Bihar Cyber Police: भारतीय नागरिकों की संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान और बांग्लादेश में बैठे साइबर माफियाओं तक पहुंचाने के मामले में बिहार पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। इस सनसनीखेज डेटा लीक कांड में गिरफ्तार किए गए शातिर ऋषभ कुमार पर बिहार साइबर पुलिस का शिकंजा कसना अब और तेज हो गया है। पुलिस यह पता लगाने के लिए वैज्ञानिक जांच का सहारा ले रही है कि ऋषभ कुमार ने भारत के नागरिकों और सुरक्षा से जुड़ी कौन-कौन सी गोपनीय जानकारियां अंतरराष्ट्रीय साइबर माफियाओं को बेची थीं।
साइबर थाने की पुलिस ने आरोपी ऋषभ कुमार के पास से जब्त किए गए चार मोबाइल फोन और एक आईपैड को विस्तृत डिजिटल जांच के लिए दिल्ली स्थित सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कोर्ट के आदेश मिलने के बाद केस के आईओ इंस्पेक्टर अनोज कुमार ने शनिवार को इस दिशा में सभी कागजी और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं।
CFSL रिपोर्ट से खुलेगा डेटा लीक का पूरा नेटवर्क
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी ऋषभ कुमार के पास से कई महंगे और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए थे। इन उपकरणों में कई फोन और टेलीग्राम अकाउंट विशेष सुरक्षा लेयर से लॉक किए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि CFSL की फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद साइबर थाने की पुलिस की जांच का दायरा काफी बढ़ जाएगा।
फॉरेंसिक लैब की विशेषज्ञ टीम इन उपकरणों से डिलीट किए गए डेटा, टेलीग्राम बॉट, एपीआई लॉग्स और अंतरराष्ट्रीय संदेशों के इतिहास को रिकवर करेगी। इससे यह साफ हो सकेगा कि आरोपी ने विदेशी नंबरों से जुड़े किन-किन हैंडलर्स को भारतीय वाहनों के पंजीकरण डेटा, मोबाइल नंबर डिटेल्स, पैन कार्ड और अन्य संवेदनशील डेटा बेचे थे। यह रिपोर्ट इस बड़े डेटा ट्रैफिकिंग नेटवर्क का पर्दाफाश करने में निर्णायक साबित होगी।
टेलीग्राम बॉट और API स्क्रैपिंग से होता था डेटा का खेल
अहियापुर के गरहा थाना क्षेत्र के कफेन चौधरी निवासी ऋषभ कुमार को साइबर पुलिस ने बीते 21 अप्रैल को एक गोपनीय सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया था। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ था कि ऋषभ अपने साथियों के साथ मिलकर एपीआई (Application Programming Interface) और ओसिंट (Open Source Intelligence) टूल्स के जरिए आम नागरिकों के निजी और गोपनीय डेटा को एकत्रित करता था।
वह टेलीग्राम ग्रुप्स और बॉट्स का इस्तेमाल कर इस संवेदनशील डेटा को बांग्लादेश, पाकिस्तान और अन्य देशों के साइबर अपराधियों को बेचता था। डेटा बिक्री से मिलने वाले पैसों को पुलिस की नजरों से छिपाने के लिए आरोपी ने अपने साथी साहिल कुमार के माध्यम से किराए के फर्जी बैंक खातों का भी इस्तेमाल किया था।
फरार साथियों की तलाश में बिहार साइबर पुलिस की छापेमारी जारी
इस इंटरनेशनल डेटा लीक गिरोह में शामिल ऋषभ के अन्य सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए भी साइबर पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। इस मामले में वैशाली के गौरव कुमार, यूपी गाजीपुर के दीपक चौधरी उर्फ आशू कुमार (जो टेलीग्राम पर विदेशी नंबरों से जुड़े ग्रुप्स चलाता था), दरभंगा के सुधांशु कुमार और तौसिफ असलम खान को भी आरोपी बनाया गया है।
साइबर थाने के अधिकारियों का कहना है कि CFSL दिल्ली से मिलने वाली डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट इस पूरे मामले में बेहद निर्णायक साबित होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर देश की सुरक्षा एजेंसियों को भी डेटा सुरक्षा से जुड़ी इस गंभीर सेंधमारी की जानकारी साझा की जा सकती है, ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों को रोका जा सके और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।







