Bihar Noise Pollution: बिहार में लगातार बढ़ते ध्वनि प्रदूषण पर पटना हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस राजीव रॉय की एकल पीठ ने 14 अगस्त 2026 को एक अवमानना याचिका का निपटारा करते हुए राज्यभर में ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 तथा मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के व्यापक निर्देश जारी किए हैं। यह महत्वपूर्ण आदेश गुरुवार, 20 अगस्त को सार्वजनिक किया गया।
अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अब शादी-विवाह, जुलूस या किसी भी प्रकार के समारोह में तेज आवाज में संगीत बजाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विशेष रूप से डीजे, लाउडस्पीकर, प्रेशर हॉर्न और मैरिज/बैंक्वेट हॉल से होने वाले शोर पर विशेष सख्ती बरती जाएगी। डीजे संचालक, लाउडस्पीकर मालिक और मैरिज/बैंक्वेट हॉल प्रबंधन किसी भी परिस्थिति में रात 9:55 बजे के बाद संगीत या पब्लिक एड्रेस सिस्टम का उपयोग नहीं कर पाएंगे। दिन के समय भी ध्वनि का स्तर निर्धारित डेसिबल सीमा के भीतर रखना अनिवार्य होगा।
बिहार में ध्वनि प्रदूषण पर हाईकोर्ट का सख्त रुख
अस्पतालों और स्कूलों के आसपास के क्षेत्र में डीजे या लाउडस्पीकर पूरी तरह साइलेंट मोड में ही गुजरेंगे। इन संवेदनशील इलाकों में वाहनों को भी हॉर्न बजाने की अनुमति नहीं होगी। इन क्षेत्रों में ‘साइलेंस जोन’, ‘नो हॉर्न’ और ‘नो लाउडस्पीकर’ जैसे बड़े साइनबोर्ड लगाना भी अनिवार्य होगा। सड़कों पर दबाव वाले (प्रेशर) हॉर्न का इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 190(2) के तहत इसका उल्लंघन करने वालों पर चालान और जुर्माना लगाया जाएगा। कोर्ट ने कटिहार के पोठिया का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे उपायों से सड़क सुरक्षा में सुधार होगा और राजस्व में भी वृद्धि होगी।
डीजे, लाउडस्पीकर और प्रेशर हॉर्न पर नए नियम
उच्च न्यायालय के आदेशानुसार, प्रत्येक डीजे ऑपरेटर, मैरिज हॉल मालिक और साउंड सिस्टम संचालक को अपने स्थानीय सब-डिवीजनल ऑफिसर (एसडीओ) के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इस पंजीकरण की एक प्रति संबंधित थाने में भी जमा करनी होगी। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सार्वजनिक स्थानों पर साउंड मॉनिटरिंग सिस्टम और डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आम जनता में ध्वनि प्रदूषण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।
शिकायत और जागरूकता के लिए हेल्पलाइन
इस आदेश के बाद, अब शादी के समारोह में देर रात तक डीजे बजाने या सड़क पर तेज हॉर्न बजाने वाले सीधे कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। प्रशासन को इन नियमों का सख्ती से पालन कराना होगा, अन्यथा अवमानना का मामला बन सकता है। आम नागरिक भी ध्वनि प्रदूषण से संबंधित किसी भी शिकायत के लिए 112 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मॉडल स्कूलों में ‘एक अधिकारी-एक स्कूल’ व्यवस्था लागू करने का बड़ा निर्देश दिया है।
इन कड़े निर्देशों का उद्देश्य राज्य में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना और नागरिकों को शांतिपूर्ण वातावरण प्रदान करना है। आने वाले समय में इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की सक्रियता महत्वपूर्ण होगी।







