उपयोग को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद मिल रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 2 लाख डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर (DT) मीटर लगाए गए हैं। इससे ट्रांसफॉर्मरों की रियल-टाइम निगरानी, रखरखाव और वितरण नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ाने में सहायता मिल रही है।
श्री अजय यादव ने कहा कि बिहार औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम कर रहा है। राज्य में 13 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना है। उन्होंने बताया कि बिहार ने इस वर्ष 9,475 मेगावाट रिकॉर्ड पीक डिमांड पूरी की है। राज्य में शहरी क्षेत्रों में 23-24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 22-23 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। बिजली की उपलब्धता के साथ उसकी गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए श्री यादव ने कहा कि अब हमारा ध्यान केवल पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। हम तकनीकी का उपयोग कर उद्योगों और उपभोक्ताओं को समान रूप से निर्बाध और उच्च गुणवत्ता वाली बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बिहार अपने बिजली वितरण नेटवर्क में उन्नत डिजिटल तकनीकों को तेजी से शामिल कर रहा है। इसके तहत IoT आधारित निगरानी, GIS आधारित परिसंपत्ति मैपिंग, डिजिटल एसेट रजिस्टर और एकीकृत ग्राहक संबंध प्रबंधन (CRM) प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है, जिससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग और त्वरित निर्णय लेने में सहायता मिल रही है। उन्होंने ‘सुविधा बिहार पोर्टल’ का भी उल्लेख किया, जिसके माध्यम से उपभोक्ताओं को 21 ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही है। इससे बिजली सेवाएं अधिक पारदर्शी, सुगम और उपभोक्ता केंद्रित बन रही है।
ऊर्जा सचिव ने बताया कि राज्य रूफटॉप सोलर, कृषि फीडरों के सोलराइजेशन और पीएम-कुसुम योजना के विस्तार पर भी कार्य कर रहा है। साथ ही स्मार्ट ग्रिड तकनीक और उन्नत डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से वितरण नेटवर्क को अधिक नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण के लिए तैयार किया जा रहा है। श्री यादव ने सरकारों, बिजली वितरण कंपनियों, तकनीकी प्रदाताओं, शोध संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि साझेदारी और तकनीकी नवाचार बिजली क्षेत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
तकनीकी सत्र में डॉ. कृष्ण कुमार द्विवेदी (भा. प्र.से.), अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा), असम सरकार में डॉ. अनूप सिंह, प्रोफेसर, IIT कानपुर; श्री गोपाल पारिख, वरिष्ठ निदेशक, किम्बल और श्री अभिषेक रंजन, सीईओ, बीआरपीएल ने भी भाग लिया। सत्र का संचालन ग्रिडक्रेस्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक श्री मदन मोहन चक्रवर्ती ने किया।
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत का ऊर्जा परिवर्तन अब तेजी से ऐसे अत्याधुनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे पर निर्भर करेगा, जो बढ़ती बिजली मांग और नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते एकीकरण के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने में सक्षम हो। उन्होंने स्मार्ट मीटरिंग, एआई आधारित एनालिटिक्स, IoT आधारित निगरानी और डिमांड रिस्पॉन्स तंत्र को ग्रिड की क्षमता बढ़ाने, बिजली व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने और उपभोक्ताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताया।









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