Bihar Ahalya Sthan Puja: आंचल कुमारी दरभंगा। कमतौल के ऐतिहासिक अहल्यास्थान में शनिवार को भगवती अहल्या की वार्षिक पूजा विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। इस पवित्र स्थल पर भगवान श्रीराम के चरण स्पर्श से अहल्या के उद्धार की गहरी मान्यता है, जिसके कारण हर साल सावन के दूसरे पखवाड़े में आयोजित होने वाली इस विशेष पूजा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। पूरे दिन मंदिर परिसर में पूजन और हवन का कार्यक्रम जारी रहा, जिसमें दूर-दूर से आए भक्तों ने हिस्सा लिया।
विधि-विधान से हुआ पूजन और हवन
वार्षिक पूजा के दौरान मंदिर परिसर में पुजारियों और ग्रामीणों ने मिलकर भव्य हवन का आयोजन किया। हवन कुंड के चारों ओर बैठे श्रद्धालु लगातार मंत्रोच्चारण कर रहे थे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। गर्भगृह में माता अहल्या सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को पीले वस्त्रों से सजाया गया था, जो भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र रहीं। मंत्रोच्चार के साथ बजरंबली का ध्वजारोहण भी किया गया, जिसे शुभ माना जाता है।
भगवान श्रीराम से जुड़ी है अहल्यास्थान की मान्यता
अहल्यास्थान की यह मान्यता है कि यहीं पर भगवान श्रीराम के चरण स्पर्श से भगवती अहल्या का उद्धार हुआ था। इसी ऐतिहासिक महत्व के कारण हर वर्ष सावन महीने के दूसरे पखवाड़े में शनिवार या मंगलवार के दिन ग्रामीणों के सहयोग से इस विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और स्थानीय समुदाय के लिए इसका गहरा धार्मिक महत्व है।
खीर और घी के लड्डू का हुआ प्रसाद वितरण
पूजा संपन्न होने के बाद मंदिर समिति द्वारा श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान खीर और घी के लड्डू का प्रसाद बांटा गया, जिसे पाने के लिए भक्तों में काफी उत्साह देखा गया। पूरे दिन चले इस धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होकर श्रद्धालुओं ने पुण्य लाभ कमाया और अपनी आस्था प्रकट की। मंदिर समिति ने बताया कि भक्तों की सुविधा और व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा गया था।








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