Patna Police Training: राजधानी पटना में पुलिस जांच को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना के फोरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी विभाग ने बिहार राज्य पुलिस अकादमी (बीएसपीए), राजगीर के समन्वय से पुलिस उपाधीक्षकों (डीएसपी) के लिए एक दिवसीय चिकित्सा-कानूनी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल के अनुमोदन और मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
इसका उद्देश्य पुलिस अधिकारियों की चिकित्सा-कानूनी और फोरेंसिक प्रक्रियाओं की समझ को गहरा करना और जांच अधिकारियों व फोरेंसिक विशेषज्ञों के बीच समन्वय को मजबूत करना है। यह तीन नियोजित प्रशिक्षण सत्रों में से पहला था, जिसमें डीएसपी के दो और बैचों को जल्द ही इसी तरह का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
जांच प्रक्रियाओं को मिलेगा वैज्ञानिक आधार
प्रशिक्षण में जांच प्रक्रियाओं, पोस्टमार्टम के बाद होने वाले परिवर्तनों, पोस्टमार्टम परीक्षण, चिकित्सा-कानूनी साक्ष्य के संग्रह और संरक्षण, तथा फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में विश्लेषण के लिए जैविक नमूनों को संभालने जैसे विषयों को शामिल किया गया। व्यावहारिक समझ के लिए अधिकारियों को पोस्टमार्टम प्रक्रियाओं के वीडियो प्रदर्शन भी दिखाए गए।
प्रतिभागियों ने एम्स पटना में हाल ही में उद्घाटन किए गए उन्नत फोरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी (एफएमटी) संग्रहालय और शवगृह परिसर का भी दौरा किया। यहां उन्हें समकालीन फोरेंसिक चिकित्सा सुविधाओं और प्रथाओं से परिचित कराया गया। एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र में पुलिस जांच के दौरान सामने आने वाली सामान्य चिकित्सा-कानूनी चुनौतियों पर चर्चा की गई। इनमें साक्ष्य संग्रह, दस्तावेजीकरण, पोस्टमार्टम निष्कर्षों की व्याख्या और फोरेंसिक विश्लेषण शामिल थे।
लावारिस शवों की पहचान में मिलेगी मदद
अधिकारियों को यूमिद परियोजना (UMID Project) के बारे में भी जानकारी दी गई। यह एफएमटी विभाग की एक शोध पहल है, जिसे एम्स नई दिल्ली और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के सहयोग से चलाया जा रहा है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य अज्ञात और लावारिस मृत व्यक्तियों के लिए फेनोटाइप दस्तावेजीकरण और डीएनए प्रोफाइलिंग का उपयोग करके एक राष्ट्रीय डेटा बैंक विकसित करना है। यह पहल लावारिस शवों की वैज्ञानिक पहचान और उनसे जुड़ी जांच में सहायता प्रदान करने के लिए बनाई गई है।
पुलिस और डॉक्टरों के बीच बढ़ेगा समन्वय
इस सत्र का संचालन फोरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. अमित पाटिल ने किया। उनके साथ प्रोफेसर डॉ. विनय कुमार, डॉ. अशोक रस्तोगी, डॉ. तोशल वानखेड़े और डॉ. चैतन्य मित्तल भी उपस्थित थे। विभाग के वरिष्ठ और कनिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी इस कार्यक्रम में सहयोग किया।
एम्स पटना और बिहार राज्य पुलिस अकादमी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य चिकित्सा और कानून प्रवर्तन पेशेवरों के बीच घनिष्ठ सहयोग को बढ़ावा देना है। साथ ही, यह साक्ष्य-आधारित और वैज्ञानिक रूप से सूचित जांचों को प्रोत्साहित करेगा।
यह तीन-भाग वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम का पहला चरण था, जिसमें डीएसपी के दो और बैचों को जल्द ही इसी तरह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। एम्स पटना और बिहार राज्य पुलिस अकादमी का यह संयुक्त प्रयास चिकित्सा और कानून प्रवर्तन पेशेवरों के बीच घनिष्ठ सहयोग को बढ़ावा देगा, जिससे बिहार में अपराध जांच की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आने की उम्मीद है।








