Bihar Pashu Chikitsa Parishad: राज्य के पशु चिकित्सकों के लिए एक बड़ी खबर है। बिहार पशु चिकित्सा परिषद ने पंजीकरण नवीनीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। इस पहल से पशु चिकित्सकों को अब अपने पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए पटना स्थित परिषद कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे उनके समय और संसाधनों की बचत होगी। 22 अगस्त 2026, शुक्रवार को रजिस्ट्रार डॉ. अरविंद कुमार और परिषद के अध्यक्ष डॉ. ओमकार नाथ दिवाकर ने इस ऑनलाइन सेवा का विधिवत शुभारंभ किया।
यह निर्णय विशेष रूप से राज्य के दूर-दराज और सीमावर्ती क्षेत्रों में कार्यरत पशु चिकित्सकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। पहले उन्हें सिर्फ नवीनीकरण के लिए लंबी यात्रा करके पटना आना पड़ता था, जो उनके लिए एक मुश्किल भरा काम था। यह प्रक्रिया न केवल समय लेती थी, बल्कि आर्थिक रूप से भी बोझिल थी।
पटना आने की बाध्यता खत्म, घर बैठे होगा काम
पशु चिकित्सा विज्ञान में निर्धारित डिग्री हासिल करने के बाद राज्य में पशु चिकित्सा का अभ्यास करने या सरकारी सेवा में आने के लिए बिहार पशु चिकित्सा परिषद में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। यह पंजीकरण हर पांच साल में नवीनीकृत कराना होता है। कई बार क्षेत्रीय और विभागीय जिम्मेदारियों के चलते पशु चिकित्सक समय पर नवीनीकरण नहीं करवा पाते थे, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें विलंब शुल्क का भुगतान करना पड़ता था।
बिहार पशु चिकित्सा परिषद के रजिस्ट्रार डॉ. अरविंद कुमार और अध्यक्ष डॉ. ओमकार नाथ दिवाकर ने इस सेवा का शुभारंभ करते हुए कहा कि यह पशु चिकित्सकों की लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान है।
SMS रिमाइंडर से नहीं भूलेगा नवीनीकरण
इस नई व्यवस्था की एक और महत्वपूर्ण विशेषता है कि पंजीकृत पशु चिकित्सकों को उनके पंजीकरण नवीनीकरण की निर्धारित अवधि के संबंध में उनके मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से पांच बार रिमाइंडर भेजे जाएंगे। इससे उन्हें नवीनीकरण की अंतिम तिथि की जानकारी समय रहते मिल सकेगी और विलंब शुल्क लगने की संभावना काफी कम हो जाएगी। बिहार पशु चिकित्सक संघ वर्ष 2022 से ही इस प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा था।
ऑनलाइन नवीनीकरण प्रणाली लागू होने से पशु चिकित्सकों के लिए यह पूरी प्रक्रिया अब अधिक सुविधाजनक, सरल और पारदर्शी बन गई है। यह कदम परिषद की सेवाओं को डिजिटल बनाने और उन्हें आम चिकित्सकों तक आसानी से पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। इससे राज्य के पशुधन स्वास्थ्य सेवा को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा।







