Bihar Police: जदयू सांसद गिरिधारी यादव ने बिहार पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। सांसद ने दावा किया है कि पुलिस ने उनके चांदन और देवघर स्थित तीन आवासों पर बिना सर्च वारंट के तलाशी ली। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई की जांच भागलपुर प्रक्षेत्र के आईजी से कराने की मांग की है। हालांकि, बांका के एसपी अमितेश कुमार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
सांसद का आरोप: बिना वारंट घर में घुसी पुलिस
रविवार को एक पत्रकार सम्मेलन में जदयू सांसद गिरिधारी यादव ने पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि पुलिस उनके तीन अलग-अलग आवासों पर एक साथ पहुंची थी। सांसद के अनुसार, देवघर स्थित उनके आवास में मौजूद महिलाओं ने उन्हें फोन कर पुलिस के आने की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने पुलिसकर्मियों से फोन पर कार्रवाई का आधार पूछा।
सांसद गिरिधारी यादव ने दावा किया, “मैंने पुलिसकर्मियों से सर्च वारंट के बारे में पूछा था, जिस पर उन्होंने वारंट नहीं होने की बात कही। किसी भी आवास में बिना सर्च वारंट के प्रवेश और तलाशी की कार्रवाई बेहद गंभीर मामला है।”
उन्होंने इस मामले में स्पष्टता की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगा है। सांसद ने यह भी बताया कि उन्होंने एसपी से मिलने के लिए लेटर पैड पर समय मांगा था, लेकिन उन्हें मुलाकात का समय नहीं मिला। उन्होंने एसपी से फोन पर संपर्क करने की कोशिश भी की, लेकिन बातचीत नहीं हो सकी।
पुलिस का खंडन: अवैध खनन मामले में हुई कार्रवाई
दूसरी ओर, बांका के एसपी अमितेश कुमार ने सांसद गिरिधारी यादव के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। एसपी के अनुसार, पुलिस सांसद के किसी भी आवास पर नहीं गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस की कार्रवाई अवैध मिट्टी खनन के एक मामले से संबंधित थी।
एसपी ने बताया कि प्रस्तावित बीएमपी-10 की जमीन मौथावाड़ी से अवैध तरीके से मिट्टी खनन का मामला सामने आया था। इस संबंध में पुलिस ने पहले अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच आगे बढ़ने पर ‘प्रिंस कंस्ट्रक्शन’ का नाम सामने आया। इसी जांच के सिलसिले में पुलिस लालधारी यादव के घर पहुंची थी, जो सांसद गिरिधारी यादव के भाई हैं। एसपी ने साफ किया कि इस कार्रवाई को सांसद के आवास से जोड़ना सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें सांसद से मिलने में कोई आपत्ति नहीं है और उनके व सांसद के बीच किसी व्यक्तिगत दूरी की बात भी उन्होंने खारिज की।
आगे की जांच से खुल सकती है सच्चाई
इस पूरे मामले में सांसद के आरोप और पुलिस के बयान आमने-सामने हैं। सांसद जहां सर्च वारंट और कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं पुलिस का कहना है कि कार्रवाई अवैध मिट्टी खनन की जांच से जुड़ी थी और सांसद के घर पर पुलिस गई ही नहीं थी। सांसद ने इस मामले में भागलपुर प्रक्षेत्र के आईजी से शिकायत करने की बात कही है। ऐसे में आईजी की संभावित जांच से ही पुलिस कार्रवाई की वास्तविक स्थिति और उसके आधार को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।







