Darbhanga Rape Case: बिहार के दरभंगा में एक महिला से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश नीरज कुमार की अदालत ने सकतपुर थानाक्षेत्र के बैका निवासी मो. सरताज को दुष्कर्म के जुर्म में दस वर्षों के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद न्यायपालिका ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ऐसे अपराधों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अदालत ने दोषी मो. सरताज पर 75 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यदि दोषी यह राशि जमा नहीं कर पाता है, तो उसे तीन वर्षों का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। यह निर्णय अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस सुनने तथा वाद अभिलेख पर मौजूद साक्ष्यों के गहन परिशीलन के बाद सुनाया गया।
महिला को धमकाकर किया था दुष्कर्म, कोर्ट ने माना दोषी
अभियोजन पक्ष का संचालन कर रहे एपीपी चमक लाल पंडित ने बताया कि कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद गत 19 अगस्त को ही मो. सरताज को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (दुष्कर्म) के तहत दोषी घोषित कर दिया था। इसके बाद उसके बंधपत्र को खंडित कर जेल भेज दिया गया था।
पीपी अमरेंद्र नारायण झा ने जानकारी दी कि यह घटना 28 मार्च 2022 को हुई थी। अभियुक्त ने एक महिला को डरा धमकाकर जबरन दुष्कर्म किया था। इस गंभीर वारदात के बाद दुष्कर्म के आरोप में सकतपुर थाना में कांड सं. 22/22 दर्ज किया गया था। अदालत में इसका विचारण सत्रवाद सं. 349/22 के तहत शुरू हुआ।
अभियोजन पक्ष ने साबित किया गुनाह, छह गवाहों ने दिया बयान
ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपनी दलीलें मजबूती से रखीं। इसमें अनुसंधान अधिकारी (IO), डॉक्टर और मजिस्ट्रेट सहित कुल छह गवाहों की गवाही कराई गई। अंततः अभियोजन पक्ष दोषी मो. सरताज का जुर्म साबित करने में सफल रहा।
बचाव पक्ष ने अभियुक्त की कम उम्र का हवाला देते हुए न्यूनतम सजा देने की गुहार लगाई, जबकि अभियोजन पक्ष से एपीपी चमक लाल पंडित ने इसे एक सामाजिक अपराध करार देते हुए अधिकतम सजा देने की अपील न्यायालय से की थी।
इस फैसले से समाज में एक सकारात्मक संदेश जाएगा कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर न्यायपालिका सख्ती से कार्रवाई कर रही है। यह निर्णय पीड़ितों को न्याय दिलाने और ऐसे जघन्य अपराधों को रोकने में सहायक सिद्ध होगा।







