Sugar Price Hike: देशभर में चीनी की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। मार्च से जारी इस तेजी के बीच, बीते केवल 15 दिनों में ही चीनी के दाम 17 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। इस अप्रत्याशित वृद्धि का सीधा असर आने वाले दिनों में चाय, मिठाई, खीर, चॉकलेट, जूस और अन्य चीनी आधारित खाद्य उत्पादों पर पड़ सकता है, जिससे उनकी कीमतें भी बढ़ेंगी।
बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने की सरकारी तैयारी
चीनी की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार सक्रिय हो गई है। सरकार फिलहाल चीनी के आयात पर लगने वाली ड्यूटी घटाने या उसे पूरी तरह खत्म करने पर विचार कर रही है। वर्तमान में चीनी के आयात पर 100 फीसदी तक की इंपोर्ट ड्यूटी लगती है। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार लगभग 10 लाख टन कच्ची चीनी को शून्य ड्यूटी पर आयात करने की अनुमति दे सकती है। यदि ऐसा होता है, तो देश करीब एक दशक बाद इतनी बड़ी मात्रा में कच्ची चीनी का आयात करेगा।
क्यों बढ़ रही है चीनी की मिठास: उत्पादन और एथेनॉल का कनेक्शन
घरेलू बाजार में चीनी महंगी होने की मुख्य वजह उत्पादन और उपलब्ध स्टॉक पर बढ़ता दबाव है। 2025-26 का चीनी सीजन उम्मीद के मुकाबले काफी कमजोर रहा, जबकि घरेलू खपत लगातार मजबूत बनी हुई है। इसके अलावा, गन्ने का एक बड़ा हिस्सा चीनी बनाने के बजाय एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल किया गया, जिससे बाजार में चीनी का स्टॉक और भी कम हो गया। मांग और आपूर्ति के इसी असंतुलन ने कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है।
त्योहारों से पहले बढ़ेगी चिंता, क्या कम होंगे दाम?
अगस्त के अंत से जनवरी तक, त्योहारों और मिठाइयों की बढ़ी हुई मांग के कारण चीनी की खपत सामान्य से अधिक हो जाती है। सरकार ने नवंबर 2025 में 15 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 20 लाख टन कर दिया गया था। लगभग 8 लाख टन चीनी पहले ही देश से बाहर जा चुकी है। अब घरेलू सप्लाई बढ़ाने के लिए लगभग इतनी ही मात्रा में चीनी के आयात की तैयारी चल रही है। अगर समय रहते आयात से बाजार में पर्याप्त आपूर्ति हो जाती है, तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है, अन्यथा चीनी के साथ-साथ मिठाई, डेयरी और अन्य चीनी आधारित उत्पाद भी और महंगे हो सकते हैं, जिसका सीधा बोझ आम उपभोक्ता पर पड़ेगा।






