Reservation Hatao Andolan: दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े आंदोलन का गवाह बना, जहां ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ (RHA) के बैनर तले हजारों लोग जातिगत आरक्षण के विरोध में सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि आरक्षण का आधार जाति नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिति को बनाया जाए। इस आंदोलन की शुरुआत इंस्टाग्राम पर ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ नाम के एक पेज से हुई, जिसके करीब 56 लाख फॉलोअर्स हैं।
आरक्षण प्रणाली में बदलाव की यह मांग ऐसे समय में जोर पकड़ रही है, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने दोहराया है कि आरक्षण गरीबी उन्मूलन की नहीं, बल्कि सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े समुदायों को उनका हक दिलाने की योजना है। केंद्र सरकार ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया है कि वह UGC के 2026 के समानता नियमों पर फिर से विचार कर रही है, जिसके खिलाफ इस साल जनवरी 2026 में भी विरोध प्रदर्शन हुए थे।

‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ की प्रमुख मांगें क्या हैं?
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने अपनी पांच प्रमुख मांगें रखी हैं, जो भारत की संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर एक नई बहस छेड़ रही हैं:
- आर्थिक आधार पर आरक्षण: प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि आरक्षण जाति के बजाय आर्थिक स्थिति देखकर दिया जाए, ताकि गरीब लोगों को, उनकी जाति देखे बिना, पढ़ाई और कोचिंग में मदद मिल सके।
- आरक्षण के भीतर कोटा: आरक्षित वर्गों के अंदर भी कोटा का बंटवारा हो, जिससे इसका फायदा सबसे जरूरतमंद और पिछड़े लोगों तक पहुंच सके।
- श्वेत पत्र जारी हो: सरकार एक श्वेत पत्र जारी कर बताए कि पिछले 80 सालों में आरक्षण से असल में कितना फायदा हुआ है। इसके लिए बिहार के मुसहर समुदाय का उदाहरण दिया गया है।
- न्यूनतम अंक अनिवार्य: IIT और IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिले के लिए न्यूनतम अंक जरूरी किए जाएं, ताकि मेरिट बनी रहे।
- EWS को अधिक सुविधाएं: आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) को अनुसूचित जाति (SC) जैसी सुविधाएं (जैसे फीस माफी) मिलें। इसके अलावा, SC/ST एक्ट और UGC की नीतियों पर भी चिंता जताई गई है।
आंदोलन में कौन-कौन शामिल?
इस आंदोलन की शुरुआत छात्र हर्ष दुबे ने 22 जुलाई 2026 को ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ नाम से एक इंस्टाग्राम पेज बनाकर की थी। दुबे ने बाद में पेज चलाने की जिम्मेदारी अनुभवी आरक्षण-विरोधी कार्यकर्ताओं अनुराधा तिवारी, अजीत भारती और नेहा दास को सौंप दी। इस आंदोलन को करणी सेना, रणबीर सेना (जिससे बिहार के आलोक प्रताप सिंह जुड़े हैं) और अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा जैसे संगठनों का समर्थन मिला है।
जंतर-मंतर पर गतिरोध: कब, क्या हुआ?
यह आंदोलन 21 अगस्त 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा रूप ले चुका था, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध देखने को मिला:
- 20 अगस्त 2026: दिल्ली पुलिस ने 21 अगस्त के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी और सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को फर्जी बताया। इसी दिन केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह UGC के 2026 वाले समानता नियमों पर फिर से विचार कर रही है।
- 21 अगस्त 2026 (सुबह): करणी सेना, रणबीर सेना और अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा से जुड़े लोग जंतर-मंतर पहुंच गए। पहले तो पुलिस ने मना किया, लेकिन बाद में रामलीला मैदान में शाम 4 बजे तक और अधिकतम 500 लोगों के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति (NOC) दी। हालांकि, प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर ही डटे रहे।
- 21 अगस्त 2026 (देर रात): दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया और कई लोगों को हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि उन्हें हनुमान चालीसा पढ़ते हुए हटाया गया। हर्ष दुबे की अपील पर कई प्रदर्शनकारी पैदल राजघाट की ओर रवाना हो गए थे।
- 22 अगस्त 2026: हर्ष दुबे ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘हम कमजोर नहीं पड़े… मांगें पूरी होने के बाद ही वापस जाएंगे।’ दिल्ली पुलिस ने इस दिन भी किसी प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी, और जंतर-मंतर पर होने वाला एथेनॉल के विरोध में एक अन्य प्रदर्शन भी रद्द कर दिया गया।
पिछले ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) आंदोलन की तुलना में, जिसने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही अपनी जीत मान ली थी, ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ अभी उस मुकाम से दूर है। सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। हर्ष दुबे और उनके साथी अपनी मांगों पर डटे हुए हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपे बिना पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह आंदोलन CJP जैसी त्वरित सफलता हासिल करता है या एक लंबा संघर्ष बन जाता है।







